नोएडा, द न्यूज क्लिक। देश और दुनिया में अपनी आधुनिक पहचान, चौड़ी सड़कों, हाईराइज इमारतों और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मशहूर नोएडा इन दिनों एक नई परेशानी से जूझ रहा है। कभी “हाईटेक सिटी” कहलाने वाला यह शहर अब लगातार हो रही बिजली कटौती, तकनीकी अव्यवस्था और विभागीय कुप्रबंधन के चलते लोगों के बीच “पावर कट सिटी” के नाम से चर्चा में आ गया है। भीषण गर्मी के बीच लगातार बाधित हो रही बिजली व्यवस्था ने आम नागरिकों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।नइसी मुद्दे को लेकर सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय (दीपक शर्मा) ने बिजली विभाग की नई कार्यप्रणाली और नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने विभाग की कार्यशैली को “तुगलकी नीति” करार देते हुए आरोप लगाया कि बिना किसी पायलट प्रोजेक्ट और जमीनी तैयारी के लागू किए गए प्रयोगों ने पूरे शहर की बिजली व्यवस्था को संकट में डाल दिया है।
“बिना तैयारी पूरे शहर को बना दिया प्रयोगशाला”
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय का कहना है कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले उसका परीक्षण आवश्यक होता है, लेकिन बिजली विभाग ने सीधे पूरे नोएडा की व्यवस्था पर प्रयोग शुरू कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग के कुछ अधिकारियों ने ऐसी नीतियां लागू कर दीं, जिनका न तो कोई व्यावहारिक आधार था और न ही जमीनी अध्ययन।
108 बिजली उपकेंद्र और जिम्मेदारी सिर्फ दो इंजीनियरों पर!
सबसे बड़ा सवाल विभागीय प्रबंधन पर उठाया गया है। जानकारी के अनुसार, नोएडा के करीब 108 विद्युत उपकेंद्रों की निगरानी और संचालन की जिम्मेदारी केवल दो एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों के भरोसे छोड़ दी गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह व्यवस्था किसी भी स्थिति में व्यवहारिक नहीं कही जा सकती। यदि शहर के अलग-अलग हिस्सों में एक साथ तकनीकी फॉल्ट हो जाए, तो इतने सीमित अधिकारी हर जगह कैसे पहुंचेंगे? यही कारण है कि शिकायतों के समाधान में घंटों लग जाते हैं और लोग लंबे समय तक बिजली कटौती झेलने को मजबूर हो जाते हैं।
अवर अभियंताओं पर बढ़ा बोझ, जनता भुगत रही सजा
बिजली विभाग की नई व्यवस्था के तहत कई अवर अभियंताओं (JE) को एक साथ कई उपकेंद्रों का प्रभार दे दिया गया है। इससे हालात और अधिक खराब हो गए हैं।नयदि दो अलग-अलग इलाकों में एक साथ बिजली फॉल्ट होता है, तो कर्मचारी पहले किस जगह जाए? इसी असमंजस का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। सेक्टरों में घंटों बिजली गायब रहने से लोग नाराज हैं।
संविदा लाइनमैनों की छंटनी पर उठे सवाल
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने विभाग पर अनुभवी संविदा लाइनमैनों की छंटनी का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब शहर को सबसे ज्यादा तकनीकी कर्मचारियों की जरूरत है, तब जमीन पर काम करने वाले अनुभवी कर्मचारियों को हटाया जा रहा है। उन्होंने इसे “सुनियोजित अव्यवस्था” बताते हुए कहा कि लाइनमैन ही वह लोग होते हैं जो फॉल्ट के समय तुरंत मौके पर पहुंचकर सप्लाई बहाल करते हैं। यदि इनकी संख्या कम होगी, तो बिजली संकट और गहरा होना तय है।
“सरकार की छवि खराब करने की बड़ी साजिश”
दिव्य कृष्णात्रेय ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि—
“ऐसा प्रतीत होता है कि बिजली विभाग के कुछ उच्च अधिकारी जानबूझकर ऐसी अव्यवस्था फैला रहे हैं, जिससे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संवेदनशील और जनहितैषी सरकार की छवि खराब हो।”
उन्होंने कहा कि जब जनता गर्मी में परेशान है, तब विभागीय अधिकारी वातानुकूलित कमरों में बैठकर अव्यवहारिक प्रयोग कर रहे हैं। इससे सरकार की छवि को नुकसान पहुंच रहा है और लोगों का भरोसा कमजोर हो रहा है।
आरडब्ल्यूए ने की तत्काल सुधार की मांग
आरडब्ल्यूए और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि—
नई नीतियों की समीक्षा की जाए
पर्याप्त इंजीनियर और लाइनमैन तैनात किए जाएं
बिजली व्यवस्था पर पायलट प्रोजेक्ट के बाद ही नई प्रणाली लागू हो
शिकायत निस्तारण के लिए फास्ट रिस्पांस सिस्टम बनाया जाए
लोगों का कहना है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में जनता का आक्रोश और बढ़ सकता है।
बिना ट्रायल के ‘विनाशकारी’ प्रयोग
किसी भी नीति को लागू करने से पहले उसका परीक्षण अनिवार्य है, लेकिन यहाँ सीधे पूरी व्यवस्था को ही प्रयोगशाला बना दिया गया है। ”ऐसा प्रतीत होता है कि बिजली विभाग के कुछ उच्च अधिकारी जानबूझकर ऐसी अव्यवस्था फैला रहे हैं, जिससे माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की यशस्वी और संवेदनशील सरकार की छवि को धूमिल किया जा सके। जब जनता गर्मी से त्राहि-त्राहि कर रही है, तब प्रबंधन वातानुकूलित कमरों में बैठकर अव्यवहारिक प्रयोग करने में व्यस्त है।”

