शारदा स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च में 18वां ओरिएंटेशन एवं व्हाइट कोट समारोह आयोजित; चिकित्सा सेवा में करुणा, नैतिकता और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता का दिया संदेश
ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। शारदा यूनिवर्सिटी के शारदा स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (SSMSR) में MBBS बैच 2026 के नवागत विद्यार्थियों के स्वागत के लिए 18वें ओरिएंटेशन कार्यक्रम एवं व्हाइट कोट समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में नए विद्यार्थियों ने व्हाइट कोट धारण कर चिकित्सा शिक्षा के नए सफर की शुरुआत की। इस अवसर पर चिकित्सा पेशे की गरिमा, नैतिक मूल्यों, करुणा और मरीजों के प्रति जिम्मेदारी को प्रमुखता से रेखांकित किया गया। कार्यक्रम का समापन शपथ ग्रहण के साथ हुआ, जिसमें विद्यार्थियों ने चिकित्सा सेवा के प्रति समर्पण और निरंतर सीखने का संकल्प लिया।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज एवं उससे संबद्ध अस्पताल, नई दिल्ली की निदेशक डॉ. हिमानी अहलूवालिया शामिल हुईं। विशिष्ट अतिथियों में फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया, भारत सरकार के सीईओ डॉ. शांतनु अग्रहरी (IAS) तथा वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली के कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग के निदेशक-प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अनुभव गुप्ता मौजूद रहे।
व्हाइट कोट केवल पोशाक नहीं, जिम्मेदारी का प्रतीक
मुख्य अतिथि डॉ. हिमानी अहलूवालिया ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि व्हाइट कोट केवल एक पोशाक नहीं, बल्कि पवित्रता, जिम्मेदारी और मरीजों की देखभाल के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान में दक्षता हासिल करने के साथ करुणा, नैतिकता और मानवता की सेवा के मूल्यों को अपनाना भी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से चिकित्सा शिक्षा के दौरान इन मूल्यों को अपने व्यवहार का हिस्सा बनाने और मरीजों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने का आह्वान किया।

ज्ञान के साथ संवेदनशीलता भी जरूरी: पी.के. गुप्ता
शारदा विश्वविद्यालय के चांसलर पी.के. गुप्ता ने कहा कि 18वां ओरिएंटेशन कार्यक्रम एवं व्हाइट कोट समारोह विद्यार्थियों के लिए समर्पण, करुणा और जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण अवसर है। पहली बार व्हाइट कोट धारण करने वाले विद्यार्थियों को यह समझना चाहिए कि चिकित्सा के क्षेत्र में केवल अकादमिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है। ईमानदारी, संवेदनशीलता और मानवता की सेवा के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शारदा विश्वविद्यालय ऐसे कुशल चिकित्सा पेशेवरों और संवेदनशील नेतृत्वकर्ताओं को तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में सकारात्मक योगदान दे सकें। उन्होंने शिक्षा संस्थानों को राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण नींव भी बताया।
चिकित्सा शिक्षा के नए सफर से परिचित हुए विद्यार्थी
कार्यक्रम के दौरान नवागत विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के परिसर, उपलब्ध सुविधाओं, संकाय सदस्यों और शिक्षण प्रक्रिया की जानकारी दी गई। उन्हें चिकित्सा पेशे की चुनौतियों, जिम्मेदारियों और नैतिक मूल्यों से भी परिचित कराया गया। संस्थान में शैक्षणिक अध्ययन, क्लिनिकल अनुभव और मूल्य आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए तैयार करने पर जोर दिया गया। संस्थान के अनुसार, शारदा स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च चिकित्सा शिक्षा, अस्पताल सुविधाओं और चिकित्सा संस्थानों के साथ सहयोग को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।
विश्वविद्यालय के वरिष्ठ पदाधिकारी और संकाय सदस्य रहे मौजूद
समारोह में विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर वाई.के. गुप्ता, कुलपति डॉ. सिबाराम खारा, एडमिशन डायरेक्टर डॉ. राजीव गुप्ता, डॉ. निरुपमा गुप्ता, डीन एवं प्रोफेसर डॉ. राम मूर्ति शर्मा, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, सुश्री सुप्रिया गुप्ता, डॉ. अंकिता कक्कड़, डॉ. अदिति, डॉ. किरणमयी, डॉ. अमित पवइया, एसोसिएट डीन, डॉ. प्रियंका शर्मा और डॉ. स्वप्निल चौधरी सहित अन्य संकाय सदस्य एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। व्हाइट कोट समारोह ने नए MBBS विद्यार्थियों के लिए चिकित्सा शिक्षा के औपचारिक सफर की शुरुआत को यादगार बनाया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि एक अच्छे डॉक्टर की पहचान केवल उसके ज्ञान और कौशल से नहीं, बल्कि मरीजों के प्रति संवेदनशीलता, नैतिक आचरण और सेवा भावना से भी होती है।

