नोएडा, द न्यूज क्लिक। नोएडा में मानसून की पहली तेज बारिश ने एक बार फिर शहर की बदहाल ड्रेनेज व्यवस्था और खुले नालों की भयावह तस्वीर सामने ला दी। सेक्टर-58 थाना क्षेत्र में गुरुवार शाम हुई दर्दनाक घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया, जहां 27 वर्षीय युवक आर्यन की खुले नाले में गिरने से मौत हो गई। इस हादसे ने एक बार फिर नोएडा प्राधिकरण की कार्यशैली, जल निकासी व्यवस्था और नागरिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मृतक आर्यन अटरा गांव का निवासी था। वह रोज की तरह अपनी ड्यूटी पर जा रहा था। इसी दौरान तेज बारिश के कारण सड़क पर भारी जलभराव हो गया। सड़क और नाले का अंतर पूरी तरह समाप्त हो गया था। पानी से ढके खुले नाले का अंदाजा न लग पाने के कारण आर्यन अचानक उसमें गिर गया। तेज बहाव और गहरे पानी के कारण वह बाहर नहीं निकल सका और उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और पुलिस को सूचना दी। सेक्टर-58 थाना पुलिस मौके पर पहुंची तथा स्थानीय लोगों की मदद से काफी मशक्कत के बाद युवक को नाले से बाहर निकाला गया। उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
परिजनों का फूटा गुस्सा, प्राधिकरण को ठहराया जिम्मेदार
आर्यन की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजनों ने इस हादसे के लिए सीधे तौर पर नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से खुले नाले पड़े हुए हैं, लेकिन उन्हें ढकने या सुरक्षा बैरिकेड लगाने की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
परिजनों का आरोप है कि यदि नाले पर मजबूत ढक्कन या सुरक्षा व्यवस्था होती तो आज आर्यन जीवित होता। उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश
घटना के बाद क्षेत्र में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। स्थानीय नागरिकों ने नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि हर साल बारिश में यही स्थिति बनती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजी दावे करते हैं।
लोगों का कहना है कि बारिश शुरू होने से पहले नालों की सफाई, ढक्कन लगाने और जल निकासी व्यवस्था सुधारने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने रहते हैं। परिणामस्वरूप हर मानसून में नागरिकों की जान खतरे में पड़ जाती है।
बारिश में मौत का जाल बन जाते हैं खुले नाले
विशेषज्ञों का मानना है कि जलभराव के दौरान खुले नाले सबसे बड़ा खतरा बन जाते हैं। सड़क पर जमा पानी के कारण लोगों को यह पता नहीं चल पाता कि कहां सड़क समाप्त हो रही है और कहां गहरा नाला शुरू हो रहा है। ऐसे में पैदल चलने वाले, दोपहिया वाहन चालक और बुजुर्ग सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पूरे नोएडा में खुले नालों का तत्काल सर्वे कराया जाए और जहां भी ढक्कन नहीं हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर उन्हें लगाया जाए।
पहले भी हो चुके हैं कई हादसे
यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी नोएडा के विभिन्न सेक्टरों, विशेषकर सेक्टर-150 सहित कई इलाकों में खुले नालों और गड्ढों में गिरने से लोगों की मौत हो चुकी है। हर घटना के बाद जांच और कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं हो पाया है।
लगातार हो रही ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि शहर की आधारभूत संरचना और सुरक्षा मानकों में व्यापक सुधार की आवश्यकता है।
पुलिस ने शुरू की जांच
थाना सेक्टर-58 के प्रभारी निरीक्षक अमित कुमार ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले की जांच की जा रही है। घटना के सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
नागरिकों की प्रमुख मांगें
पूरे नोएडा में खुले नालों को तत्काल ढका जाए।
मानसून से पहले सभी नालों की सफाई और सुरक्षा ऑडिट कराया जाए।
हादसे के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
मृतक के परिवार को उचित आर्थिक सहायता और न्याय मिले।
जलभराव वाले क्षेत्रों की स्थायी ड्रेनेज योजना लागू की जाए।
आर्यन की मौत केवल एक परिवार का व्यक्तिगत दुख नहीं, बल्कि शहरी प्रशासन की जिम्मेदारी पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। यदि समय रहते खुले नालों को सुरक्षित नहीं किया गया और जल निकासी व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो ऐसे हादसे भविष्य में भी दोहराए जा सकते हैं। अब लोगों की नजर नोएडा प्राधिकरण पर है कि वह इस घटना से सबक लेकर ठोस कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह केवल जांच और आश्वासनों तक सीमित रह जाएगा।

