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Tuesday, July 21, 2026
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    GIMS Hospital News : जीनोमिक्स की नई उड़ान: GIMS ग्रेटर नोएडा में शुरू हुई तीन दिवसीय हाईटेक NGS कार्यशाला, आधुनिक बायोमेडिकल रिसर्च के भविष्य को मिलेगा नया आयाम, देशभर के शोधार्थी सीख रहे अत्याधुनिक डेटा एनालिसिस की बारीकियां, 17 वर्षों के अनुभव वाले विशेषज्ञ ने साझा किया ज्ञान

    जीआईएमएस के निदेशक डॉ. (ब्रिग) राकेश गुप्ता ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है। शोधकर्ताओं को नवीनतम तकनीकों में व्यावहारिक दक्षता विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि NGS और Bioinformatics आने वाले वर्षों में चिकित्सा अनुसंधान की आधारशिला बनने जा रहे हैं। इसलिए युवा शोधकर्ताओं, चिकित्सकों और विद्यार्थियों को इन क्षेत्रों में विशेषज्ञता विकसित करनी चाहिए ताकि वे वैश्विक स्तर के अनुसंधान में प्रभावी योगदान दे सकें।

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    ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान के तेजी से बदलते दौर में जीनोमिक्स (Genomics) और बायोइन्फॉर्मेटिक्स (Bioinformatics) की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS), ग्रेटर नोएडा के मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (MRU), चिकित्सा अनुसंधान विभाग ने “NGS Data Analysis: Lecture Series and Hands-on Workshop” विषय पर तीन दिवसीय वर्चुअल कार्यशाला का सफल शुभारंभ किया। यह कार्यशाला 16 से 18 जुलाई 2026 तक प्रतिदिन सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक आयोजित की जा रही है।

    कार्यशाला का उद्देश्य केवल सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं, बल्कि प्रतिभागियों को नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग (NGS) डेटा विश्लेषण की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर उन्हें भविष्य के शोध कार्यों के लिए सक्षम बनाना है। पहले ही दिन कार्यक्रम को शिक्षकों, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों, शोधार्थियों और विभिन्न संस्थानों से जुड़े प्रतिभागियों का उत्साहजनक प्रतिसाद मिला।

    आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान की सबसे उन्नत तकनीक पर मिला विशेषज्ञ प्रशिक्षण

    कार्यशाला में प्रतिभागियों को आधुनिक जीनोमिक अनुसंधान की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक NGS Data Analysis का विस्तृत प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह तकनीक आज कैंसर अनुसंधान, आनुवंशिक रोगों की पहचान, व्यक्तिगत चिकित्सा (Personalized Medicine), संक्रमणजनित रोगों की जांच और दवा विकास जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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    कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को बताया गया कि किस प्रकार बड़ी मात्रा में प्राप्त जीनोमिक डेटा का वैज्ञानिक विश्लेषण कर रोगों के कारणों, उपचार की नई संभावनाओं और भविष्य की चिकित्सा तकनीकों का विकास किया जा सकता है।

    17 वर्षों के अनुभव वाले विशेषज्ञ ने साझा किया ज्ञान

    इस कार्यशाला का संचालन डॉ. कलैरासन पोन्नुसामी, चिकित्सा अनुसंधान प्रभाग, एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, चेन्नई द्वारा किया जा रहा है। वे एक प्रतिष्ठित कम्प्यूटेशनल बायोलॉजिस्ट एवं बायोइन्फॉर्मेटिक्स विशेषज्ञ हैं, जिन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), जीनोमिक्स, संरचनात्मक जीव विज्ञान तथा बायोइन्फॉर्मेटिक्स के क्षेत्र में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने प्रतिभागियों को आधुनिक शोध तकनीकों के साथ-साथ वास्तविक शोध परियोजनाओं में डेटा विश्लेषण की चुनौतियों और उनके समाधान के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।

    पहले दिन प्रतिभागियों ने सीखी आधुनिक लैब तकनीकों की बारीकियां

    कार्यशाला के पहले दिन नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग तकनीक, RNA-Seq Workflow, Ubuntu Linux Installation, Linux Command Line, FastQC, MultiQC, डेटा क्वालिटी असेसमेंट तथा रीड ट्रिमिंग एवं प्री-प्रोसेसिंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। विशेष बात यह रही कि प्रतिभागियों को केवल व्याख्यान ही नहीं सुनाए गए, बल्कि उन्हें लाइव डेमो और Hands-on Session के माध्यम से स्वयं इन तकनीकों का अभ्यास भी कराया गया। इससे प्रतिभागियों को वास्तविक शोध कार्यों में इन तकनीकों के उपयोग को समझने का अवसर मिला।

    प्रश्नोत्तर सत्र ने बढ़ाया प्रतिभागियों का आत्मविश्वास

    कार्यक्रम के दौरान आयोजित इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र प्रतिभागियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इस दौरान शोधार्थियों एवं छात्रों ने NGS डेटा विश्लेषण, जीनोमिक्स और बायोइन्फॉर्मेटिक्स से जुड़े अनेक तकनीकी प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तारपूर्वक उत्तर दिया।

    प्रतिभागियों ने बताया कि इस प्रकार का व्यावहारिक प्रशिक्षण उनके शोध कार्यों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा और भविष्य में उन्हें उच्च स्तरीय अनुसंधान परियोजनाओं में बेहतर प्रदर्शन करने में सहायता करेगा।

    निदेशक डॉ. (ब्रिग) राकेश गुप्ता ने दिया प्रेरक संदेश

    कार्यक्रम के अवसर पर जीआईएमएस के निदेशक डॉ. (ब्रिग) राकेश गुप्ता ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है। शोधकर्ताओं को नवीनतम तकनीकों में व्यावहारिक दक्षता विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि NGS और Bioinformatics आने वाले वर्षों में चिकित्सा अनुसंधान की आधारशिला बनने जा रहे हैं। इसलिए युवा शोधकर्ताओं, चिकित्सकों और विद्यार्थियों को इन क्षेत्रों में विशेषज्ञता विकसित करनी चाहिए ताकि वे वैश्विक स्तर के अनुसंधान में प्रभावी योगदान दे सकें।

    अगले दो दिनों में होंगे उन्नत विषयों पर सत्र

    कार्यशाला के आगामी चरणों में प्रतिभागियों को और भी उन्नत विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। 17 जुलाई को RNA-Seq Data Processing तथा Differential Gene Expression Analysis पर विशेष सत्र आयोजित होंगे, जबकि 18 जुलाई को Functional Genomics और Biological Interpretation जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    अनुसंधान क्षमता निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है GIMS

    चिकित्सा अनुसंधान विभाग ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी इस प्रकार की कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और वैज्ञानिक गतिविधियों का आयोजन निरंतर किया जाएगा, ताकि शोधकर्ताओं को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर देश में उच्च गुणवत्ता वाले जैव चिकित्सा अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा सके।

    संस्थान का मानना है कि यदि शोधकर्ताओं को समय पर नवीनतम तकनीकों का प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, तो भारत वैश्विक चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में और अधिक मजबूत पहचान बना सकता है।

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