बेंगलुरु, द न्यूज क्लिक। भारत को चिकित्सा नवाचार और स्वदेशी मेडिकल डिवाइस निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS), ग्रेटर नोएडा के सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन (CMI) और जालप्पा फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन (JFII), श्री देवराज उर्स एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च (SDUAHER) ने मिलकर ‘डॉक्टर्स आइडिया ऑफ इंडिया’ के कर्नाटक कोहोर्ट का शुभारंभ किया।
इस राष्ट्रीय पहल का उद्देश्य डॉक्टरों, मेडिकल
विद्यार्थियों, इंजीनियरों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य पेशेवरों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना है, जहां उनके अभिनव विचारों को आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और उद्योग जगत के सहयोग से सफल मेडटेक स्टार्टअप और स्वदेशी मेडिकल डिवाइस में बदला जा सके।

डॉक्टरों के विचारों को मिलेगा राष्ट्रीय मंच
‘डॉक्टर्स आइडिया ऑफ इंडिया’ एक राष्ट्रीय अभियान है, जिसका उद्देश्य डॉक्टरों, रेजिडेंट चिकित्सकों, मेडिकल विद्यार्थियों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों के नवाचारों को पहचानना और उन्हें विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है।
इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को— क्लिनिकल मेंटरशिप, स्टार्टअप इन्क्यूबेशन, बौद्धिक संपदा (IP) सहायता, प्रोटोटाइप विकास, क्लिनिकल वैलिडेशन, उद्योग जगत से सहयोग, निवेशकों तक पहुंच, व्यवसाय विकास जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
CMI-GIMS और JFII मिलकर तैयार करेंगे मेडटेक इकोसिस्टम
कार्यक्रम के दौरान दोनों संस्थानों ने चिकित्सा नवाचार, अनुसंधान, क्लिनिकल वैलिडेशन, स्टार्टअप इन्क्यूबेशन, क्षमता निर्माण और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए अपने सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
इस साझेदारी का उद्देश्य चिकित्सा संस्थानों में नवाचार की संस्कृति विकसित करना और डॉक्टरों के विचारों को प्रयोगशाला से उद्योग तथा बाजार तक पहुंचाने में सहायता करना है।
डॉ. राहुल सिंह बोले— भारत को बनाना है मेडिकल टेक्नोलॉजी का वैश्विक नेतृत्वकर्ता
सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन (CMI), GIMS, ग्रेटर नोएडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. राहुल सिंह ने कहा कि भारत को मेडिकल डिवाइस और हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विश्वस्तरीय पहचान दिलाने के लिए डॉक्टरों, इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और उद्योग जगत के बीच मजबूत समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी ऐसा मेडटेक इकोसिस्टम तैयार करेगी, जिसमें—डॉक्टर वास्तविक क्लिनिकल समस्याओं की पहचान करेंगे,
इंजीनियर उनके तकनीकी समाधान विकसित करेंगे,
शोध संस्थान उन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित करेंगे,और उद्योग उन्हें बाजार तक पहुंचाने में सहयोग करेगा। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य केवल स्टार्टअप तैयार करना नहीं, बल्कि भारत को ‘मेक इन इंडिया’ मेडिकल डिवाइस निर्माण और स्वास्थ्य तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।
कर्नाटक के डॉक्टरों और विद्यार्थियों को मिलेगा बड़ा अवसर
डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि कर्नाटक कोहोर्ट राज्य के डॉक्टरों और मेडिकल विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों, उद्योग, निवेशकों और इन्क्यूबेशन नेटवर्क से जोड़ते हुए उनके विचारों को सफल मेडटेक स्टार्टअप में बदलने का अवसर प्रदान करेगा।
JFII ने बताया ऐतिहासिक कदम
जालप्पा फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन (JFII) के निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. आनंद टी. ने कहा कि कर्नाटक में ‘डॉक्टर्स आइडिया ऑफ इंडिया’ का शुभारंभ राज्य के स्वास्थ्य नवाचार इकोसिस्टम के लिए एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम से डॉक्टरों, मेडिकल विद्यार्थियों और स्वास्थ्य पेशेवरों को राष्ट्रीय स्तर की इन्क्यूबेशन सुविधाएं, क्लिनिकल वैलिडेशन, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और निवेश के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि CMI-GIMS और JFII की यह साझेदारी डॉक्टरों, इंजीनियरों, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत के बीच सहयोग को मजबूत करेगी तथा स्वदेशी मेडिकल डिवाइस, नई स्वास्थ्य तकनीकों और डॉक्टर-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
देशभर में विस्तार की तैयारी
कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों, स्टार्टअप्स, उद्योग प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं, नवाचार विशेषज्ञों और विभिन्न इन्क्यूबेशन संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए बहु-विषयक सहयोग समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उत्तर प्रदेश में सफलता के बाद अब इस अभियान का विस्तार कर्नाटक तक किया गया है। CMI-GIMS आने वाले वर्षों में इस पहल को देश के अन्य राज्यों तक भी ले जाने की योजना पर कार्य कर रहा है, ताकि डॉक्टर-नेतृत्व वाले नवाचारों, मेडटेक स्टार्टअप्स और स्वदेशी मेडिकल डिवाइस निर्माण को नई गति मिल सके और भारत वैश्विक स्वास्थ्य नवाचार का अग्रणी केंद्र बन सके।

