ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रहे लैक्रोस खेल को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत गलगोटिया विश्वविद्यालय में पुरुष और महिला राष्ट्रीय लैक्रोस टीमों का नेशनल कोचिंग कैंप आयोजित किया जा रहा है। यह विशेष प्रशिक्षण शिविर खिलाड़ियों को आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने के उद्देश्य से लगाया गया है। इसमें मलेशिया में होने वाले साउथ ईस्ट एशियन कप-2026 तथा ऑस्ट्रेलिया के सनशाइन कोस्ट में आयोजित होने वाली एशिया पैसिफिक लैक्रोस सिक्सेस चैंपियनशिप-2026 की तैयारी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
लैक्रोस दुनिया के सबसे तेजी से विकसित हो रहे टीम खेलों में शामिल है, जिसमें गति, रणनीति, कौशल और टीम भावना का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। वर्ष 2028 में लॉस एंजिल्स ओलंपिक में इसके सिक्सेस प्रारूप को शामिल किए जाने के बाद दुनिया भर के देशों ने इस खेल में निवेश और खिलाड़ियों के विकास पर विशेष ध्यान देना शुरू कर दिया है। भारत भी इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और हाल के वर्षों में भारतीय टीमों के प्रदर्शन ने इस खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
गलगोटिया विश्वविद्यालय में आयोजित इस राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में देश के विभिन्न राज्यों से कुल 63 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। इनमें हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, असम, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, गोवा, जम्मू-कश्मीर और आंध्र प्रदेश के खिलाड़ी शामिल हैं। पुरुष वर्ग में 33 और महिला वर्ग में 30 खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जो देशभर में लैक्रोस की बढ़ती लोकप्रियता का संकेत है।
इस शिविर का नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रसिद्ध जापानी खिलाड़ी और कोच मिस युकारी यामामोटो कर रही हैं, जिन्हें भारतीय राष्ट्रीय टीम कैंप का मुख्य कोच नियुक्त किया गया है। उन्होंने जापान का प्रतिनिधित्व करते हुए कई प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है और एशियन लैक्रोस गेम्स तथा लैक्रोस फेडरेशन कप जैसे बड़े आयोजनों में कोचिंग का अनुभव भी प्राप्त किया है। उनके अनुभव और मार्गदर्शन से भारतीय खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीकों और रणनीतियों का लाभ मिल रहा है।
महिला खिलाड़ियों के लिए आयोजित विशेष प्रशिक्षण सत्र में आक्रामक रणनीति, मैच की तैयारी और तकनीकी कौशल पर विशेष ध्यान दिया गया, जबकि पुरुष टीम के खिलाड़ियों को वन-ऑन-वन गेम सिचुएशन, निर्णय क्षमता, गति और उन्नत मैच तकनीकों का अभ्यास कराया गया। इसके अलावा खिलाड़ियों के मानसिक विकास और प्रतिस्पर्धात्मक दबाव से निपटने के लिए काउंसलिंग एवं परफॉर्मेंस साइकोलॉजी सेशन भी आयोजित किया गया, जिसमें आत्मविश्वास बढ़ाने, तनाव प्रबंधन और सकारात्मक सोच विकसित करने पर जोर दिया गया।
यह शिविर भारतीय लैक्रोस के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष के बाद आयोजित किया जा रहा है। इसी वर्ष रियाद में आयोजित एशियन लैक्रोस गेम्स-2026 में भारतीय पुरुष और महिला दोनों टीमों ने स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया था। इस उपलब्धि ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति को और मजबूत किया है तथा युवा खिलाड़ियों के लिए नए अवसरों के द्वार खोले हैं।
राष्ट्रीय टीमों की मेजबानी के साथ गलगोटिया विश्वविद्यालय खेलों के क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति लगातार दर्ज करा रहा है। हाल ही में विश्वविद्यालय के खिलाड़ियों ने अहमदाबाद में आयोजित प्रथम विश्व योगासन चैंपियनशिप-2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए पांच स्वर्ण पदक जीते थे। इस प्रतियोगिता में 79 देशों के 522 खिलाड़ियों ने भाग लिया था और भारत 114 पदकों के साथ पदक तालिका में शीर्ष स्थान पर रहा था।
गलगोटिया विश्वविद्यालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. ध्रुव गलगोटिया ने कहा कि भारतीय लैक्रोस राष्ट्रीय टीमों के प्रशिक्षण शिविर की मेजबानी करना विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों में अपार संभावनाएं हैं और यदि उन्हें उचित अवसर, आधुनिक सुविधाएं तथा उत्कृष्ट प्रशिक्षण मिले तो वे विश्व स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकते हैं। विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ खेलों में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं और आधुनिक प्रशिक्षण ढांचे के माध्यम से गलगोटिया विश्वविद्यालय न केवल खिलाड़ियों को बेहतर मंच उपलब्ध करा रहा है, बल्कि भारतीय खेलों को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राष्ट्रीय लैक्रोस टीमों का यह प्रशिक्षण शिविर भारतीय खेल जगत में एक नई ऊर्जा और ओलंपिक सपनों को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

