नोएडा, द न्यूज क्लिक। नोएडा शहर में लगातार बढ़ते ट्रैफिक जाम और वाहन जनित प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए कार्यालयों और औद्योगिक इकाइयों के कार्य समय में अंतर यानी ‘स्टैगर्ड टाइमिंग’ (Staggered Timing) लागू करने की मांग उठी है। इस संबंध में जिलाधिकारी गौतमबुद्ध नगर श्रीमती मेधा रूपम, आईएएस को पत्र भेजकर जनहित में इस व्यवस्था को लागू करने की दिशा में पहल करने का अनुरोध किया गया है।
पत्र में कहा गया है कि नोएडा में बड़ी संख्या में कॉरपोरेट कार्यालय, औद्योगिक इकाइयां और विभिन्न संस्थान संचालित हैं। इनमें काम करने वाले हजारों कर्मचारी प्रतिदिन कैब, निजी कार और अन्य वाहनों के माध्यम से कार्यालय पहुंचते हैं। अधिकांश संस्थानों के खुलने और बंद होने का समय लगभग एक जैसा होने के कारण सुबह और शाम के पीक आवर में प्रमुख सड़कों एवं मार्गों पर अचानक वाहनों का दबाव कई गुना बढ़ जाता है। इसका सीधा असर शहर की यातायात व्यवस्था पर पड़ता है और लोगों को प्रतिदिन लंबे समय तक ट्रैफिक जाम में फंसना पड़ता है। जाम के कारण जहां लोगों का बहुमूल्य समय बर्बाद होता है, वहीं वाहनों के लंबे समय तक धीमी गति से चलने अथवा खड़े रहने से ईंधन की खपत भी बढ़ती है। इसके साथ ही वाहन जनित प्रदूषण में भी इजाफा होता है।
पीक आवर का दबाव कम करने का सुझाव
पत्र में सुझाव दिया गया है कि अलग-अलग कॉरपोरेट कार्यालयों, औद्योगिक इकाइयों और संस्थानों के कार्य समय में 30 मिनट से लेकर 2 घंटे तक का अंतर निर्धारित किया जा सकता है। इससे एक ही समय पर बड़ी संख्या में कर्मचारियों के सड़कों पर आने और वापस लौटने की स्थिति को कम किया जा सकेगा। मसलन, कुछ संस्थानों का कार्यालय समय सुबह 8 बजे से निर्धारित किया जाए, कुछ का 8:30 बजे, जबकि अन्य संस्थानों का समय 9 बजे या उसके बाद रखा जा सकता है। इसी प्रकार शाम को भी संस्थानों के छुट्टी के समय में अंतर रखा जा सकता है। इससे पीक आवर में वाहनों के एक साथ सड़क पर उतरने की स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
कई विभागों के बीच समन्वय की जरूरत
पत्र में कहा गया है कि नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक एवं कॉरपोरेट शहर में ट्रैफिक प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक और व्यावहारिक उपायों पर काम करना जरूरी है। ‘स्टैगर्ड टाइमिंग’ को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए जिला प्रशासन, नोएडा प्राधिकरण, पुलिस विभाग, यातायात विभाग तथा प्रमुख औद्योगिक और कॉरपोरेट संस्थानों के बीच समन्वय आवश्यक होगा। इसी उद्देश्य से जिलाधिकारी से अनुरोध किया गया है कि संबंधित विभागों एवं प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित कर इस व्यवस्था की व्यवहारिकता पर चर्चा की जाए और आवश्यक कार्ययोजना तैयार की जाए।
ट्रैफिक के साथ प्रदूषण पर भी पड़ेगा असर
पत्र में जोर दिया गया है कि स्टैगर्ड टाइमिंग का उद्देश्य केवल ट्रैफिक जाम को कम करना नहीं, बल्कि इसके माध्यम से ईंधन की बचत और वाहन जनित प्रदूषण को नियंत्रित करना भी है। यदि पीक आवर में सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होता है तो जाम की अवधि घट सकती है, जिससे वाहनों की अनावश्यक ईंधन खपत और उत्सर्जन में भी कमी आने की संभावना है। नोएडा में लगातार बढ़ती आबादी, औद्योगिक गतिविधियों और कॉरपोरेट कार्यालयों की संख्या को देखते हुए यातायात व्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में कार्यालयों और उद्योगों के समय में समुचित अंतर रखने की व्यवस्था को ट्रैफिक प्रबंधन के एक अतिरिक्त उपाय के रूप में लागू किया जा सकता है।
पत्र में जिलाधिकारी मेधा रूपम से इस विषय को गंभीर जनहित का मामला मानते हुए संबंधित विभागों के साथ आवश्यक पहल करने का अनुरोध किया गया है। यदि इस प्रस्ताव पर सहमति बनती है तो नोएडा में ट्रैफिक प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

