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Friday, August 21, 2026
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    Gaur City News : “My Walk, My Rights” आंदोलन ने फिर पकड़ी रफ्तार, मुख्यमंत्री अब वॉकिंग ट्रैक ही नहीं, हरित क्षेत्र और सैकड़ों पेड़ों को बचाने की भी जंग, 35% नॉन-एफएआर ग्रीन बेल्ट में निर्माण पर उठे सवाल, ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासियों ने खोला मोर्चा, 2016 में शुरू हुआ आंदोलन फिर हुआ सक्रिय, ‘हर पेड़ हमारे भविष्य की सांस है’

    ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित गौर सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम परिसर में एक बार फिर वर्षों पुराना "My Walk, My Rights" आंदोलन नए स्वरूप में जीवित हो उठा है। इस बार आंदोलन केवल वॉकिंग ट्रैक और स्टेडियम में प्रवेश के अधिकार तक सीमित नहीं है, बल्कि हरित क्षेत्र, पर्यावरण संरक्षण और वर्षों पुराने पेड़ों को बचाने की लड़ाई भी इसका प्रमुख उद्देश्य बन चुकी है। शनिवार को गौर सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम के प्रवेश द्वार पर बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर अपनी मांगों को बुलंद किया।

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    ग्रेटर नोएडा वेस्ट, द न्यूज क्लिक। ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित गौर सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम परिसर में एक बार फिर वर्षों पुराना “My Walk, My Rights” आंदोलन नए स्वरूप में जीवित हो उठा है। इस बार आंदोलन केवल वॉकिंग ट्रैक और स्टेडियम में प्रवेश के अधिकार तक सीमित नहीं है, बल्कि हरित क्षेत्र, पर्यावरण संरक्षण और वर्षों पुराने पेड़ों को बचाने की लड़ाई भी इसका प्रमुख उद्देश्य बन चुकी है। शनिवार को गौर सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम के प्रवेश द्वार पर बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर अपनी मांगों को बुलंद किया।

    प्रदर्शन की सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस और निवासियों के बीच बातचीत के बाद फिलहाल वॉकर्स के लिए स्टेडियम का प्रवेश द्वार अस्थायी रूप से खोल दिया गया। हालांकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह केवल अस्थायी राहत है और जब तक स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

    ग्रीन बेल्ट में निर्माण की तैयारी देखकर भड़के निवासी

    गेट खुलने के बाद जब निवासी स्टेडियम परिसर के भीतर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निर्माण की तैयारियां चल रही हैं। कई स्थानों पर विशाल आरसीसी (RCC) पिलर्स खड़े करने के लिए गहरे गड्ढे खोदे जा चुके हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य के लिए पहले ही कई वर्षों पुराने पेड़ों को काट दिया गया है, जबकि जो पेड़ अभी बचे हुए हैं, उनके भी जल्द हटाए जाने की आशंका बनी हुई है। निवासियों का कहना है कि जिस हरित क्षेत्र को पर्यावरण संरक्षण और नागरिकों के खुले उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जाना चाहिए था, वहां निर्माण गतिविधियां चिंता का विषय हैं। इससे पूरे इलाके का पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो सकता है।

    35 प्रतिशत नॉन-एफएआर ग्रीन बेल्ट में निर्माण पर उठे सवाल

    प्रदर्शन के दौरान लोगों ने सवाल उठाया कि 35 प्रतिशत Non-FAR ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में आखिर किसकी अनुमति से निर्माण कराया जा रहा है। क्या इस निर्माण के लिए सभी वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त की गई हैं? क्या पर्यावरणीय नियमों और प्राधिकरण के मानकों का पालन किया जा रहा है?

