सुप्रीम कोर्ट ने NTA सुधारों पर मांगी प्रगति रिपोर्ट, परीक्षा व्यवस्था को स्थायी और संस्थागत बनाने पर भी दिया जोर
नई दिल्ली, द न्यूज क्लिक। NEET और देश की प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था में संरचनात्मक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सामने आया है। केंद्र सरकार ने 18 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई-पावर टास्क फोर्स ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर व्यापक विचार-विमर्श किया है और समिति अपनी पहली अंतरिम रिपोर्ट सितंबर के अंत तक सौंप सकती है।
केंद्र की ओर से सुप्रीम कोर्ट में बताया गया कि समिति के सामने विभिन्न सुझाव रखे जा चुके हैं। समिति ने पूर्व ISRO अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पूर्व समिति के सदस्यों के साथ भी विचार-विमर्श किया है। टास्क फोर्स को प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था को मजबूत करने और परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा एवं विश्वसनीयता बढ़ाने से जुड़े संरचनात्मक सुधारों पर सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगी समिति की प्रगति रिपोर्ट
NEET परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने नंदन नीलेकणि समिति की प्रगति का ब्योरा मांगा। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने समिति के साथ समन्वय कर रहे कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के संयुक्त सचिव को अब तक हुई प्रगति के संबंध में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार केवल रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू किया जाना जरूरी है। कोर्ट ने पूरे NEET सिस्टम को अधिक स्थायी और संस्थागत स्वरूप देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
NTA की व्यवस्था का भी लिया जा सकता है जायजा
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के नए और अपग्रेड किए गए कार्यालय का दौरा कर परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी तैयारियों का प्रत्यक्ष जायजा लेने की इच्छा भी जताई। कोर्ट की ओर से सिस्टम, मानव संसाधन और अन्य व्यवस्थाओं को देखने की बात कही गई है।
केंद्र की ओर से अदालत को बताया गया कि NTA की संरचना को मजबूत करने के लिए नई व्यवस्था तैयार की गई है। हालांकि, मानव संसाधन से जुड़ी व्यवस्थाएं अभी पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हुई हैं। ऐसे में परीक्षा संचालन की संस्थागत क्षमता और स्थायी स्टाफिंग भी सुधार प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।
CBT को लेकर भी चर्चा, अंतिम फैसला बाकी
NEET परीक्षा में तकनीक के अधिक इस्तेमाल और Computer-Based Test (CBT) की संभावित व्यवस्था को लेकर भी पहले से चर्चा चल रही है। हालांकि, परीक्षा का स्वरूप बदलने संबंधी कोई अंतिम निर्णय अभी सामने नहीं आया है। नंदन नीलेकणि समिति की सिफारिशों और सरकार द्वारा लिए जाने वाले आगामी फैसलों के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि NEET की परीक्षा व्यवस्था में कौन-कौन से बदलाव लागू किए जाएंगे।
संभावित सुधारों में परीक्षा सुरक्षा, तकनीकी ढांचे, डेटा एवं सिस्टम प्रबंधन, मानव संसाधन, पारदर्शिता और परीक्षा संचालन की संस्थागत क्षमता जैसे पहलू महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि, इनमें से कौन से उपाय अंतिम रूप से लागू होंगे, यह समिति की रिपोर्ट और उसके बाद सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगा।
छात्रों और अभिभावकों की नजर अंतरिम रिपोर्ट पर
NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा में होने वाले किसी भी संरचनात्मक बदलाव का सीधा असर लाखों अभ्यर्थियों, अभिभावकों, कोचिंग संस्थानों और मेडिकल शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में समिति की प्रस्तावित अंतरिम रिपोर्ट पर शिक्षा जगत और छात्रों की नजर बनी हुई है।
फिलहाल केंद्र की ओर से सुप्रीम कोर्ट को दी गई जानकारी के मुताबिक नंदन नीलेकणि समिति की पहली अंतरिम रिपोर्ट सितंबर के अंत तक आने की संभावना है। इसके बाद परीक्षा प्रणाली में प्रस्तावित सुधारों और उनके क्रियान्वयन की दिशा अधिक स्पष्ट हो सकती है।

