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Friday, June 19, 2026
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    सिकल सेल रोग: समय पर पहचान और उपचार से बचाई जा सकती हैं जिंदगियां

    Sickle cell disease: Lives can be saved by timely detection and treatment

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    ग्रेटर नोएडा वेस्ट, द न्यूज क्लिक। सिकल सेल रोग (एससीडी) एक गंभीर आनुवंशिक रक्त विकार है, जो लाल रक्त कोशिकाओं के आकार और कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है। समय पर पहचान और उचित उपचार के माध्यम से इस बीमारी से होने वाली जटिलताओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है और मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है।

    यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा एक्सटेंशन के सीनियर कंसलटेंट एवं रीजनल डायरेक्टर डॉ. तरुण वर्मा ने बताया कि सिकल सेल रोग हीमोग्लोबिनोपैथी नामक विकारों के समूह का हिस्सा है। इस बीमारी में लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य गोल आकार के बजाय दरांती (सिकल) के आकार की हो जाती हैं, जिससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और एनीमिया, दर्द के गंभीर दौरे तथा शरीर के विभिन्न अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।

    उन्होंने बताया कि बिना किसी स्पष्ट कारण के एनीमिया, पीलिया, हाथ-पैरों में सूजन, बार-बार संक्रमण, अत्यधिक थकान, शारीरिक विकास में बाधा तथा दर्द के दौरे जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। विशेष रूप से नवजात शिशुओं और बच्चों में समय पर जांच और उपचार से गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।

    डॉ. वर्मा के अनुसार, यदि इस बीमारी का उपचार समय पर नहीं किया जाए तो मरीज को गंभीर एनीमिया, संक्रमण, स्ट्रोक, अंगों को नुकसान, विकास में रुकावट और जीवन की गुणवत्ता में गिरावट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

    उन्होंने नवजात स्क्रीनिंग और जेनेटिक काउंसलिंग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान होने से समय पर उपचार शुरू किया जा सकता है, जबकि जेनेटिक काउंसलिंग परिवारों को बीमारी के वंशानुगत स्वरूप को समझने और भविष्य की योजना बनाने में मदद करती है।

    सिकल सेल रोग के उपचार में हाइड्रॉक्सीयूरिया जैसी दवाएं, टीकाकरण, संक्रमण की रोकथाम, ब्लड ट्रांसफ्यूजन तथा सहायक चिकित्सा शामिल हैं। वहीं, आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों जैसे टार्गेटेड थेरेपी और स्टेम सेल प्रत्यारोपण ने चयनित मरीजों के लिए बेहतर उपचार की नई संभावनाएं खोली हैं।

    डॉ. तरुण वर्मा ने सलाह दी कि सिकल सेल रोग से पीड़ित मरीज पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, अत्यधिक गर्मी या ठंड से बचें, संक्रमण होने पर तुरंत उपचार लें, नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहें और अत्यधिक शारीरिक श्रम से परहेज करें, क्योंकि ये स्थितियां सिकल सेल क्राइसिस को बढ़ावा दे सकती हैं।

    उन्होंने कहा कि जागरूकता, समय पर जांच और उचित उपचार के माध्यम से सिकल सेल रोग से प्रभावित लोगों को बेहतर और स्वस्थ जीवन प्रदान किया जा सकता है।

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