लखनऊ/ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय एक बार फिर गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में है। उत्तर प्रदेश लोकायुक्त ने विश्वविद्यालय में कथित भ्रष्टाचार, अनियमित नियुक्तियों, फीस घोटाले और पद के दुरुपयोग के मामलों को गंभीरता से लेते हुए बड़ा कदम उठाया है। लोकायुक्त के आदेश पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राणा प्रताप सिंह, उप कुलसचिव उत्तम कुमार सहित कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ जांच की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है। यह कार्रवाई लखनऊ निवासी शिकायतकर्ता श्रीमती नीता सिंह की शिकायत के आधार पर की गई है।
लोकायुक्त कार्यालय से जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह को निर्देशित किया गया है कि वे लगाए गए सभी आरोपों पर 20 जनवरी 2026 तक अपना लिखित पक्ष लोकायुक्त प्रशासन में प्रस्तुत करें। साथ ही विश्वविद्यालय के कुलसचिव को भी आदेश दिया गया है कि वे मामले से जुड़े सभी अभिलेख, फाइलें और साक्ष्य लेकर 9 जनवरी 2026 को लोकायुक्त कार्यालय में उपस्थित हों और जांच में सहयोग करें।
शिकायत में क्या हैं गंभीर आरोप?
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने कार्यभार संभालने के बाद विश्वविद्यालय में नियमों को ताक पर रखकर मनमानी नियुक्तियां कीं। आरोप है कि ऐसे लोगों को प्रोफेसर और वरिष्ठ पदों पर नियुक्त किया गया, जिनके पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यता या अध्यापन अनुभव तक नहीं था। कुछ मामलों में यह भी कहा गया कि एक दिन का भी पढ़ाने का अनुभव न रखने वाले लोगों को सीधे प्रोफेसर बना दिया गया।
इतना ही नहीं, शिकायत में यह भी उल्लेख है कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों को प्रमोशन नहीं दिया गया, जबकि कथित रूप से अपने करीबी लोगों की नियुक्तियां कर पुराने कर्मचारियों का शोषण किया गया। विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक पद पर वर्तमान छात्र को नियुक्त किए जाने जैसे आरोप भी सामने आए हैं, जो शिक्षा व्यवस्था की गंभीर तस्वीर पेश करते हैं।
फीस घोटाले और कर्मचारियों पर दबाव के आरोप
शिकायत में विश्वविद्यालय में छात्रों की फीस से जुड़े घोटालों का भी जिक्र किया गया है। आरोप है कि फीस वसूली में अनियमितताएं हुईं और इसका लाभ चुनिंदा लोगों को पहुंचाया गया। इसके अलावा वित्त विभाग में कार्यरत कनिष्ठ कर्मचारियों को झूठे मामलों में फंसाकर उनसे अवैध वसूली किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। कहा गया है कि दबाव और धमकी के जरिए कर्मचारियों से धन उगाही की गई।
उप कुलसचिव और अन्य अधिकारी भी घेरे में
लोकायुक्त के आदेश के अनुसार, उप कुलसचिव उत्तम कुमार भी जांच के दायरे में हैं। शिकायत में कहा गया है कि वे विश्वविद्यालय में सामाजिक विज्ञान विषय के शिक्षक हैं, जबकि उन्हें समाजशास्त्र विभाग में नियुक्त किया गया, जबकि विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र विषय ही नहीं पढ़ाया जाता। यह नियुक्ति भी नियमों के विरुद्ध बताई गई है।
लोकायुक्त ने संकेत दिए हैं कि जांच का दायरा केवल इन नामों तक सीमित नहीं रहेगा। विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी लगे आरोपों की पड़ताल की जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर आगे और नाम भी सामने आ सकते हैं।
लोकायुक्त का सख्त रुख, विश्वविद्यालय प्रशासन में हलचल
लोकायुक्त उत्तर प्रदेश द्वारा जारी आदेश के बाद गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया है। विश्वविद्यालय के गलियारों में इस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है। शिक्षा जगत में भी इस मामले को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर उच्च शिक्षा संस्थानों में जवाबदेही और पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जा रही है।
अब सभी की नजरें 9 जनवरी 2026 और 20 जनवरी 2026 की तारीखों पर टिकी हैं, जब लोकायुक्त के समक्ष दस्तावेज और जवाब पेश किए जाएंगे। इस पूरे मामले का असर न केवल विश्वविद्यालय की छवि पर पड़ेगा, बल्कि प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करेगा।

