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Sunday, May 10, 2026
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    GIMS Hospital News : GIMS एडवांस्ड पीडियाट्रिक ऑर्थोपीडिक सर्जरी के लिए तैयार, हर साल 1,000 से अधिक बच्चे होंगे लाभान्वित, अंगों में विकृति और जटिल फ्रैक्चर जैसी समस्याओं से जूझ रहे बच्चों को समय पर और विशेष देखभाल मिल सकेगी

    GIMS caters to Advanced Pediatric Orthopedic Surgery, providing timely and specialized care to more than 1,000 children every year with a range of problems ranging from size, limb deformity and complex regimentation

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    ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। ग्रेटर नोएडा स्थित GIMS अब पीडियाट्रिक ऑर्थोपीडिक (बच्चों की हड्डियों से जुड़ी) एडवांस सर्जरी करने में सक्षम है। इससे क्लबफुट, अंगों में विकृति और जटिल फ्रैक्चर जैसी समस्याओं से जूझ रहे बच्चों को समय पर और विशेष देखभाल मिल सकेगी। प्लान इंटरनेशनल (इंडिया चैप्टर) द्वारा लागू की गई CSR (कॉरपोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी) पहल के तहत यह उपलब्धि हेल्थियम मेडटेक के सहयोग से मिली है।

    ग्रेटर नोएडा स्थित गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS) अब पीडियाट्रिक ऑर्थोपीडिक की एडवांस सर्जरी करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। GIMS ने यह पहल हेल्थियम मेडटेक की CSR पहल के सहयोग से और प्लान इंटरनेशनल (इंडिया चैप्टर) द्वारा लागू की गई योजना के तहत की है। संस्थान को बच्चों की स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मिली है। संस्थान इसमें अब डेवलपमेंटल डिस्प्लेसमेंट ऑफ हिप (DDH), क्लबफुट, अंगों की विकृतियों, फ्रैक्चर और हड्डियों से जुड़ी अन्य जटिल बीमारियों का इलाज कर सकता है। Midas Rex MR8 हाई स्पीड इलेक्ट्रिक ड्रिल सिस्टम, बच्चों के कूल्हे की प्लेटिंग सेट, बच्चों और छोटी हड्डियों के लिए ड्रिल और आरी सिस्टम, बच्चों की हड्डियों की सर्जरी के उपकरणों का सेट और एक C-Arm मशीन जैसे विशेष उपकरण स्थापित करने के साथ, GIMS अब बच्चों को सटीक, सुरक्षित और उनकी उम्र के हिसाब से उचित सर्जिकल समाधान देने के लिए तैयार है।

    भारत में बच्चों की हड्डियों से जुड़ी बीमारियों का आंकड़ा काफी ज़्यादा है। यहां एक से दो प्रतिशत बच्चे ‘क्लबफुट’ जैसी बीमारियों के साथ पैदा होते हैं, और कई अन्य बच्चों में चोट, इन्फेक्शन या इलाज न होने की वजह से शारीरिक विकृतियां पैदा हो जाती हैं। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में, विशेषज्ञ इलाज तक सीमित पहुंच के कारण अक्सर इलाज में देरी होती है, जिससे जटिलताओं, विकलांगता और इलाज के खर्च बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है।

    इस कमी को दूर करते हुए, GIMS में मज़बूत किए गए इन्फ्रास्ट्रक्चर से हर साल 1,000 से ज़्यादा बच्चों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे इन बच्चों को समय पर इलाज मिल पाएगा और इस क्षेत्र से बाहर रेफर करने की ज़रूरत कम हो जाएगी।

    लॉन्च के अवसर पर मुख्य अतिथि और उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. जी.एन. सिंह ने कहा, “यह पहल हमारी उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है जिसके तहत हम यह सुनिश्चित करना

    चाहते हैं कि हर बच्चे को- चाहे उसकी पृष्ठभूमि कुछ भी हो- गुणवत्तापूर्ण और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों। इस तरह की साझेदारियों के माध्यम से सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों को सुदृढ़ बनाना, एक समावेशी और न्यायसंगत स्वास्थ्य प्रणाली के निर्माण के लिए बहुत जरूरी है।”

