‘विकसित भारत’ के लिए स्वदेशी ज्ञान, कौशल और नवाचार को मजबूत करने पर जोर; फार्मेसी के विद्यार्थियों से वैश्विक अवसरों के लिए तैयार होने और शोध आधारित शिक्षा अपनाने का आह्वान
ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। लॉयड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के फार्मेसी विभाग की ओर से ‘वॉइसेज़ दैट शेप टुमारो’ श्रृंखला के अंतर्गत ‘ग्लोबल लीडरशिप टॉक’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की थीम ‘स्ट्रेंथनिंग द इंडिजिनस स्ट्रेंथ्स फॉर विकसित भारत’ यानी विकसित भारत के लिए स्वदेशी शक्तियों को सुदृढ़ करना रही। इसमें मुख्य वक्ता के रूप में पूना कॉलेज ऑफ फार्मेसी के प्राचार्य और भारती विद्यापीठ, पुणे के फैकल्टी ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज के डीन डॉ. आत्माराम पांडुरंग पवार शामिल हुए। फार्मेसी शिक्षा और संस्थान निर्माण में उनके योगदान के लिए उन्हें ‘ग्लोबल आइकॉनिक लीडरशिप अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए डॉ. पवार ने भारतीय ज्ञान परंपरा, शिक्षा की भूमिका और फार्मेसी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की संभावनाओं पर विचार रखे। उन्होंने युवाओं से केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित न रहने, बल्कि व्यावहारिक कौशल, नवाचार, शोध और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का आह्वान किया।
भारतीय ज्ञान परंपरा से वैश्विक नेतृत्व तक का सफर
डॉ. पवार ने तक्षशिला और नालंदा जैसे प्राचीन शिक्षा केंद्रों तथा गुरुकुल परंपरा का उल्लेख करते हुए भारत की ऐतिहासिक शैक्षणिक विरासत पर प्रकाश डाला। उन्होंने संस्कृत के महान वैयाकरण पाणिनि का उदाहरण देते हुए भारतीय विद्वत्ता और ज्ञान की गहराई को रेखांकित किया। आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। इनके प्रभावी उपयोग के लिए वैज्ञानिक सत्यापन, आधुनिक अनुसंधान और गुणवत्तापूर्ण अध्ययन को बढ़ावा देना आवश्यक है।
महात्मा गांधी की समग्र शिक्षा की अवधारणा का उल्लेख करते हुए डॉ. पवार ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि हाथ, हृदय और बुद्धि का संतुलित विकास करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक तकनीक और वैश्विक ज्ञान के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

फार्मेसी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और शोध की अहम भूमिका
कार्यक्रम में भारत के फार्मास्युटिकल उद्योग की प्रगति और भविष्य की चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। भारत किफायती जेनेरिक दवाओं और टीकों के उत्पादन एवं आपूर्ति के कारण वैश्विक दवा बाजार में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। हालांकि, उद्योग की दीर्घकालिक मजबूती के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। दवाओं के सक्रिय औषधीय घटकों (एपीआई) के निर्माण में आत्मनिर्भरता, गुणवत्ता मानकों का पालन, नई दवाओं की खोज और शोध आधारित नवाचार जैसे विषय भी महत्वपूर्ण हैं। उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना और बल्क ड्रग पार्क जैसी पहलें घरेलू औषधि निर्माण क्षमता को मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा हैं।
वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि फार्मेसी के विद्यार्थियों को बदलती औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप तकनीकी दक्षता, शोध क्षमता और नैतिक जिम्मेदारी विकसित करनी चाहिए। इससे वे देश के औषधि उद्योग और स्वास्थ्य सेवाओं में प्रभावी योगदान दे सकेंगे।
फार्मेसी विद्यार्थियों के लिए रोजगार के नए अवसर
लॉयड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की ग्रुप डायरेक्टर, चीफ स्ट्रैटेजी ऑफिसर और हेड ऑफ ग्रोथ डॉ. वंदना अरोड़ा सेठी ने अपने संबोधन में डॉ. पवार के फार्मेसी शिक्षा, संस्थान निर्माण, पाठ्यक्रम विकास और विभिन्न शैक्षणिक समितियों में योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने फार्मेसी क्षेत्र में रोजगार के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए हैदराबाद को फार्मा और लाइफ साइंसेज उद्योग के प्रमुख केंद्रों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और इनोवेशन हब के विस्तार से फार्मेसी से जुड़े युवाओं के लिए नए अवसर विकसित हो रहे हैं।
डॉ. सेठी के अनुसार, फार्माकोविजिलेंस यानी दवाओं की सुरक्षा निगरानी, रेगुलेटरी अफेयर्स और क्लिनिकल डेटा मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित पेशेवरों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में विद्यार्थियों को अपने पाठ्यक्रम के साथ-साथ उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप अतिरिक्त कौशल भी विकसित करने चाहिए।
‘स्वदेशी ज्ञान और नवाचार से मजबूत होगा विकसित भारत’
डॉ. वंदना अरोड़ा सेठी ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए देश के ज्ञान, कौशल और नवाचार को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लॉयड ग्रुप का प्रयास विद्यार्थियों को केवल डिग्रीधारी बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें सक्षम पेशेवर, जिम्मेदार नागरिक और नेतृत्व के लिए तैयार करना भी है। उन्होंने कहा कि ‘ग्लोबल लीडरशिप टॉक’ जैसे मंच विद्यार्थियों को अनुभवी शिक्षाविदों और विशेषज्ञों से सीधे सीखने का अवसर देते हैं। फार्मेसी के युवा स्वदेशी अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण औषधि निर्माण और आत्मनिर्भरता के प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल होने और विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करने के लिए डॉ. पवार के प्रति आभार व्यक्त किया।
विद्यार्थियों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक लिया हिस्सा
कार्यक्रम में संस्थान के संकाय सदस्यों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया। संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों को फार्मेसी शिक्षा के भविष्य, शोध एवं नवाचार की भूमिका और करियर के उभरते अवसरों को समझने का अवसर मिला। लॉयड ग्रुप की इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को विशेषज्ञों के अनुभव से जोड़ना, उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित करना और उन्हें राष्ट्रीय विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम में स्वदेशी ज्ञान, आधुनिक विज्ञान और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।

