ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे।
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-37 स्थित जोनल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को लेकर अब एक बड़ा जनविवाद खड़ा हो गया है। शहर के एकमात्र निःशुल्क बहुउद्देश्यीय खेल मैदान को हॉकी स्टेडियम में परिवर्तित किए जाने की प्रस्तावित योजना के विरोध में स्थानीय खिलाड़ी, प्रतियोगी छात्र, सामाजिक संगठन और क्षेत्रीय खेल परिसर बचाओ समिति खुलकर मैदान में उतर आए हैं। मामला अब केवल खेल सुविधाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह युवाओं के भविष्य, सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग और विकास की प्राथमिकताओं पर भी बड़ा सवाल बनकर उभर रहा है। समिति ने इस मुद्दे को लेकर गौतमबुद्ध नगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा तथा भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री नवाब सिंह नागर से मुलाकात कर विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि प्रस्तावित हॉकी स्टेडियम परियोजना पर पुनर्विचार किया जाए और इस मैदान को उसके वर्तमान स्वरूप में संरक्षित रखा जाए ताकि हजारों युवाओं के खेल और रोजगार से जुड़े सपनों को सुरक्षित रखा जा सके।

हजारों युवाओं के अभ्यास का केंद्र बना है यह मैदान
क्षेत्रीय खेल परिसर बचाओ समिति का कहना है कि सेक्टर-37 का यह मैदान पिछले डेढ़ दशक से केवल खेल का मैदान नहीं बल्कि हजारों युवाओं के सपनों का आधार रहा है। यहां प्रतिदिन एथलेटिक्स, फुटबॉल, क्रिकेट, कबड्डी, दौड़ सहित अनेक खेलों का अभ्यास होता है। इसके साथ ही सेना, पुलिस, अर्धसैनिक बलों और अन्य प्रतियोगी सेवाओं की शारीरिक परीक्षा की तैयारी करने वाले युवा भी इसी मैदान पर नियमित अभ्यास करते हैं।

समिति का कहना है कि यदि पूरे परिसर को एकल उपयोग वाले हॉकी स्टेडियम में बदल दिया गया तो बाकी खेलों से जुड़े खिलाड़ियों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। उनके अनुसार शहर में पहले ही खुले खेल मैदानों की संख्या सीमित है और ऐसे में इस मैदान का स्वरूप बदलना हजारों युवाओं के हितों के खिलाफ होगा।
जनप्रतिनिधियों के समक्ष रखी गई आपत्तियां
समिति के सदस्य मुकेश चौधरी ने बताया कि सांसद और भाजपा प्रदेश नेतृत्व को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि इस परियोजना को लेकर स्थानीय खिलाड़ियों और नागरिकों की राय नहीं ली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों के दबाव में इस योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। समिति का कहना है कि यदि जनता की भावनाओं की अनदेखी की गई तो इसका राजनीतिक और सामाजिक असर भी देखने को मिल सकता है। उन्होंने मांग की कि सरकार पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा कराए और किसी भी अंतिम निर्णय से पहले खिलाड़ियों, खेल विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों के साथ विस्तृत संवाद स्थापित किया जाए।
“यह सिर्फ मैदान नहीं, युवाओं के सपनों की जमीन है”
समिति के सदस्य नलवीर पायला ने कहा कि किसानों से भूमि अधिग्रहण के समय यह आश्वासन दिया गया था कि यहां ऐसा खेल परिसर विकसित होगा जिसका लाभ क्षेत्र के सभी युवाओं को मिलेगा। पिछले लगभग 15 वर्षों से यह मैदान बहुउद्देश्यीय खेल गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। उन्होंने कहा कि यहां से प्रशिक्षण लेकर अनेक युवाओं ने सेना, पुलिस और विभिन्न सरकारी सेवाओं में सफलता हासिल की है। कई खिलाड़ियों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है। ऐसे में पूरे परिसर को केवल हॉकी स्टेडियम तक सीमित कर देना अन्य खेलों के साथ अन्याय होगा।
पहले से मौजूद हॉकी मैदान का उपयोग करने की मांग
समिति के सदस्य रितेश भाटी ने कहा कि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय परिसर में पहले से हॉकी के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध है। यदि उस मैदान का बेहतर उपयोग किया जाए तो नए एस्ट्रो टर्फ की आवश्यकता अलग से नहीं पड़ेगी और सेक्टर-37 का बहुउद्देश्यीय मैदान भी सुरक्षित रह सकेगा। उनका कहना है कि शहर के विकास का मतलब केवल नई परियोजनाएं बनाना नहीं, बल्कि पहले से मौजूद सार्वजनिक संसाधनों का संतुलित और प्रभावी उपयोग करना भी है।
युवाओं ने मैदान पर किया विरोध प्रदर्शन
समिति के अनुसार हाल ही में बड़ी संख्या में खिलाड़ी और प्रतियोगी छात्र मैदान पर एकत्र हुए और प्रस्तावित योजना के विरोध में अपनी आवाज बुलंद की। युवाओं का कहना है कि यदि यह मैदान समाप्त हो गया तो उन्हें अभ्यास के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ेगा। इससे आर्थिक बोझ बढ़ेगा और नियमित अभ्यास भी प्रभावित होगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं का कहना है कि उनके लिए यह मैदान केवल खेल का स्थान नहीं बल्कि करियर बनाने का माध्यम है। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले उनकी समस्याओं को भी सुना जाना चाहिए।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
समिति के सदस्य सतेंद्र नागर ने कहा कि अब तक आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से चलाया गया है। यदि बिना स्थानीय सहमति के निर्माण कार्य शुरू किया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि भविष्य की रणनीति के तहत अनिश्चितकालीन धरना, जोनल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण तक पैदल मार्च, हस्ताक्षर अभियान और सांकेतिक बुद्धि-शुद्धि यज्ञ जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकते हैं।
प्राधिकरण की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले में संबंधित प्राधिकरण की ओर से विरोध को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सांसद और भाजपा नेतृत्व के समक्ष मामला पहुंचने के बाद प्रशासन परियोजना की समीक्षा करता है या पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ता है।
ग्रेटर नोएडा के तेजी से विकसित होते शहरी परिदृश्य में यह विवाद केवल एक खेल मैदान का नहीं, बल्कि यह तय करने का भी है कि विकास की दिशा क्या होगी—क्या नई परियोजनाएं मौजूदा सार्वजनिक सुविधाओं की कीमत पर बनेंगी, या सभी खेलों और खिलाड़ियों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित समाधान निकाला जाएगा। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।

