दिल्ली, द न्यूज क्लिक। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सुनील बंसल एक बार फिर अपनी रणनीतिक क्षमता के कारण चर्चा में हैं। करीब एक दशक तक संगठन में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाने वाले बंसल ने बिना ज्यादा प्रचार-प्रसार के, अपनी ‘साइलेंट रणनीति’ के जरिए पार्टी को मजबूत करने का काम किया है। करीब 12 साल के राजनीतिक सफर में बंसल ने हमेशा लो-प्रोफाइल रहकर काम किया। वे न तो टीवी डिबेट्स में अधिक दिखाई दिए और न ही सुर्खियों में रहने की कोशिश की, लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी रणनीति बेहद प्रभावी साबित हुई। उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सफलता में अहम भूमिका निभाने के बाद, उन्हें पश्चिम बंगाल जैसे चुनौतीपूर्ण राज्य में जिम्मेदारी दी गई।
पश्चिम बंगाल में बदला चुनावी गणित
पश्चिम बंगाल, जो लंबे समय तक बीजेपी के लिए कठिन राजनीतिक क्षेत्र माना जाता था, वहां सुनील बंसल की रणनीति ने पार्टी को नई ताकत दी। उन्होंने जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ उन वोटर्स पर ध्यान केंद्रित किया, जो पहले मतदान प्रक्रिया से दूर रहते थे। बंसल ने ऐसे मतदाताओं की पहचान कर उन्हें मतदान के लिए प्रेरित किया। बताया जाता है कि उनकी रणनीति के चलते करीब 10% ऐसे मतदाता भी वोटिंग के लिए बाहर आए, जो पहले मतदान केंद्र तक नहीं पहुंचते थे।
‘मौन रणनीति’ बनी सफलता की कुंजी
सुनील बंसल की सबसे बड़ी खासियत उनकी ‘मौन रणनीति’ रही। उन्होंने बिना बड़े नारों या आक्रामक प्रचार के, संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया।
घर-घर संपर्क अभियान
छोटे-छोटे स्थानीय कार्यक्रम
मतदाताओं से सीधा संवाद
इन प्रयासों ने बीजेपी को जमीनी स्तर पर मजबूती दी।
महिला और स्थानीय मुद्दों पर खास फोकस
बंसल ने चुनावी रणनीति में महिलाओं को विशेष रूप से केंद्र में रखा। महिला सम्मान और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी गई, जिससे महिला वोट बैंक में पार्टी की पकड़ मजबूत हुई।
इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय संस्कृति और पहचान को भी अपनी रणनीति में शामिल किया, जिससे पार्टी को बंगाल की अस्मिता से जोड़ने में मदद मिली।
संगठन को बूथ स्तर तक किया मजबूत
चुनाव के दौरान बंसल ने संगठनात्मक ढांचे पर खास ध्यान दिया। टिकट वितरण में स्थानीय कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी गई और बूथ स्तर पर मजबूत नेटवर्क तैयार किया गया। इससे पार्टी की पकड़ हर क्षेत्र में मजबूत हुई।
राजनीतिक कद में हुआ इजाफा
पश्चिम बंगाल में मिली सफलता ने सुनील बंसल को राष्ट्रीय राजनीति में एक मजबूत रणनीतिकार के रूप में स्थापित कर दिया है। उनकी कार्यशैली ने यह साबित किया कि बिना शोर-शराबे के भी बड़े चुनावी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

