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Sunday, August 23, 2026
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    Breaking News : ग्रैंडथुम में मेंटेनेंस वसूली को लेकर प्रॉपर्टी ओनर्स का विरोध, Full OC तक शुल्क रोकने की मांग; Partial OC की जांच और बिल्डर पर कार्रवाई की मांग, बिल्डर पर अत्यधिक मेंटेनेंस वसूली का आरोप, सितंबर 2025 के Partial OC की जांच की मांग, प्राधिकरण की कार्रवाई पर भी सवाल

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ी संख्या में ग्रैंडथुम के प्रॉपर्टी ओनर्स मौजूद रहे। इनमें सुमित सोम (B-448), गौरव गर्ग (B-815), सार्थक अरोड़ा (A-817/818), आशीष गुप्ता (A-1510), अभिषेक शाह (A-1125), राजत गुप्ता (B-412), अशोक कुमार ओझा (B-912), शिल्पा निमोरे (A-1412), हिमांशु सोलंकी (B-2119), रोहित शर्मा (B-936), डॉ. वीरेंद्र प्रकाश, आर.के. पटेल (A-322), बंटी पोखरियाल, अरुण त्यागी, रविंद्र यादव (A-901B), अनुराग शर्मा (A-913), विभव सिंह और सत्यदेव कुमार सहित अन्य मालिक शामिल रहे।

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    ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के टेकजोन-4 स्थित ग्रैंडथुम कमर्शियल प्रोजेक्ट में मेंटेनेंस शुल्क की वसूली को लेकर प्रॉपर्टी ओनर्स और बिल्डर के बीच विवाद गहराता जा रहा है। ग्रैंडथुम ओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने बिल्डर पर कथित रूप से अत्यधिक मेंटेनेंस शुल्क वसूलने, तीन महीने का एडवांस मेंटेनेंस मांगने, होल्डिंग चार्ज लगाए जाने और परियोजना की सुविधाएं पूरी नहीं होने के बावजूद प्रॉपर्टी मालिकों पर पजेशन लेने तथा भुगतान करने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है।

    एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि वह वास्तविक और वैध सेवाओं के लिए उचित मेंटेनेंस देने के सिद्धांत के खिलाफ नहीं है, लेकिन परियोजना की सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध कराए बिना मनमाने या अत्यधिक शुल्क की वसूली स्वीकार नहीं की जाएगी। एसोसिएशन की प्रमुख मांग है कि A और B दोनों टावरों का Full Occupancy Certificate (OC) मिलने और एग्रीमेंट में किए गए वादों के अनुरूप आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होने तक नियमित मेंटेनेंस वसूली पर रोक लगाई जाए। इन मांगों को लेकर एसोसिएशन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखा और कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो प्रॉपर्टी ओनर्स लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन और व्यापक आंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे।

    बिल्डर पर अत्यधिक मेंटेनेंस वसूली का आरोप

    ग्रैंडथुम ओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के मुताबिक, प्रॉपर्टी मालिकों से मेंटेनेंस के नाम पर अपेक्षाकृत अधिक राशि की मांग की जा रही है। इसके अलावा तीन महीने का एडवांस मेंटेनेंस जमा कराने और अन्य शुल्कों को लेकर भी मालिकों में नाराजगी है। एसोसिएशन का कहना है कि जब तक परियोजना में एग्रीमेंट के अनुसार सभी सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं, तब तक इतनी अधिक दर पर मेंटेनेंस वसूलना उचित नहीं है। प्रॉपर्टी मालिकों का तर्क है कि मेंटेनेंस शुल्क वास्तविक रूप से उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं और सुविधाओं के अनुरूप होना चाहिए।

    एसोसिएशन ने कहा कि प्रॉपर्टी मालिक सेवाओं के बदले वैध शुल्क का भुगतान करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें ऐसी सेवाओं के नाम पर आर्थिक बोझ नहीं दिया जाना चाहिए जो अभी पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं।

