ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (GBU) ने भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत को संरक्षित, संवर्धित और वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विश्वविद्यालय परिसर में “बौद्ध धर्म के प्रसार पर आधारित प्रदर्शनी” के निर्माण हेतु विधिवत आधारशिला रखी गई। यह महत्वाकांक्षी परियोजना भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA), नई दिल्ली के सहयोग से विकसित की जा रही है।
यह प्रदर्शनी केवल एक संग्रहालय या प्रदर्शन स्थल नहीं होगी, बल्कि बौद्ध दर्शन, इतिहास, संस्कृति और वैश्विक प्रभाव को आधुनिक तकनीक एवं शैक्षणिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने वाला एक महत्वपूर्ण ज्ञान केंद्र बनेगी। इससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों, देश-विदेश के पर्यटकों और बौद्ध अध्ययन में रुचि रखने वाले लोगों को व्यापक जानकारी प्राप्त होगी।
कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने किया आधारशिला का अनावरण
प्रदर्शनी की आधारशिला का अनावरण गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत बौद्ध दर्शन और संस्कृति की जन्मभूमि है तथा इस महान विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक वैज्ञानिक एवं आधुनिक तरीके से पहुँचाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित प्रदर्शनी के माध्यम से भगवान बुद्ध के जीवन, उनके उपदेशों, बौद्ध धर्म के विकास, भारत से एशिया और विश्व के विभिन्न देशों तक उसके विस्तार तथा मानव सभ्यता पर उसके प्रभाव को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा।
कुलपति ने विश्वास व्यक्त किया कि यह प्रदर्शनी विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक संसाधन सिद्ध होगी तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी उल्लेखनीय योगदान देगी।

बौद्ध धर्म की वैश्विक यात्रा को मिलेगा आधुनिक स्वरूप
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार प्रदर्शनी में बौद्ध धर्म के ऐतिहासिक विकास, विभिन्न देशों में उसके प्रसार, बौद्ध कला, स्थापत्य, साहित्य, दर्शन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को आधुनिक दृश्य-श्रव्य तकनीकों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें चयनित ऐतिहासिक दस्तावेज, प्रतिकृतियाँ, डिजिटल डिस्प्ले, इंटरैक्टिव माध्यम, शोध सामग्री और दुर्लभ जानकारियों को शामिल किया जाएगा ताकि दर्शकों को बौद्ध विरासत की व्यापक समझ प्राप्त हो सके।
आध्यात्मिक वातावरण में हुआ समारोह
आधारशिला समारोह को विशेष आध्यात्मिक गरिमा उस समय मिली जब स्कूल ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज़ एंड सिविलाइजेशन के भिक्षुओं एवं विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से बुद्ध वंदना का पाठ किया। बौद्ध मंत्रों के शांतिपूर्ण उच्चारण से पूरा परिसर श्रद्धा, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। उपस्थित अतिथियों ने इस वातावरण को अत्यंत प्रेरणादायक बताया।
वरिष्ठ अधिकारी एवं शिक्षाविद रहे उपस्थित
समारोह में विश्वविद्यालय के अनेक वरिष्ठ अधिकारी एवं शिक्षाविद उपस्थित रहे। इनमें डीन अकादमिक प्रो. राजीव वार्ष्णेय, रजिस्ट्रार प्रो. चंदर कुमार सिंह, निदेशक (निर्माण) एस. के. मिश्रा, स्कूल ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज़ एंड सिविलाइजेशन के अध्यक्ष एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों के निदेशक डॉ. चिंतला वेंकट शिवासाई, अतिरिक्त निदेशक डॉ. अंसारी, सहायक अभियंता डॉ. शोभा राम, निर्माण निदेशालय के अधिकारी, विभिन्न संकाय सदस्य, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध को मिलेगा बढ़ावा
विश्वविद्यालय का मानना है कि यह प्रदर्शनी भविष्य में बौद्ध अध्ययन, शोध, सांस्कृतिक संवाद और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग का प्रमुख केंद्र बनेगी। इसके माध्यम से देश-विदेश के शोधार्थियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों को बौद्ध धर्म के विभिन्न आयामों पर अध्ययन और अनुसंधान के नए अवसर प्राप्त होंगे।
भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र और गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय की यह संयुक्त पहल भारत की प्राचीन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक धरोहर को आधुनिक स्वरूप में संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि प्रदर्शनी का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा कर इसे अध्ययन, अनुसंधान, सांस्कृतिक संवाद और बौद्ध दर्शन के वैश्विक प्रसार का विशिष्ट केंद्र बनाया जाएगा।
इस परियोजना से न केवल गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी, बल्कि ग्रेटर नोएडा भी बौद्ध अध्ययन एवं सांस्कृतिक पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में नई पहचान प्राप्त करेगा।

