गाजियाबाद, द न्यूज क्लिक। किआ इंडिया ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में अपनी प्रमुख कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) पहल प्रोजेक्ट D.R.O.P. (Develop Responsible Outlook for Plastic) के चौथे चरण का विस्तार करते हुए गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में जमीनी स्तर पर अभियान की शुरुआत की है। यह पहल इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन (IPCA) के सहयोग से संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य प्लास्टिक कचरे के जिम्मेदार प्रबंधन के साथ-साथ उसके संग्रहण, रीसाइक्लिंग और निपटान को व्यवस्थित करना तथा लोगों में जागरूकता बढ़ाना है।
किआ इंडिया के अनुसार, प्रोजेक्ट D.R.O.P. के नए चरण में स्थानीय समुदायों को अभियान से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके तहत नागरिक निकायों, शिक्षण संस्थानों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA), कचरा प्रबंधन से जुड़े लोगों और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी के माध्यम से प्लास्टिक कचरे के बेहतर प्रबंधन की व्यवस्था विकसित की जा रही है।
गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में जमीनी स्तर पर शुरुआत
प्रोजेक्ट के विस्तार के तहत गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। गाजियाबाद में आयोजित कार्यक्रम में वसुंधरा वार्ड-61 की पार्षद श्रीमती शिल्पा चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। वहीं गाजियाबाद नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार सम्मानित अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में एमिटी इंटरनेशनल स्कूल, वसुंधरा की प्रिंसिपल सुश्री सुनीला अठले और IPCA की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. राधा गोयल समेत अन्य प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान प्लास्टिक कचरे के उचित संग्रहण और उसके रीसाइक्लिंग की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
वहीं ग्रेटर नोएडा में आयोजित कार्यक्रम में ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (GNIDA) के जनरल मैनेजर श्री आलोक कुमार मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम में IPCA के सचिव श्री अजय गर्ग, IPCA की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. राधा गोयल, GNIDA के वरिष्ठ अधिकारी, आरडब्ल्यूए प्रतिनिधि, शिक्षण संस्थानों और स्थानीय समुदाय से जुड़े लोग मौजूद रहे।
कम्युनिटी बिन और कलेक्शन वाहनों की शुरुआत
अभियान के तहत दोनों शहरों में D.R.O.P. कम्युनिटी बिन लगाए गए। इसके साथ ही प्लास्टिक कचरे के व्यवस्थित संग्रहण के लिए D.R.O.P. कलेक्शन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य लोगों को प्लास्टिक कचरे को सामान्य कचरे से अलग करने और उसे निर्धारित संग्रहण केंद्रों तक पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके बाद एकत्रित प्लास्टिक कचरे को रीसाइक्लिंग प्रक्रिया के लिए भेजा जाएगा। कंपनी का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था से प्लास्टिक कचरे को खुले में फेंके जाने या अनुचित तरीके से निपटाए जाने की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही स्थानीय स्तर पर लोगों को यह समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि प्लास्टिक कचरे का जिम्मेदार प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
नुक्कड़ नाटक के जरिए दिया जागरूकता संदेश
अभियान में केवल कचरा संग्रहण तक सीमित रहने के बजाय जन-जागरूकता को भी प्रमुख हिस्सा बनाया गया है। कार्यक्रमों के दौरान पेशेवर कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से प्लास्टिक कचरे को खुले में फेंकने, उसका गलत तरीके से निपटान करने और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को सरल एवं प्रभावी तरीके से समझाया गया। छात्रों, स्थानीय निवासियों और समुदाय के लोगों को प्लास्टिक कचरे के जिम्मेदार निपटान के लिए सक्रिय भागीदारी करने का संदेश दिया गया। इस दौरान लोगों से अपील की गई कि वे घरों और संस्थानों से निकलने वाले प्लास्टिक कचरे को अलग रखें और उसे निर्धारित संग्रहण व्यवस्था के माध्यम से रीसाइक्लिंग के लिए भेजें।
अब कई शहरों तक पहुंचा प्रोजेक्ट D.R.O.P.
गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में विस्तार के साथ प्रोजेक्ट D.R.O.P. की पहुंच कई प्रमुख शहरों तक हो गई है। किआ इंडिया के अनुसार, यह पहल गुरुग्राम, बेंगलुरु, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, मुंबई, चंडीगढ़, पंचकूला, जीरकपुर, दिल्ली, नोएडा, अंबाला और गाजियाबाद-ग्रेटर नोएडा सहित विभिन्न शहरों में अपनी गतिविधियां संचालित कर रही है। इस विस्तार का उद्देश्य अलग-अलग शहरों में स्थानीय जरूरतों के अनुरूप प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के लिए समुदाय आधारित मॉडल को मजबूत करना है।
समुदाय की भागीदारी पर विशेष जोर
प्रोजेक्ट D.R.O.P. के चौथे चरण में किआ इंडिया और IPCA की ओर से समुदाय की भागीदारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है। कंपनी के अनुसार, प्लास्टिक प्रदूषण जैसी चुनौती से निपटने के लिए केवल प्रशासन या किसी एक संस्था के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसमें स्थानीय नागरिकों, शिक्षण संस्थानों, निकायों और कचरा प्रबंधन से जुड़े लोगों की संयुक्त भूमिका जरूरी है। इसी सोच के तहत अभियान में स्कूलों और स्थानीय समुदायों को जोड़ा जा रहा है, ताकि प्लास्टिक कचरे के सही संग्रहण और रीसाइक्लिंग की आदत को जमीनी स्तर पर बढ़ावा दिया जा सके।
किआ इंडिया की यह पहल जागरूकता, सामुदायिक भागीदारी और स्थानीय निकायों के साथ सहयोग के जरिए प्लास्टिक कचरा प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे NCR शहरों में इस तरह की पहल का विस्तार स्थानीय स्तर पर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

