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Thursday, August 20, 2026
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    Breaking News : फ्रॉड हो गया तो घबराएं नहीं!, 1930 पर तुरंत कॉल करें, सही समय पर शिकायत से बच सकता है आपका पैसा, क्या है 14C, online शिकायत कर सकते है, रिफंड का मैसेज आए लेकिन पैसा खाते में न पहुंचे तो?

    प्रीतेश मिश्रा के अनुसार, साइबर अपराध के बाद धैर्य के साथ आधिकारिक प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। पैसा वापस मिलना मामले की परिस्थितियों, रकम की स्थिति और जांच/कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करता है; इसकी कोई गारंटी नहीं होती। लेकिन तत्काल रिपोर्टिंग और सही जानकारी उपलब्ध कराने से रकम को रोकने और रिकवरी की संभावना बेहतर हो सकती है।

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    दिल्ली/ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। डिजिटल लेन-देन ने जिंदगी को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर फ्रॉड का खतरा भी तेजी से बढ़ा है। फर्जी नौकरी, ऑनलाइन खरीदारी, लॉटरी, निवेश, बैंक अधिकारी बनकर कॉल, फर्जी पेमेंट स्क्रीनशॉट और UPI के नाम पर ठगी जैसे मामले लगातार सामने आते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी हो जाए तो वह क्या करे और क्या उसकी रकम वापस मिल सकती है?

    साइबर ट्रेनर एवं साइबर क्राइम इंटरवेंशन ऑफिसर प्रीतेश मिश्रा के मुताबिक, साइबर फ्रॉड के बाद सबसे महत्वपूर्ण चीज है समय पर कार्रवाई। सरकार की व्यवस्था में वित्तीय साइबर फ्रॉड की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए 1930 हेल्पलाइन उपलब्ध है और शिकायत National Cyber Crime Reporting Portal पर भी दर्ज की जा सकती है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, I4C के तहत संचालित Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System का उद्देश्य ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने के लिए त्वरित कार्रवाई करना है।

    पहले समझिए ठग किस तरह बनाते हैं भरोसा

    साइबर ठगी अक्सर अचानक नहीं होती। ठग पहले पीड़ित का भरोसा जीतता है और उसके बाद पैसे ट्रांसफर कराने की कोशिश करता है। कई मामलों में शुरुआत छोटी रकम से होती है। उदाहरण के तौर पर नौकरी, रजिस्ट्रेशन, सर्विस या किसी अन्य काम के नाम पर पहले ₹1,000-2,000 मांगे जाते हैं। रकम भेजने के बाद ठग यह कह सकता है कि भुगतान उसके सिस्टम में दिखाई नहीं दे रहा या तकनीकी समस्या आ गई है। इसके बाद वह अधिक रकम भेजने का दबाव बना सकता है और यह भरोसा दिला सकता है कि पूरी रकम कुछ ही समय में वापस कर दी जाएगी।

    इसी तरह फर्जी बैंक मैसेज, नकली पेमेंट स्क्रीनशॉट और गलत क्रेडिट की कहानी भी ठगी के आम तरीके हैं। ठग यह दावा कर सकता है कि गलती से आपके खाते में ज्यादा पैसे भेज दिए गए हैं और आपसे तत्काल रकम वापस करने को कह सकता है। जल्दबाजी में फैसला लेने का दबाव, अनजान नंबर से लगातार कॉल, फर्जी स्क्रीनशॉट और पैसे वापस मिलने का लालच—ये सभी खतरे की घंटी हैं।

    फ्रॉड हो जाए तो सबसे पहले क्या करें?

    साइबर फ्रॉड होने के बाद घबराने के बजाय तुरंत ये कदम उठाएं:

    पहला कदम—अपने बैंक को तुरंत सूचना दें।
    जिस बैंक खाते, कार्ड, UPI या वित्तीय माध्यम से रकम गई है, उसके आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर पर तत्काल शिकायत करें। बैंक को लेन-देन की जानकारी देकर आवश्यक सुरक्षा कार्रवाई के लिए कहें।

    दूसरा कदम—1930 पर कॉल करें।
    वित्तीय साइबर फ्रॉड की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। आधिकारिक पोर्टल भी वित्तीय साइबर फ्रॉड के मामले में 1930 पर तत्काल रिपोर्ट करने की सलाह देता है।

    तीसरा कदम—ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
    इसके बाद National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करें। शिकायत में बैंक/वॉलेट का नाम, खाता या UPI संबंधी जानकारी, ट्रांजैक्शन आईडी, तारीख, रकम और उपलब्ध स्क्रीनशॉट जैसे विवरण देना उपयोगी है। सरकारी निर्देशों के अनुसार शिकायतकर्ता को प्राप्त acknowledgement/login details को संभालकर रखना चाहिए।

    शिकायत के बाद रकम बचाने की कोशिश कैसे होती है?

