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Thursday, July 9, 2026
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    Jewar News : जेवर के किसानों का ऐलान, एक बीघा जमीन के चाहिए ₹1 करोड़, ग्रीनलिंक एक्सप्रेसवे के लिए बिना उचित मुआवजे नहीं देंगे भूमि

    JEWAR FARMERS ANNOUNCE, WANT A BIGHA LAND FOR ₹1 CRORE, WILL NOT GIVE LAND WITHOUT PROPER COMPENSATION FOR GREENLINK EXPRESSWAY

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    जेवर, द न्यूज क्लिक। जेवर ग्रीनलिंक एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर औरंगाबाद क्षेत्र के किसानों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। किसानों ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि सरकार उनकी जमीन का अधिग्रहण करना चाहती है तो पहले उन्हें प्रति बीघा ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए। किसानों का कहना है कि उचित मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पूरी किए बिना वे किसी भी स्थिति में अपनी जमीन नहीं देंगे। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि सरकार उनकी मांग स्वीकार नहीं करती तो भूमि अधिग्रहण कानून के तहत पूरी प्रक्रिया अपनाई जाए।

    ग्रीनलिंक एक्सप्रेसवे के साथ विकसित होगा बड़ा कॉरिडोर

    किसानों का कहना है कि प्रस्तावित ग्रीनलिंक एक्सप्रेसवे के दोनों ओर बड़े स्तर पर औद्योगिक एवं व्यावसायिक कॉरिडोर विकसित करने की योजना है। इसके चलते कई गांवों की उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहण की जद में आ रही है। किसानों का आरोप है कि भविष्य में इस भूमि का व्यावसायिक मूल्य कई गुना बढ़ जाएगा, इसलिए उन्हें भी उसी अनुरूप उचित मुआवजा मिलना चाहिए।

    चकबंदी में गई जमीन का भी मिले उचित मुआवजा

    आंदोलनकारी किसानों ने मांग उठाई कि जिन किसानों की पहले चकबंदी के दौरान भूमि प्रभावित हुई थी, उनकी उस भूमि का भी समुचित मुआवजा वर्तमान अधिग्रहण में जोड़ा जाए। किसानों का कहना है कि वर्षों से उनकी भूमि विभिन्न परियोजनाओं में जाती रही है, लेकिन उन्हें उसका न्यायसंगत लाभ नहीं मिला।

    सर्विस रोड और बेहतर कनेक्टिविटी की मांग

    किसानों ने कहा कि एक्सप्रेसवे बनने के बाद गांवों और खेतों तक पहुंच आसान बनाने के लिए सर्विस रोड, अंडरपास और अन्य कनेक्टिविटी सुविधाएं विकसित की जाएं। उनका कहना है कि यदि यह व्यवस्था नहीं होगी तो किसानों को अपनी कृषि भूमि तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। साथ ही भविष्य में स्थानीय लोग उद्योग, वेयरहाउस, होटल और अन्य व्यवसाय भी विकसित कर सकें, इसके लिए बेहतर संपर्क मार्ग जरूरी हैं।

    प्रभावित गांवों को मिले टोल टैक्स से छूट

    किसानों ने एक और महत्वपूर्ण मांग रखते हुए कहा कि जिन गांवों की जमीन एक्सप्रेसवे निर्माण में ली जा रही है, उन गांवों के सभी निवासियों को टोल शुल्क से पूर्ण छूट दी जाए। उनका कहना है कि किसी भी बड़ी परियोजना का प्रभाव केवल जमीन मालिकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे गांव की सामाजिक और आर्थिक संरचना प्रभावित होती है। इसलिए प्रभावित गांवों के लोगों को विशेष राहत मिलनी चाहिए।

    प्रशासन पर बनाया जा रहा दबाव का आरोप

    आंदोलन में शामिल किसानों ने आरोप लगाया कि विभिन्न माध्यमों से किसानों पर जमीन बेचने और अधिग्रहण के लिए सहमत होने का दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत हुई है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। हालांकि, इन आरोपों पर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

    मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन

    किसानों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी सभी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने दोहराया कि उचित मुआवजा, कानूनी प्रक्रिया, सर्विस रोड, टोल में छूट और प्रभावित किसानों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना वे अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं होंगे।

    फिलहाल जेवर ग्रीनलिंक एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच सहमति नहीं बन सकी है। आने वाले दिनों में वार्ता और प्रशासन के रुख पर इस आंदोलन की दिशा निर्भर करेगी।

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