ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में नियमितीकरण की मांग को लेकर आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की हड़ताल लगातार जारी है। पिछले कई दिनों से धरना दे रहे कर्मचारियों ने बुधवार को अपने आंदोलन को नया रूप देते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम खून से पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर लगातार अनदेखी की जा रही है, जिसके कारण उन्हें इस तरह का कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
धरनास्थल पर एकत्रित बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने खून से लिखे पत्र में मुख्यमंत्री से अपील की कि जिम्स अस्पताल में कार्यरत कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान किया जाए और उनकी लंबे समय से लंबित नियमितीकरण की मांग को पूरा किया जाए। पत्र में कर्मचारियों ने लिखा कि उन्हें न्याय दिया जाए तथा उनकी सेवाओं को नियमित किया जाए। साथ ही कर्मचारियों ने यह भी कहा कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
गौरतलब है कि जिम्स में कार्यरत लगभग 700 आउटसोर्सिंग कर्मचारी 15 जून से नियमितीकरण की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे कई वर्षों से संस्थान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। इस दौरान अस्पताल प्रशासन, जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के साथ कई दौर की वार्ताएं भी हुईं, लेकिन अब तक किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन सकी है।
आंदोलन में शामिल कर्मचारी रश्मि ने बताया कि जिम्स प्रबंधन उनकी मांगों को लेकर गंभीर नहीं है। उनका आरोप है कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें लगातार आश्वासन दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि संस्थान के निदेशक का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है, तो कर्मचारियों को नियमित करने की दिशा में भी सकारात्मक पहल की जानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि वर्षों से अस्पताल की सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने वाले कर्मचारियों को उनका अधिकार क्यों नहीं दिया जा रहा है।
कर्मचारियों का कहना है कि वे अस्पताल के विभिन्न विभागों में लगातार सेवाएं दे रहे हैं और संस्थान की व्यवस्था को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद उनकी नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा रही है। कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि लंबे समय से उनके वेतन में कोई संतोषजनक वृद्धि नहीं की गई है, जिससे आर्थिक कठिनाइयां बढ़ रही हैं।
धरनारत कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। विरोध स्वरूप कर्मचारी अपनी शैक्षणिक डिग्रियां जलाकर प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि उनकी योग्यता और वर्षों की सेवाओं का सम्मान नहीं किया जा रहा है तो ऐसी डिग्रियों का कोई महत्व नहीं रह जाता।
हड़ताल के चलते अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ने लगा है। हालांकि प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्थाओं के माध्यम से मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है, लेकिन कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण कई कार्य प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। इस बीच कर्मचारियों और प्रशासन के बीच गतिरोध कायम है तथा सभी की निगाहें शासन स्तर पर होने वाले संभावित निर्णय पर टिकी हुई हैं।
कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर उनकी मांगों का समाधान कराने की अपील की है। उनका कहना है कि वे संघर्ष के रास्ते पर नहीं जाना चाहते, लेकिन लगातार अनदेखी के कारण आंदोलन करने को विवश हैं। अब देखना होगा कि शासन और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और लंबे समय से जारी यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।