    GIMS के डायरेक्टर जनरल, डॉ. (ब्रिगेडियर) राकेश कुमार गुप्ता ने संस्थान की बढ़ी कैपेसिटी पर ज़ोर देते हुए कहा, “इस आधुनिक उपकरण की मदद से, GIMS अब पीडियाट्रिक ऑर्थोपीडिक के जटिल मामलों को ज़्यादा सटीकता और सुरक्षा के साथ संभालने के लिए तैयार है। इससे मरीज़ों को दूसरे अस्पतालों में भेजने की ज़रूरत काफ़ी कम हो जाएगी और यह सुनिश्चित होगा कि बच्चों को उनके घर के पास ही समय पर इलाज मिल सके।”

    हेल्थकेयर तक पहुंच को मज़बूत करने के प्रति संगठन की प्रतिबद्धता पर ज़ोर देते हुए, हेल्थियम मेडटेक के CEO और MD अनीश बाफना ने कहा, “हेल्थियरम में, हम इनोवेशन और पहुंच दोनों को संभव बनाकर चिकित्सा परिणामों को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। GIMS और प्लान इंटरनेशनल (इंडिया चैप्टर) परियोजना जैसी पहलों का समर्थन करना, देखभाल वितरण प्रणालियों को मज़बूत करने और हेल्थकेयर प्रदाताओं को विशेष पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक देखभाल प्रदान करने के लिए जरूरी उपकरणों से लैस करने के हमारे प्रयासों को दर्शाता है। हमारा लक्ष्यज़मीनी स्तर पर क्षमताओं को बढ़ाकर यह सुनिश्चित करना है कि समय पर और भरोसेमंद इलाज उन बच्चों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।”

    प्लान इंटरनेशनल (इंडिया चैप्टर) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर श्री मोहम्मद आसिफ ने कहा, “इस पार्टनरशिप के ज़रिए, हम कमज़ोर समुदायों के लिए स्पेशलाइज्ड पीडियाट्रिक हेल्थकेयर तक पहुंच को मज़बूत कर रहे हैं। इस पहल से हर साल 1,000 से ज़्यादा बच्चों को सीधे तौर पर फ़ायदा होगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि उन्हें बिना किसी आर्थिक या भौगोलिक रुकावट के, समय पर, सुरक्षित और ज़िंदगी बदलने वाला ऑर्थोपेडिक इलाज मिल सके।”

    उन्होंने इस तरह के सहयोग के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा कि वंचित आबादी तक विशेष स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnerships) बहुत जरूरी है।

    इस लॉन्च कार्यक्रम के दौरान औपचारिक उद्घाटन के साथ एक ‘इम्पैक्ट फ़िल्म’ की स्क्रीनिंग की गई। इसके अलावा इस दौरान, गणमान्य व्यक्तियों ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया, लाभार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए और GIMS के ऑर्थोपेडिक्स विभाग को उपकरणों का औपचारिक हस्तांतरण भी किया गया।

    इस पहल के साथ, GIMS पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पीडियाट्रिक ऑर्थोपीडिक संबंधी देखभाल के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि बच्चों को उन्नत उपचार मिल सके, वे अपनी मोबिलिटी दोबारा हासिल कर सकें और अधिक स्वस्थ व स्वतंत्र जीवन जी सकें।

    गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS) के बारे में
    उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2016 में स्थापित, ग्रेटर नोएडा के कासना स्थित गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS) एक ऑटोनोमस टर्शरी केयर टीचिंग हॉस्पिटल एंड मेडिकल इंस्टिट्यूशन है। GIMS ग्रेटर नोएडा, गौतम बुद्ध नगर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सेवा करने वाले लीडिंग पब्लिक हेल्थकेयर इंस्टिट्यूशन के रूप में उभरा है।

    यह संस्थान 500 से ज़्यादा बेड वाला एक मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल संचालित है, जसमें एडवांस्ड मेडिकल इन्फ्रा, आधुनिक ऑपरेशन थिएटर, इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर सर्विसेज, आईसीयू और ऑर्थोपीडिक्स, पीडियाट्रिक्स, सर्जरी, कार्डियोलॉजी और क्रिटिकल केयर जैसे विशेष विभाग संचालित हैं। अफॉर्डेबल और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के साथ-साथ, GIMS मेडिकल एजुकेशन, रिसर्च एंड इनोवेशन पर भी ध्यान केंद्रित करता है, जिसका लक्ष्य रोगी देखभाल और क्लीनिकल एडवांसमेंट के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनना है।

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