नई दिल्ली/ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS), ग्रेटर नोएडा ने राष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण परामर्श कार्यक्रम में अपनी प्रभावी भागीदारी दर्ज कराई। 16 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के होटल इरोस, नेहरू प्लेस में आयोजित ‘हेल्थकेयर, एजुकेशन एंड रिसर्च के लिए एआई रेडीनेस पर राष्ट्रीय परामर्श एवं एआई लिटरेसी बूटकैंप’ में जीआईएमएस के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभावी उपयोग, संस्थागत डिजिटल बुनियादी ढांचे, एआई साक्षरता, शासन व्यवस्था, नवाचार और भविष्य की चिकित्सा शिक्षा की आवश्यकताओं पर व्यापक मंथन करना था। कार्यक्रम में देशभर से स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ, शिक्षाविद, विश्वविद्यालयों के कुलपति तथा वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी शामिल हुए।
राष्ट्रीय स्तर पर एआई की भूमिका पर हुआ मंथन
इस राष्ट्रीय परामर्श का आयोजन मेडिकल डायलॉग्स, नेशनल मेडिकल फोरम, नेशनल मेडिकल एआई मिशन (NMAIM) और एसोसिएशन ऑफ इंडियन हेल्थ साइंसेज यूनिवर्सिटीज की संयुक्त पहल के रूप में किया गया। कार्यक्रम को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) का भी समर्थन प्राप्त था। कार्यक्रम का नेतृत्व मेडिकल डायलॉग्स के अध्यक्ष एवं नेशनल मेडिकल एआई मिशन के अध्यक्ष डॉ. प्रेम अग्रवाल तथा मेडिकल डायलॉग्स के मुख्य संपादक (मेडिकल न्यूज) डॉ. के.के. कोहली ने किया।
राष्ट्रीय परामर्श में इस बात पर विशेष चर्चा हुई कि तेजी से विकसित हो रही एआई तकनीक को चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था में किस तरह जिम्मेदारी, पारदर्शिता और प्रभावशीलता के साथ लागू किया जाए। विशेषज्ञों ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा प्रबंधन, एआई साक्षरता, नैतिकता, साइबर सुरक्षा और संस्थागत स्तर पर एआई अपनाने की तैयारियों को महत्वपूर्ण बताया।
देश के कई प्रमुख विशेषज्ञ हुए शामिल
कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख व्यक्तित्वों की उपस्थिति रही। इनमें भारत सरकार के केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ. राज भूषण चौधरी, नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के अध्यक्ष डॉ. अभिजीत चंद्रकांत सेठ, एनएमसी द्वारा गठित राष्ट्रीय विशेषज्ञ पैनल के अध्यक्ष एवं अकादमिक कार्यक्रमों के राष्ट्रीय प्रमुख डॉ. वेदप्रकाश मिश्रा, यूनेस्को चेयर इन बायोएथिक्स (हाइफा) तथा केवीवी, कराड के चांसलर एवं मुख्य सलाहकार, आईसीएमआर की अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. संघमित्रा पाटी और राष्ट्रीय दंत आयोग के अध्यक्ष डॉ. संजय तिवारी सहित अनेक गणमान्य विशेषज्ञ शामिल रहे। इस दौरान चिकित्सा क्षेत्र में एआई के उपयोग से जुड़े अवसरों के साथ-साथ इसके सामने आने वाली चुनौतियों पर भी विचार किया गया।
पैनल चर्चा में जीआईएमएस निदेशक डॉ. राकेश कुमार गुप्ता की भागीदारी
जीआईएमएस की ओर से संस्थान के निदेशक डॉ. (ब्रिगेडियर) राकेश कुमार गुप्ता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने ‘चिकित्सा शिक्षा के लिए संस्थागत डिजिटल बुनियादी ढांचा और डिजिटल लर्निंग एनवायरमेंट’ विषय पर आयोजित पैनल-1 में प्रतिष्ठित पैनलिस्ट के रूप में भाग लिया। अपने संबोधन में डॉ. गुप्ता ने चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा वितरण और अनुसंधान के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभावी एवं निर्बाध एकीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एआई को संस्थागत स्तर पर अपनाने के लिए केवल तकनीक उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचा, प्रशिक्षित मानव संसाधन, प्रभावी शासन प्रणाली और स्पष्ट नीतियों की भी आवश्यकता है।
उन्होंने चिकित्सा संस्थानों में डिजिटल लर्निंग वातावरण विकसित करने और शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को नई तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षित करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। उनके विचारों ने चिकित्सा शिक्षा में तकनीक और पारंपरिक अकादमिक व्यवस्था के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत को सामने रखा।
