ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में एलएमसी (लार्सन एंड टुब्रो/एलएमसी) की करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन को लेकर एक बार फिर भू-माफियाओं की सक्रियता सामने आई है। आरोप है कि गांव लखनावली के पास स्थित एलएमसी की बहुमूल्य जमीन पर पहले अवैध कब्जे की तैयारी की गई और जब मामला प्रशासन तक पहुंचा तो शिकायतकर्ता को हिस्सेदारी देकर पूरा प्रकरण दबाने की कोशिश की गई।
जानकारी के मुताबिक, लखनावली गांव के पास स्थित एलएमसी की यह जमीन लंबे समय से खाली पड़ी थी। इसकी कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। इसी खाली जमीन पर भू-माफियाओं की नजर पड़ गई। आरोप है कि गांव के एक पूर्व प्रधान के बेटे द्वारा इस जमीन को लेकर आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से जिला प्रशासन में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में जमीन पर अवैध कब्जे और साजिशन कॉलोनी काटे जाने की आशंका जताई गई थी।
शिकायत के बाद बदला रुख, हिस्सेदारी लेकर हट गया शिकायतकर्ता
सूत्रों के अनुसार, जैसे ही यह मामला प्रशासनिक स्तर पर संज्ञान में आया, भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया। आरोप है कि इसके बाद पूर्व प्रधान के बेटे पर दबाव बनाया गया और अंततः उसे जमीन में हिस्सेदारी दे दी गई। हिस्सेदारी मिलने के बाद शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत से किनारा कर लिया, जिससे पूरा मामला संदिग्ध हो गया।
बताया जाता है कि शिकायत वापस लेने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई की रफ्तार भी धीमी पड़ गई, जिससे यह संदेह और गहरा गया कि भू-माफियाओं ने अपने रसूख और पैसे के दम पर मामले को दबाने का प्रयास किया।
भू-माफिया सिंडिकेट का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि एलएमसी की इस जमीन पर एक भू-माफिया ने बाकायदा सिंडिकेट बनाकर कब्जा करने की योजना तैयार की थी। जमीन पर कॉलोनी काटने की तैयारी शुरू कर दी गई थी। जैसे ही इस गतिविधि की भनक गांव में लगी, मामला सामने आया।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। जिले में कई जगह सरकारी, औद्योगिक और निजी कंपनियों की खाली पड़ी जमीनों को पहले चिन्हित किया जाता है, फिर फर्जी दस्तावेजों या दबाव के जरिए कब्जा करने की कोशिश की जाती है। विरोध होने पर या तो धमकी दी जाती है या फिर हिस्सेदारी देकर मामला शांत करा दिया जाता है।
प्रशासन तक पहुंची रिपोर्ट, जांच के निर्देश
बताया जा रहा है कि इस पूरे प्रकरण की रिपोर्ट अब जिला प्रशासन को सौंप दी गई है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जल्द ही जिला प्रशासन और संबंधित प्राधिकरण की संयुक्त टीम मौके पर पहुंचकर एलएमसी की जमीन की स्थिति की जांच करेगी और यदि अवैध कब्जा पाया गया तो उसे खाली कराने की कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी स्तर पर यह स्पष्ट किया गया है कि भू-माफियाओं को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और सरकारी या औद्योगिक जमीन पर अवैध कब्जे के मामलों में सख्त कार्रवाई होगी।

प्रशासन तक पहुंची रिपोर्ट, जांच के निर्देश
बताया जा रहा है कि इस पूरे प्रकरण की रिपोर्ट अब जिला प्रशासन को सौंप दी गई है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जल्द ही जिला प्रशासन और संबंधित प्राधिकरण की संयुक्त टीम मौके पर पहुंचकर एलएमसी की जमीन की स्थिति की जांच करेगी और यदि अवैध कब्जा पाया गया तो उसे खाली कराने की कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी स्तर पर यह स्पष्ट किया गया है कि भू-माफियाओं को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और सरकारी या औद्योगिक जमीन पर अवैध कब्जे के मामलों में सख्त कार्रवाई होगी।
पूरे जिले में फैला है जमीन हड़पने का खेल
स्थानीय जानकारों का कहना है कि यह मामला केवल एक गांव या एक जमीन तक सीमित नहीं है। पूरे जिले में एलएमसी समेत अन्य बड़ी कंपनियों और प्राधिकरणों की जमीनों पर भू-माफियाओं की गिद्ध दृष्टि बनी हुई है। खासतौर पर वे जमीनें जो लंबे समय से खाली पड़ी हैं, उन्हें पहले चिन्हित किया जाता है, फिर धीरे-धीरे कब्जे की कोशिश होती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार गरीब और कमजोर लोगों को मोहरा बनाकर उनके नाम से फर्जी कब्जा दिखाया जाता है, ताकि बाद में कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।
प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती
यह मामला प्रशासन के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। यदि शिकायत के बाद भी हिस्सेदारी देकर मामले को दबा दिया जाता है, तो इससे भू-माफियाओं के हौसले और बुलंद होते हैं। ऐसे में प्रशासनिक कार्रवाई की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
फिलहाल सभी की नजरें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच और सख्त कदम उठाए जाते हैं, तो यह भू-माफियाओं के खिलाफ एक मजबूत संदेश होगा। वहीं यदि मामला यूं ही दब गया, तो यह संकेत देगा कि जिले में जमीन हड़पने का खेल अब भी बेलगाम है।

