ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। ग्रेटर नोएडा के लाखों सेक्टरवासियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अब शहर की सड़कों के गड्ढे, खराब स्ट्रीट लाइटें, जाम, सफाई, ड्रेनेज, फॉगिंग, पार्कों का रखरखाव और आवारा कुत्तों जैसी समस्याएं केवल शिकायतों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि उनके समाधान के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) एक साझा मंच पर बैठकर नियमित रूप से समीक्षा करेंगे। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) एनजी रवि कुमार की पहल पर यह नई व्यवस्था लागू की गई है, जिसे शहर के बेहतर प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
प्राधिकरण की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार अब विभिन्न सेक्टरों के प्रतिनिधियों और प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच नियमित बैठकें आयोजित होंगी। इन बैठकों में प्राप्त शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाएगा और प्रत्येक कार्य की निगरानी भी की जाएगी। इस नई व्यवस्था से सेक्टरवासियों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

शनिवार को हुई पहली बैठक, कई अहम मुद्दों पर बनी रणनीति
इस नई पहल के तहत शनिवार को पहली बैठक आयोजित की गई। बैठक दो चरणों में हुई, जिसमें फेडरेशन ऑफ RWA, नेफोवा और नेफोमा के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता प्राधिकरण के प्रधान महाप्रबंधक संदीप चंद्रा ने की। इस दौरान महाप्रबंधक ए.के. सिंह, उप महाप्रबंधक विजय कुमार रावल, विभिन्न वर्क सर्किलों के वरिष्ठ प्रबंधक, उद्यान विभाग, जल एवं सीवर विभाग तथा विद्युत अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारी भी उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य सेक्टरों में लंबे समय से लंबित समस्याओं की पहचान करना और उनके समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करना था। अधिकारियों ने सभी प्रतिनिधियों से खुलकर सुझाव मांगे और भरोसा दिलाया कि समस्याओं का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
सड़क, सफाई और स्ट्रीट लाइट बनी प्रमुख चिंता
बैठक में सबसे अधिक चर्चा शहर की आधारभूत सुविधाओं को लेकर हुई। RWA प्रतिनिधियों ने बताया कि कई सेक्टरों में सड़कें क्षतिग्रस्त हैं, नालियों की नियमित सफाई नहीं हो रही है और बड़ी संख्या में स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं, जिससे रात के समय लोगों को परेशानी और सुरक्षा संबंधी चिंता का सामना करना पड़ता है। फेडरेशन के अध्यक्ष देवेंद्र टाइगर, आलोक नागर और अन्य पदाधिकारियों ने खराब विद्युत पोलों की मरम्मत, नियमित कूड़ा उठान, ग्रीन बेल्ट की सफाई और सेक्टरों में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने की मांग रखी। अधिकारियों ने इन सभी समस्याओं का शीघ्र समाधान कराने का आश्वासन दिया।

आवारा कुत्तों की समस्या पर भी गंभीर चर्चा
बैठक में शहर में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या भी प्रमुख मुद्दा रही। RWA प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि निर्धारित स्थानों पर डॉग फीडिंग पॉइंट विकसित किए जाएं, ताकि अनियंत्रित स्थानों पर भोजन कराने से उत्पन्न होने वाली समस्याओं को कम किया जा सके। प्रधान महाप्रबंधक संदीप चंद्रा, और DGM विजय रावल ने संबंधित विभाग को निर्देश दिए कि RWA और अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के साथ समन्वय स्थापित कर उपयुक्त स्थानों का चयन किया जाए और व्यवस्थित डॉग फीडिंग पॉइंट विकसित किए जाएं।
फॉगिंग से लेकर पार्कों की देखरेख तक होगी निगरानी
प्राधिकरण ने बैठक में एक नई व्यवस्था की भी घोषणा की। अब फॉगिंग, सफाई, पेड़ों की छंटाई और अन्य विकास कार्यों के पूरा होने के बाद संबंधित सेक्टर के प्रतिनिधियों या निवासियों से हस्ताक्षर कराए जाएंगे, ताकि कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा सेक्टरों के पार्कों की नियमित साफ-सफाई, हरियाली के संरक्षण और अनुरक्षण कार्यों को भी प्राथमिकता देने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट की समस्याओं पर भी हुई अलग बैठक
शनिवार को ही नेफोमा और नेफोवा के प्रतिनिधियों के साथ अलग बैठक आयोजित की गई। इसमें नेफोमा अध्यक्ष अन्नू खान, उपाध्यक्ष देवेंद्र चौधरी और रश्मि पांडेय सहित अन्य प्रतिनिधियों ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट की प्रमुख समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं। प्रतिनिधियों ने क्षेत्र में बढ़ते ट्रैफिक जाम, टूटी हुई सड़कों, अतिक्रमण, अव्यवस्थित यातायात और अन्य नागरिक समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। प्राधिकरण के अधिकारियों ने इन समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने का भरोसा दिलाया और कहा कि संबंधित विभागों को तत्काल आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे।

सीईओ की पहल से बढ़ी उम्मीदें
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार की इस पहल को शहर के नागरिकों और RWA संगठनों ने सकारात्मक कदम बताया है। उनका मानना है कि यदि इस प्रकार की नियमित बैठकें लगातार होती रहीं और लिए गए निर्णयों का समयबद्ध पालन सुनिश्चित किया गया, तो शहर की अधिकांश नागरिक समस्याओं का समाधान तेजी से संभव होगा।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि प्रशासन और नागरिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय ही किसी स्मार्ट सिटी की सबसे बड़ी पहचान होता है। इस नई व्यवस्था से न केवल शिकायतों का त्वरित समाधान होगा, बल्कि शहर के विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। ग्रेटर नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में यह पहल नागरिक सहभागिता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बैठकों में लिए गए निर्णय कितनी तेजी से जमीन पर दिखाई देते हैं।

