नोएडा, द न्यूज क्लिक।
देश के सबसे आधुनिक और योजनाबद्ध शहरों में शामिल नोएडा एक बार फिर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर चर्चा में है। जहां एक ओर नोएडा को विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे निर्माण कार्यों में कथित भ्रष्टाचार और घटिया सामग्री के इस्तेमाल के आरोपों ने विकास कार्यों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इन आरोपों को लेकर करप्शन फ्री इंडिया संगठन ने खुलकर आवाज उठाई है। संगठन के संस्थापक चौधरी प्रवीण भारतीय ने नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक ए.के. अरोड़ा को शिकायत पत्र सौंपते हुए विभिन्न निर्माण परियोजनाओं की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
“जनता के पैसे से हो रहा विकास या भ्रष्टाचार?”
करप्शन फ्री इंडिया संगठन का कहना है कि नोएडा के कई क्षेत्रों में सरकारी धन से चल रहे निर्माण कार्यों में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की जा रही है। आरोप है कि कुछ परियोजनाओं में निर्धारित मानकों के विपरीत घटिया किस्म की ईंट, सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे भविष्य में निर्माण की मजबूती और सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो सकता है। चौधरी प्रवीण भारतीय ने कहा कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन कई स्थानों पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इन मामलों की जांच नहीं कराई गई तो करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली परियोजनाएं जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पाएंगी।
बादौली गांव के निर्माण कार्यों पर उठे सवाल
संगठन द्वारा दी गई शिकायत में विशेष रूप से गांव बादौली का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि गांव में बारात घर से लेकर शराब की दुकान तक बनाए जा रहे नाली निर्माण कार्य में निम्न गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया जा रहा है।
इसके अलावा नोएडा एक्सप्रेसवे के समीप स्थित नाले के निर्माण और रखरखाव कार्यों में भी मानकों के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किए जाने की बात कही गई है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि निर्माण स्थल पर उपयोग की जा रही ईंटें और अन्य सामग्री गुणवत्ता मानकों से काफी नीचे हैं।
सेक्टर-145 में किसान आबादी परियोजना पर भी गंभीर आरोप
करप्शन फ्री इंडिया संगठन ने नोएडा के सेक्टर-145 में चल रहे विकास कार्यों को भी जांच के दायरे में लाने की मांग की है। यहां किसान आबादी क्षेत्र में सड़क, सीवर और बाउंड्री वॉल निर्माण का कार्य चल रहा है।
संगठन का आरोप है कि इस परियोजना में कार्य कर रही निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत के कारण बड़े स्तर पर अनियमितताएं हो रही हैं। शिकायत में कहा गया है कि निर्माण कार्य में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल हैं और कार्यस्थल पर खुलेआम मानकों की अनदेखी की जा रही है।
ठेकेदार कंपनी पर लगाए गंभीर आरोप
चौधरी प्रवीण भारतीय ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में लगी दुर्गा कंस्ट्रक्शन कंपनी के कर्मचारियों और प्रबंधन द्वारा निम्न स्तर की सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जा रही ईंट, सीमेंट और रेत की गुणवत्ता की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं बल्कि जनता की सुरक्षा और सरकारी धन के दुरुपयोग का भी मामला होगा।
“भ्रष्टाचार मुक्त भारत” के संकल्प पर सवाल
करप्शन फ्री इंडिया संगठन का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार लगातार भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था की बात कर रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर देते रहे हैं। ऐसे में यदि विकास कार्यों में भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग की शिकायतें सामने आती हैं तो यह सरकार की मंशा और जनहित की भावना के विपरीत माना जाएगा। संगठन ने कहा कि विकास केवल परियोजनाओं की संख्या बढ़ाने से नहीं बल्कि उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने से होता है।
जांच कर दोषियों पर हो कार्रवाई: संगठन
संगठन ने मांग की है कि इन सभी निर्माण कार्यों की किसी स्वतंत्र और सक्षम एजेंसी से तकनीकी जांच कराई जाए। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो संबंधित निर्माण कार्यों को ध्वस्त कर पुनः गुणवत्ता मानकों के अनुरूप बनाया जाए। साथ ही, जिन अधिकारियों, इंजीनियरों और ठेकेदारों की भूमिका संदिग्ध पाई जाए, उनके खिलाफ कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए। संगठन ने दोषियों को जेल भेजने की भी मांग की है ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सके।
जनता की निगाहें अब प्राधिकरण की कार्रवाई पर
शिकायत सामने आने के बाद अब लोगों की निगाहें नोएडा प्राधिकरण पर टिक गई हैं। शहरवासियों का मानना है कि यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होती है तो सच्चाई सामने आएगी और भविष्य में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में सुधार होगा। विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना किसी भी आधुनिक शहर की पहचान होती है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नोएडा प्राधिकरण इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और जनता के सामने क्या तथ्य प्रस्तुत करता है।