    तीन महीने के एडवांस मेंटेनेंस पर भी आपत्ति

    प्रॉपर्टी ओनर्स ने तीन माह का एडवांस मेंटेनेंस लिए जाने पर भी सवाल उठाया है। एसोसिएशन का कहना है कि एक तरफ परियोजना की वैधानिक और सुविधाओं से जुड़ी स्थिति को लेकर सवाल हैं, वहीं दूसरी ओर मालिकों से अग्रिम मेंटेनेंस की मांग की जा रही है। निवासियों और प्रॉपर्टी मालिकों का कहना है कि पहले परियोजना में उपलब्ध सुविधाओं, सेवाओं और मेंटेनेंस की वास्तविक लागत को स्पष्ट किया जाना चाहिए। इसके बाद ही पारदर्शी तरीके से शुल्क निर्धारित किया जाए।

    एसोसिएशन ने मांग की है कि मेंटेनेंस चार्ज का पूरा ब्रेकअप प्रॉपर्टी मालिकों के सामने रखा जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि उनसे वसूली जाने वाली राशि किन-किन सेवाओं पर खर्च की जाएगी।

    Full OC मिलने तक मेंटेनेंस रोकने की मांग

    एसोसिएशन की सबसे प्रमुख मांग A और B दोनों टावरों का Full Occupancy Certificate मिलने तक नियमित मेंटेनेंस वसूली पर रोक लगाने की है। एसोसिएशन का कहना है कि Full OC परियोजना की वैधानिक स्थिति से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज है। जब तक दोनों टावरों के संबंध में पूर्ण वैधानिक स्थिति स्पष्ट नहीं होती और एग्रीमेंट के अनुसार आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं, तब तक प्रॉपर्टी मालिकों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए।

    एसोसिएशन ने कहा कि प्रॉपर्टी खरीदते समय मालिकों को जिन सुविधाओं और व्यवस्थाओं का आश्वासन दिया गया था, उन्हें पूरा करना बिल्डर की जिम्मेदारी है। मालिकों का कहना है कि वह अपने अधिकारों से समझौता नहीं करेंगे।

    सितंबर 2025 के Partial OC की जांच की मांग

    ग्रैंडथुम ओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने सितंबर 2025 में जारी Partial OC को लेकर भी सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से इसकी उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। एसोसिएशन का सवाल है कि Partial OC जारी किए जाने के समय परियोजना में कौन-कौन सी सुविधाएं पूरी थीं और किन मानकों के आधार पर इसे जारी किया गया। प्रॉपर्टी मालिकों का कहना है कि इस संबंध में पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उस समय परियोजना सभी आवश्यक मानकों और प्रक्रियाओं को पूरा कर रही थी या नहीं।

    एसोसिएशन ने कहा कि यदि Partial OC जारी करने की प्रक्रिया में सभी नियमों का पालन किया गया है तो संबंधित दस्तावेज और तथ्य स्पष्ट किए जाएं। वहीं, यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

    प्राधिकरण की कार्रवाई पर भी सवाल

    एसोसिएशन के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पहले ही बिल्डर को दो बार बुलाकर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर चुका है। एसोसिएशन का दावा है कि प्राधिकरण की ओर से बिल्डर को नोटिस भी दिया गया है और उससे यह सवाल किया गया है कि आवश्यक लीज संबंधी औपचारिकताओं और प्रक्रियाओं को पूरा किए बिना पजेशन किस आधार पर दिया जा रहा है। इसके बावजूद एसोसिएशन का आरोप है कि बिल्डर की ओर से प्रॉपर्टी मालिकों पर पजेशन लेने और भुगतान करने का दबाव लगातार बनाया जा रहा है।

    एसोसिएशन ने प्राधिकरण से मांग की है कि वह मामले में स्पष्ट और पारदर्शी कार्रवाई करे तथा प्रॉपर्टी मालिकों के हितों को भी ध्यान में रखे।

