ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे।
यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने एक बार फिर यह संदेश देने की कोशिश की है कि विकास परियोजनाओं के साथ किसानों के हितों को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। लंबे समय से आबादी भूखंडों की प्रतीक्षा कर रहे किसानों के लिए अब बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। प्राधिकरण ने सेक्टर-29 स्थित तिरथली गांव के किसानों को 7 प्रतिशत आबादी भूखंडों के आरक्षण पत्र जारी कर दिए हैं। इस फैसले के बाद किसानों में खुशी का माहौल है और इसे प्राधिकरण की एक बड़ी सकारात्मक पहल माना जा रहा है।
सीईओ ने खुद किसान को सौंपा आरक्षण पत्र, किसानों ने जताया आभार
इस महत्वपूर्ण अवसर पर यमुना प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी राकेश कुमार सिंह ने स्वयं किसान वीरेंद्र कुमार को उनके आबादी भूखंड का आरक्षण पत्र सौंपा। यह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि किसानों और प्राधिकरण के बीच भरोसे को मजबूत करने वाला प्रतीकात्मक संदेश भी माना जा रहा है।
प्राधिकरण अधिकारियों के अनुसार कुल 589 किसानों को आरक्षण पत्र जारी किए गए हैं, जिनमें से एक पत्र समारोह के दौरान व्यक्तिगत रूप से सौंपा गया, जबकि बाकी 588 किसानों के पत्र भूलेख विभाग द्वारा डाक माध्यम से भेज दिए गए हैं।
विकास और किसान हित साथ-साथ: अपैरल पार्क
परियोजना के बीच बड़ा फैसला
यमुना प्राधिकरण सेक्टर-29 में बड़े स्तर पर अपैरल पार्क विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। इस परियोजना को क्षेत्र के औद्योगिक विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लेकिन इसके साथ ही प्राधिकरण ने किसानों के अधिकारों और वादों को भी प्राथमिकता देते हुए आबादी भूखंड आवंटन की प्रक्रिया तेज कर दी है। किसानों का कहना है कि वर्षों से वे अपने भूखंडों के आरक्षण पत्र का इंतजार कर रहे थे। अब जब प्राधिकरण ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है, तो इससे ग्रामीणों के बीच सकारात्मक माहौल बना है।
जल्द मिलेगा विकसित भूखंडों का भौतिक कब्जा
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि केवल आरक्षण पत्र जारी कर प्रक्रिया को अधूरा नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि अब इन भूखंडों को तेजी से विकसित कर किसानों को भौतिक कब्जा भी दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार—
“प्राधिकरण पूरी पारदर्शिता के साथ किसानों को उनका अधिकार देने के लिए प्रतिबद्ध है। सेक्टर-29 में आधारभूत सुविधाओं का विकास तेजी से किया जाएगा ताकि किसानों को जल्द से जल्द विकसित प्लॉट उपलब्ध कराए जा सकें।”
किसानों में उत्साह, बोले—‘अब दिख रहा है भरोसा’
तिरथली गांव और आसपास के किसानों में इस फैसले के बाद उत्साह दिखाई दिया। किसानों का कहना है कि लंबे समय से आबादी भूखंडों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी, लेकिन अब प्राधिकरण की इस पहल से उन्हें राहत मिली है।
कई किसानों ने कहा कि यदि इसी तरह पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से कार्य होते रहे तो विकास परियोजनाओं को लेकर किसानों का विश्वास और मजबूत होगा।
क्या है 7 प्रतिशत आबादी भूखंड योजना?
यमुना प्राधिकरण की नीति के अनुसार जिन किसानों की भूमि विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जाती है, उन्हें मुआवजे के साथ-साथ 7 प्रतिशत विकसित आबादी भूखंड देने का प्रावधान किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास की प्रक्रिया में किसानों की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी बनी रहे।
इन भूखंडों के माध्यम से किसान भविष्य में—आवासीय निर्माण, व्यावसायिक गतिविधियां, किराये और निवेश, पारिवारिक सुरक्षा जैसे कई लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

