ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। ग्रेटर नोएडा को स्मार्ट सिटी और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का मॉडल बनाने के दावों के बीच सूरजपुर क्षेत्र में हुई भारी बारिश ने एक बार फिर जमीनी हकीकत सामने ला दी है। लगातार हो रही बारिश के कारण सूरजपुर-दादरी रोड पूरी तरह जलमग्न हो गई, जबकि सूरजपुर पुलिस चौकी तक पानी में घिर गई। कई दिनों से सड़कों और गलियों में जलभराव बना हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। हर
मानसून में सूरजपुर की यही स्थिति बन जाती है। नालों की समय पर सफाई न होने, जल निकासी व्यवस्था कमजोर होने और ड्रेनेज सिस्टम के अभाव के कारण थोड़ी सी बारिश भी पूरे इलाके को जलमग्न कर देती है।

सामाजिक संगठन एक्टिव सिटीजन टीम के सदस्य हरेंद्र भाटी ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्षों से लगातार जलभराव की शिकायतें, तस्वीरें और वीडियो संबंधित अधिकारियों को भेजे जा रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि जब बारिश का पानी कई दिनों तक नहीं निकलता, पुलिस चौकी तक जलभराव की चपेट में आ जाती है और मुख्य सड़कें तालाब में बदल जाती हैं, तो स्मार्ट सिटी के दावों पर गंभीर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
स्थानीय लोगों के अनुसार जलभराव के कारण आवागमन बाधित हो रहा है, वाहनों की आवाजाही प्रभावित है और गंदा पानी जमा रहने से संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। कई स्थानों पर कीचड़ और बदबू के कारण लोगों का घरों से निकलना भी मुश्किल हो गया है।
हरेंद्र भाटी ने कहा कि यदि हर वर्ष मानसून के दौरान यही स्थिति बनी रहती है तो केवल अस्थायी इंतजामों से समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसके लिए वैज्ञानिक आधार पर ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत करना, नालों की नियमित सफाई, क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और जल निकासी की स्थायी योजना तैयार करना आवश्यक है।
स्थानीय नागरिकों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से मांग की है कि—
24 घंटे के भीतर जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी की निकासी सुनिश्चित की जाए।
नालों और ड्रेनेज सिस्टम की तत्काल सफाई कराई जाए।
टूटी और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत की जाए।
सूरजपुर क्षेत्र में जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना सार्वजनिक की जाए।
संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर नियमित निगरानी की व्यवस्था की जाए।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि वे विकास के दावों के बजाय जमीनी स्तर पर समाधान चाहते हैं। उनका मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो हर मानसून में सूरजपुर के लोगों को इसी तरह जलभराव, ट्रैफिक जाम और दैनिक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
हालांकि, इस संबंध में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