डॉ. प्रेरणा अग्रवाल को मिला प्रतिष्ठित पुरस्कार
राष्ट्रीय परामर्श कार्यक्रम के दौरान जीआईएमएस के लिए एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि सामने आई। संस्थान के फिजियोलॉजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रेरणा अग्रवाल को प्रतिष्ठित ‘पीकॉक मेडिकल एजुकेशन एक्सीलेंस अवार्ड 2026’ से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार मेडिकल डायलॉग्स और नेशनल मेडिकल एआई मिशन (NMAIM) की ओर से प्रदान किया गया। डॉ. प्रेरणा अग्रवाल को यह सम्मान चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया।
उनके योगदान में Competency-Based Medical Education (CBME), फैकल्टी प्रशिक्षण, फिजियोलॉजी शिक्षा से संबंधित शैक्षणिक संसाधनों का विकास, प्रकाशित शैक्षिक शोध तथा अकादमिक नवाचारों से संबंधित पंजीकृत कॉपीराइट शामिल हैं। एक विशेषज्ञ जूरी द्वारा मूल्यांकन के बाद प्रदान किया गया यह सम्मान चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में डॉ. प्रेरणा अग्रवाल के अकादमिक और नवाचार संबंधी कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान के रूप में देखा जा रहा है।
जीआईएमएस में मेडिकल इनोवेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर जोर
राष्ट्रीय कार्यक्रम में जीआईएमएस के प्रतिनिधिमंडल में पैथोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. विवेक गुप्ता और जीआईएमएस सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन के सीईओ राहुल सिंह भी शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी से यह भी स्पष्ट हुआ कि जीआईएमएस चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के साथ-साथ मेडिकल इनोवेशन, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और उभरती तकनीकों को संस्थागत विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में एआई का प्रभाव मेडिकल डायग्नोसिस, मेडिकल इमेजिंग, रिसर्च, पेशेंट मैनेजमेंट, अस्पताल प्रशासन, मेडिकल एजुकेशन और क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट जैसे क्षेत्रों में और बढ़ सकता है। ऐसे में चिकित्सा संस्थानों के लिए एआई आधारित तकनीकों को समझना और उनके सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग के लिए तैयारी करना आवश्यक होगा।
युवाओं और चिकित्सा शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण पहल
राष्ट्रीय एआई परामर्श में इस बात पर भी जोर दिया गया कि चिकित्सा विद्यार्थियों और युवा चिकित्सकों को भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जाए। एआई के बढ़ते उपयोग के बीच मेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए तकनीकी समझ के साथ-साथ डेटा गोपनीयता, नैतिकता और मानव-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा के सिद्धांतों को समझना भी महत्वपूर्ण होगा। जीआईएमएस की भागीदारी इस दिशा में संस्थान की बढ़ती सक्रियता को दर्शाती है। एक ओर जहां संस्थान के निदेशक ने राष्ट्रीय मंच पर चिकित्सा शिक्षा के डिजिटल बुनियादी ढांचे और एआई इंटीग्रेशन की जरूरतों पर अपने विचार रखे, वहीं दूसरी ओर संस्थान की फैकल्टी सदस्य को चिकित्सा शिक्षा में उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर का सम्मान मिला।
जीआईएमएस के लिए दोहरी उपलब्धि
कुल मिलाकर 16 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित यह राष्ट्रीय कार्यक्रम जीआईएमएस ग्रेटर नोएडा के लिए दोहरी उपलब्धि लेकर आया। संस्थान के निदेशक डॉ. राकेश कुमार गुप्ता ने राष्ट्रीय मंच पर चिकित्सा शिक्षा में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई की भूमिका पर विचार रखे, जबकि डॉ. प्रेरणा अग्रवाल को चिकित्सा शिक्षा में उनके योगदान के लिए प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
जीआईएमएस की यह भागीदारी इस बात का संकेत है कि संस्थान चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा के पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल लर्निंग, मेडिकल इनोवेशन और तकनीकी परिवर्तन को भी भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा मानकर आगे बढ़ रहा है।