    शिकायत दर्ज होने के बाद मामला संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसी और वित्तीय संस्थानों के समन्वय से आगे बढ़ता है। I4C के अंतर्गत CFCFRMS का उद्देश्य वित्तीय धोखाधड़ी की रकम को ठगों द्वारा आगे siphon off किए जाने से रोकना है। पुलिस, बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान मिलकर उपलब्ध जानकारी के आधार पर रकम को रोकने या फ्रीज करने की कार्रवाई कर सकते हैं। यदि रकम अभी किसी संबंधित खाते में उपलब्ध है और समय रहते कार्रवाई हो जाती है, तो उसे रोकने की संभावना बन सकती है। इसके बाद रकम की बहाली कानूनी प्रक्रिया के तहत होती है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि 1930 पर शिकायत करने का मतलब यह नहीं है कि पैसा अपने आप तुरंत वापस आ जाएगा, लेकिन जल्दी शिकायत करने से रकम को रोकने की संभावना बढ़ सकती है।

    गृह मंत्रालय के अनुसार, 31 जनवरी 2026 तक CFCFRMS के माध्यम से 24.65 लाख से अधिक शिकायतों में ₹8,690 करोड़ से अधिक की वित्तीय राशि बचाई गई थी। यह आंकड़ा बताता है कि समय पर रिपोर्टिंग की व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण है।

    हर स्क्रीनशॉट और रिकॉर्ड संभालकर रखें

    साइबर फ्रॉड की शिकायत करते समय घटना से जुड़े सभी डिजिटल सबूत सुरक्षित रखें। इनमें बैंक स्टेटमेंट, UPI ट्रांजैक्शन आईडी, SMS, ईमेल, WhatsApp चैट, आरोपी का मोबाइल नंबर, वेबसाइट/ऐप का लिंक, कॉल की जानकारी और उपलब्ध स्क्रीनशॉट शामिल हो सकते हैं। शिकायत में घटना को क्रमवार और सटीक तरीके से लिखें। कब ठगी हुई, किस नंबर से संपर्क हुआ, किस खाते या UPI पर पैसा भेजा गया और कितनी रकम गई—इन सभी बातों का स्पष्ट उल्लेख जांच में मदद कर सकता है।

    रिफंड का मैसेज आए लेकिन पैसा खाते में न पहुंचे तो?

    ऐसी स्थिति में केवल SMS देखकर संतुष्ट न हों। बैंक खाते का वास्तविक क्रेडिट चेक करें और संबंधित शिकायत/रिफंड की स्थिति की जानकारी लें। Money Restoration से संबंधित सरकारी पोर्टल पर भी प्रक्रिया उपलब्ध है।

    सबसे जरूरी बात—देरी बिल्कुल न करें

    साइबर फ्रॉड में हर मिनट महत्वपूर्ण हो सकता है। ठगी के बाद शर्म या डर के कारण चुप रहना नुकसान को और बढ़ा सकता है। बैंक को तत्काल सूचना दें, 1930 पर कॉल करें और National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करें। साथ ही किसी ऐसे व्यक्ति पर भरोसा न करें जो बाद में फोन करके यह दावा करे कि वह आपकी रकम वापस दिला सकता है और इसके बदले अतिरिक्त शुल्क, OTP, PIN या बैंकिंग विवरण मांगे। ऐसी स्थिति में दूसरी ठगी का खतरा रहता है।

    प्रीतेश मिश्रा के अनुसार, साइबर अपराध के बाद धैर्य के साथ आधिकारिक प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। पैसा वापस मिलना मामले की परिस्थितियों, रकम की स्थिति और जांच/कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करता है; इसकी कोई गारंटी नहीं होती। लेकिन तत्काल रिपोर्टिंग और सही जानकारी उपलब्ध कराने से रकम को रोकने और रिकवरी की संभावना बेहतर हो सकती है।

    साइबर फ्रॉड के बाद याद रखें: घबराना नहीं, देर नहीं करनी है—बैंक को सूचना दें, 1930 पर कॉल करें और आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।

    प्रीतेश मिश्रा
    साइबर क्राइम इंटरवेंशन ऑफिसर, ISAC एवं साइबर ट्रेनर, MeitY, भारत सरकार (ISEA प्रोजेक्ट फेज-III)

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