ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। उत्तर प्रदेश को सर्वाधिक राजस्व देने वाले हाईटेक शहर नोएडा की पहचान आधुनिक बुनियादी ढांचे और तेज विकास के लिए की जाती है, लेकिन इसी शहर की दो प्रमुख जीवनदायिनी नदियां—यमुना और हिंडन—आज गंभीर प्रदूषण की चपेट में हैं। इन नदियों की वर्तमान स्थिति को लेकर सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जिन नदियों को भारतीय संस्कृति में पवित्र और जीवनदायिनी माना जाता है, वे आज प्रशासनिक उदासीनता और प्रदूषण के कारण “जहरीले नालों” में तब्दील होती जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि यमुना और हिंडन केवल जल स्रोत नहीं हैं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, संस्कृति और सभ्यता की धरोहर हैं। बावजूद इसके, इनकी स्वच्छता और संरक्षण को लेकर अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है। शहर के अनेक बड़े नालों और सीवर का पानी बिना पर्याप्त शोधन के सीधे इन नदियों में छोड़ा जा रहा है, जिससे नदी का जल लगातार प्रदूषित हो रहा है और उसका प्राकृतिक स्वरूप समाप्त होता जा रहा है।
बिना शोधन के सीवर और औद्योगिक अपशिष्ट बना बड़ी चुनौती
दिव्य कृष्णात्रेय ने आरोप लगाया कि विभिन्न क्षेत्रों से निकलने वाला सीवर और औद्योगिक अपशिष्ट बिना समुचित उपचार के सीधे नदियों में प्रवाहित किया जा रहा है। इसके कारण नदी का पानी काला पड़ चुका है, दुर्गंध फैल रही है और आसपास का वातावरण भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल पर्यावरणीय संकट नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय भी है। उन्होंने चिंता जताई कि प्रदूषित नदी जल धीरे-धीरे भूजल को भी प्रभावित कर रहा है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में नोएडा और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को स्वच्छ पेयजल की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

सनातन संस्कृति और पर्यावरण दोनों पर संकट
दिव्य कृष्णात्रेय ने कहा कि भारतीय परंपरा में नदियों को माता का दर्जा दिया गया है। यमुना और हिंडन जैसी नदियां धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरणीय संतुलन का महत्वपूर्ण आधार हैं। ऐसे में इनकी उपेक्षा केवल पर्यावरण का नुकसान नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर की भी अनदेखी है।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी केवल विकास परियोजनाएं बनाना नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना भी है। यदि नदियां ही प्रदूषित होती रहेंगी तो विकास का वास्तविक उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।
जलशोधन संयंत्रों की प्रभावी निगरानी की मांग
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने मांग की कि सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और जलशोधन संयंत्रों की कार्यक्षमता की स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए। जहां भी क्षमता से कम उपचार हो रहा हो या मानकों का पालन नहीं किया जा रहा हो, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि बिना उपचारित सीवर का एक भी बूंद नदी में न पहुंचे।
उन्होंने औद्योगिक इकाइयों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण मानकों के पालन की नियमित जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की भी मांग की।
समयबद्ध पुनरुद्धार योजना बनाने की अपील
दिव्य कृष्णात्रेय ने कहा कि यमुना और हिंडन के पुनर्जीवन के लिए केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए समयबद्ध, पारदर्शी और वैज्ञानिक कार्ययोजना तैयार कर उसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। नदी किनारों की सफाई, गाद हटाने, हरित पट्टी विकसित करने, अवैध अतिक्रमण रोकने और प्रदूषण के सभी स्रोतों पर नियंत्रण के लिए समन्वित अभियान चलाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि आज भी प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ नदी नहीं, बल्कि प्रदूषित जलधाराएं विरासत में मिलेंगी।
नागरिकों से भी सहयोग की अपील
उन्होंने आम नागरिकों से भी अपील की कि वे नदियों में कूड़ा-कचरा, प्लास्टिक अथवा अन्य अपशिष्ट न डालें तथा जल संरक्षण और स्वच्छता अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उनका कहना था कि सरकार, प्रशासन और समाज—तीनों के संयुक्त प्रयासों से ही यमुना और हिंडन को फिर से स्वच्छ और जीवनदायिनी बनाया जा सकता है।
दिव्य कृष्णात्रेय ने अंत में कहा कि यह केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य, धार्मिक आस्था और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का विषय है। इसलिए सभी संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों को इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए।

