ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (GIMS), ग्रेटर नोएडा के बाल रोग विभाग द्वारा ओआरएस सप्ताह 2026 के अवसर पर जागरूकता एवं स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की गई। इस अभियान का उद्देश्य पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में दस्त (डायरिया) के कारण होने वाली मृत्यु और गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं को रोकने के लिए अभिभावकों एवं समुदाय को जागरूक करना था। इस वर्ष की थीम “ओआरएस और जिंक: हर बच्चा, डायरिया का हर एपिसोड” रही। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि दस्त होने पर समय पर ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) और जिंक का उपयोग बच्चों को निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) से बचाने और गंभीर जटिलताओं को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।
माता-पिता और देखभाल करने वालों को दी गई महत्वपूर्ण जानकारी
ओआरएस सप्ताह के दौरान संस्थान में अभिभावकों और देखभाल करने वालों के लिए विशेष स्वास्थ्य शिक्षा सत्र आयोजित किए गए। विशेषज्ञों ने दस्त के दौरान बच्चों की सही देखभाल, ओआरएस घोल तैयार करने की सही विधि तथा उसे सही तरीके से पिलाने का लाइव प्रदर्शन किया। इसके साथ ही माताओं को दस्त के दौरान भी स्तनपान जारी रखने, बच्चों को पौष्टिक आहार देने तथा पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ उपलब्ध कराने की सलाह दी गई। कार्यक्रम में ओआरएस और जिंक के सह-पैक भी वितरित किए गए, ताकि जरूरत पड़ने पर परिवार तुरंत उनका उपयोग कर सकें।
स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल पर दिया गया विशेष जोर
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि अधिकांश दस्त के मामले दूषित पानी, अस्वच्छ भोजन और खराब स्वच्छता के कारण होते हैं। इसलिए हाथों की नियमित सफाई, सुरक्षित पेयजल का उपयोग, स्वच्छ शौचालय और व्यक्तिगत स्वच्छता अपनाना बेहद आवश्यक है। स्वास्थ्य कर्मियों के लिए भी प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए, जिनमें दस्त के लक्षणों की शीघ्र पहचान, सही उपचार और समय पर रेफरल की जानकारी दी गई।
एनएफएचएस-6 के आंकड़ों का भी किया उल्लेख
कार्यक्रम में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6, 2023-24) के हालिया निष्कर्षों पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि देश में रोटावायरस टीकाकरण का दायरा बढ़ा है तथा बच्चों के पूर्ण टीकाकरण की दर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इससे बचपन में होने वाले डायरिया के मामलों और उससे होने वाली जटिलताओं में कमी आने की उम्मीद है।
डॉ. ब्रिगेडियर राकेश गुप्ता की अपील
जीआईएमएस के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर राकेश गुप्ता ने कहा कि ओआरएस और जिंक आज भी दस्त के उपचार की सबसे प्रभावी और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित पद्धति हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों को दस्त होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के अनावश्यक दवाइयों का प्रयोग न करें और यदि बच्चे में अत्यधिक कमजोरी, लगातार उल्टी, तेज बुखार, खून की दस्त या गंभीर निर्जलीकरण जैसे खतरे के संकेत दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
उन्होंने कहा कि समय पर सही उपचार और जागरूकता के माध्यम से दस्त के कारण होने वाली अधिकांश बाल मृत्यु को रोका जा सकता है।
शून्य रोकथाम योग्य बाल मृत्यु का लक्ष्य
बाल रोग विभाग ने इस अवसर पर दस्त के कारण होने वाली रोकथाम योग्य बाल मृत्यु को शून्य करने के राष्ट्रीय लक्ष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। विभाग ने कहा कि साक्ष्य-आधारित चिकित्सा, सामुदायिक जागरूकता और समय पर उपचार के माध्यम से बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है। जीआईएमएस द्वारा आयोजित यह अभियान अभिभावकों को जागरूक करने और बच्चों को डायरिया जैसी सामान्य लेकिन गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

