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Tuesday, May 19, 2026
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    अटल इनोवेशन मिशन के निदेशक रामानन रामनाथन ने की गलगोटिया विश्वविद्यालय में उद्यमिता और नवाचार संस्कृति की सराहना, बोले- विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल डिग्री देने तक ही ना रहे सीमित

    Atal Innovation Mission Director Ramanan Ramanathan praised the culture of entrepreneurship and innovation in Galgotias University, said - the role of universities should not be limited only to giving degrees.

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    ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि देश के विश्वविद्यालय कितनी प्रभावी तरीके से ऐसे नवप्रवर्तकों, उद्यमियों, शोधकर्ताओं और समस्या समाधानकर्ताओं को तैयार कर पाते हैं, जो तेजी से बदलती दुनिया के लिए समाधान विकसित कर सकें।

    अटल इनोवेशन मिशन, नीति आयोग, भारत सरकार के प्रथम मिशन निदेशक और इंडिया एआई मिशन, भारत सरकार के मिशन गवर्निंग बोर्ड सदस्य रमनन रामनाथन ने गलगोटिया विश्वविद्यालय में “कैम्पस इनोवेशन से नेशन बिल्डिंग तक: इंडिया@2047 में स्टार्टअप्स और युवा उद्यमियों की भूमिका” विषय पर एक विशेष सत्र को संबोधित किया।

    इस सत्र में विश्वविद्यालयों की उस बढ़ती भूमिका पर चर्चा की गई, जिसके माध्यम से युवाओं में उद्यमशील सोच, स्टार्टअप संस्कृति, नवाचार आधारित शिक्षा, शोध उन्मुख दृष्टिकोण और तकनीक आधारित समस्या समाधान क्षमता विकसित की जा रही है। छात्रों, शिक्षकों, इनोवेटर्स और उभरते उद्यमियों को संबोधित करते हुए श्री रामनाथन ने कहा कि कैम्पस आधारित इनोवेशन इकोसिस्टम किस प्रकार विचारों को ऐसे स्केलेबल उद्यमों में बदल सकता है, जो रोजगार सृजन, आर्थिक विकास और राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकें।

    गलगोटिया विश्वविद्यालय में विकसित हो रही स्टार्टअप और इनोवेशन संस्कृति की सराहना करते हुए श्री रामनाथन ने ऐसे वातावरण की आवश्यकता पर बल दिया, जहां छात्रों को शुरुआती स्तर से ही प्रयोग करने, सहयोग करने, निर्माण करने और वास्तविक जीवन की चुनौतियों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जैसे-जैसे भारत का भविष्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीप टेक्नोलॉजी, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और उद्यमिता से अधिक प्रभावित होगा, वैसे-वैसे जिज्ञासा, धैर्य, बहुविषयक सोच और तकनीक आधारित समस्या समाधान की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होती जाएगी।

    इस संवाद ने छात्रों को पारंपरिक करियर विकल्पों से आगे बढ़कर नवाचार, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, स्टार्टअप इकोसिस्टम और उभरती तकनीकों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। सत्र के दौरान इस बात पर भी चर्चा हुई कि युवा उद्यमिता और कैम्पस आधारित नवाचार किस प्रकार भारत के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों और विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने में सार्थक योगदान दे सकते हैं।

    डॉ. ध्रुव गलगोटिया, सीईओ, गलगोटिया विश्वविद्यालय ने कहा, “आज विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि उन्हें युवाओं को क्रिएटर्स, इनोवेटर्स और समस्या समाधानकर्ता बनने के लिए तैयार करना होगा। हम छात्रों को सफल करियर बनाने में सहयोग देने के साथ-साथ उन्हें जॉब क्रिएटर्स, उद्यमी और नए विचारों के निर्माणकर्ता बनने के लिए भी सक्षम बनाना चाहते हैं। पिछले कुछ वर्षों में हमने ऐसा इकोसिस्टम विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया है, जो छात्रों को उभरती तकनीकों, एडवांस्ड लैब्स, मेंटरशिप, इंडस्ट्री एक्सपोजर, स्टार्टअप सपोर्ट और फंडिंग अवसरों तक पहुंच प्रदान करे। आज जो नवाचार और ऊर्जा दिखाई दे रही है, उसका बड़ा हिस्सा स्वयं छात्रों द्वारा संचालित है।”

    ऐसे आयोजनों के माध्यम से गलगोटिया विश्वविद्यालय अपने इनोवेशन और उद्यमिता इकोसिस्टम को और मजबूत कर रही है। विश्वविद्यालय इनक्यूबेशन सपोर्ट, मेंटरशिप, इंडस्ट्री सहयोग, स्टार्टअप सहभागिता, शोध पहलों और छात्र-नेतृत्व वाले इनोवेशन प्लेटफॉर्म्स के जरिए छात्रों को उत्पाद, स्टार्टअप और तकनीक आधारित समाधान विकसित करने के अवसर लगातार उपलब्ध करा रही है, जो सामाजिक और आर्थिक स्तर पर सार्थक प्रभाव उत्पन्न कर सकें।

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