    निवासियों का कहना है कि यदि यह निर्माण नियमानुसार हो रहा है तो संबंधित विभाग सार्वजनिक रूप से सभी स्वीकृतियां और नक्शे उपलब्ध कराए। वहीं यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।

    2016 में शुरू हुआ आंदोलन फिर हुआ सक्रिय

    स्थानीय लोगों ने बताया कि जब उन्होंने इस टाउनशिप में अपने घर खरीदे थे, तब उन्हें खुले हरित क्षेत्र, स्पोर्ट्स स्टेडियम और बेहतर जीवनशैली का सपना दिखाया गया था। वर्ष 2016 में इन्हीं मुद्दों को लेकर शुरू हुआ “My Walk, My Rights” अभियान अब एक बार फिर नए जोश के साथ सक्रिय हो गया है। इस बार आंदोलन में पहले से जुड़े पुराने सदस्य भी शामिल हुए हैं और उनके साथ बड़ी संख्या में नए निवासी भी जुड़ रहे हैं। लोगों का कहना है कि अब यह केवल वॉकिंग ट्रैक की लड़ाई नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित क्षेत्र और पर्यावरण बचाने का जनआंदोलन बन चुका है।

    “My Walk, My Rights” आंदोलन ने फिर पकड़ी रफ्तार, मुख्यमंत्री अब वॉकिंग ट्रैक ही नहीं, 35% नॉन-एफएआर ग्रीन बेल्ट में निर्माण पर उठे सवाल

    निवासियों ने रखीं ये प्रमुख मांगें

    प्रदर्शन के दौरान निवासियों ने प्रशासन और संबंधित विभागों के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं— 35 प्रतिशत Non-FAR ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्य की तत्काल स्वतंत्र जांच कराई जाए।

    • भूमि का सीमांकन (Demarcation) कर सभी स्वीकृतियों और नक्शों का सार्वजनिक सत्यापन कराया जाए।
    • वर्षों पुराने पेड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा किसी भी प्रकार की कटाई पर तत्काल रोक लगाई जाए।
    • गौर सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम में सभी पात्र निवासियों के लिए स्थायी एवं निर्बाध प्रवेश सुनिश्चित किया जाए, क्योंकि निवासी इसके लिए वार्षिक शुल्क भी जमा करते हैं।

    ‘हर पेड़ हमारे भविष्य की सांस है’

    गौतम बुद्ध नगर विकास समिति के सचिव अनूप कुमार सोनी ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पर्यावरण और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा, “एक पेड़ बनने में वर्षों लगते हैं, लेकिन उसे काटने में केवल कुछ मिनट लगते हैं। हम अपने पेड़ों, हरित क्षेत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। यदि आवश्यकता पड़ी तो प्रशासन, प्राधिकरण, वन विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों के समक्ष लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज और अधिक मजबूती से उठाएंगे। हमारा उद्देश्य विकास का विरोध करना नहीं, बल्कि नियमानुसार और पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास सुनिश्चित करना है।”

    स्थायी समाधान तक जारी रहेगा आंदोलन

    प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि फिलहाल गेट खुल जाना केवल एक अस्थायी व्यवस्था है। यदि भविष्य में फिर से प्रवेश रोका गया या ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में निर्माण को लेकर उनकी आशंकाओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे इस मुद्दे को प्रशासन, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण, वन विभाग और अन्य सक्षम अधिकारियों के समक्ष व्यापक स्तर पर उठाएंगे।

    प्रदर्शन में अनीता प्रजापति, ज्ञानेश शर्मा, अमरजीत राठौर, योगेश भौगोर, मुकेश पाल, नेहा सिंगला, एच.के. भारद्वाज सहित बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

    “एक पेड़ बनने में वर्षों लगते हैं, लेकिन उसे काटने में कुछ मिनट। हम अपने पेड़ों, हरित क्षेत्र और अपने अधिकार—दोनों की रक्षा के लिए निवासी प्रतिबद्ध हैं। यदि आवश्यकता पड़ी तो जनहित, हरित क्षेत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए यह लोकतांत्रिक जनआवाज़ आगे भी पूरी मजबूती के साथ उठती रहेगी।”

    द न्यूज क्लिक की न्यूज

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