    होल्डिंग चार्ज को लेकर भी नाराजगी

    प्रॉपर्टी मालिकों ने होल्डिंग चार्ज को लेकर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जब परियोजना की सुविधाओं और पजेशन की स्थिति को लेकर स्वयं सवाल मौजूद हैं, तब अतिरिक्त आर्थिक शुल्क लगाना उचित नहीं है। एसोसिएशन का कहना है कि सभी शुल्कों की वैधता, गणना का आधार और संबंधित दस्तावेज मालिकों के सामने रखे जाने चाहिए। पारदर्शिता के अभाव में किसी भी तरह की वसूली को लेकर विवाद बढ़ना स्वाभाविक है।

    मालिकों ने मांग की है कि बिल्डर द्वारा लगाए जा रहे मेंटेनेंस, होल्डिंग चार्ज और अन्य शुल्कों की स्वतंत्र रूप से समीक्षा कराई जाए।

    “मालिकों के हितों से समझौता नहीं होगा”

    एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष गुप्ता और महासचिव रजत गुप्ता ने कहा कि प्रॉपर्टी मालिक किसी अनुचित लाभ की मांग नहीं कर रहे हैं। उनकी मांग केवल कानून, पारदर्शिता और न्यायसंगत व्यवस्था की है।

    उन्होंने कहा कि जब तक दोनों टावरों का Full OC नहीं मिलता और एग्रीमेंट के अनुसार आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं, तब तक अत्यधिक मेंटेनेंस वसूली पर रोक लगनी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि प्राधिकरण को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। विशेष रूप से सितंबर 2025 में जारी Partial OC की परिस्थितियों और प्रक्रिया की भी जांच आवश्यक है।

    एसोसिएशन पदाधिकारियों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो वह प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष अपना पक्ष रखने के साथ-साथ लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे।

    बड़ी संख्या में प्रॉपर्टी ओनर्स रहे मौजूद

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ी संख्या में ग्रैंडथुम के प्रॉपर्टी ओनर्स मौजूद रहे। इनमें सुमित सोम (B-448), गौरव गर्ग (B-815), सार्थक अरोड़ा (A-817/818), आशीष गुप्ता (A-1510), अभिषेक शाह (A-1125), राजत गुप्ता (B-412), अशोक कुमार ओझा (B-912), शिल्पा निमोरे (A-1412), हिमांशु सोलंकी (B-2119), रोहित शर्मा (B-936), डॉ. वीरेंद्र प्रकाश, आर.के. पटेल (A-322), बंटी पोखरियाल, अरुण त्यागी, रविंद्र यादव (A-901B), अनुराग शर्मा (A-913), विभव सिंह और सत्यदेव कुमार सहित अन्य मालिक शामिल रहे।

    प्रॉपर्टी मालिकों ने एकजुट होकर कहा कि उनका उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि परियोजना की वैधानिक स्थिति, सुविधाओं और मेंटेनेंस व्यवस्था को पारदर्शी बनाना है।

    मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन की चेतावनी

    ग्रैंडथुम ओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने साफ किया कि यदि बिल्डर द्वारा कथित रूप से की जा रही अतिरिक्त वसूली और पजेशन के लिए दबाव जारी रहता है तथा प्राधिकरण की ओर से उनकी शिकायतों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो प्रॉपर्टी ओनर्स आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। एसोसिएशन का कहना है कि प्रॉपर्टी मालिकों ने अपनी मेहनत की कमाई से यहां निवेश किया है। ऐसे में उन्हें अधूरी सुविधाओं के बीच अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं उठाना चाहिए।

    फिलहाल पूरे मामले में प्रॉपर्टी मालिकों के आरोपों और मांगों के बीच ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और संबंधित बिल्डर का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा। प्राधिकरण की ओर से Partial OC, पजेशन और मेंटेनेंस शुल्क को लेकर स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद ही विवाद के सभी पहलुओं की तस्वीर साफ हो सकेगी।

    ग्रैंडथुम ओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने दोहराया है कि Full OC, एग्रीमेंट के अनुरूप सुविधाएं, पारदर्शी शुल्क व्यवस्था और प्रॉपर्टी मालिकों के अधिकारों की स्पष्ट सुरक्षा होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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