प्रतापगढ़ के छोटे से गांव सिंघनी कंजास से निकले क्रिकेटर ने मानसून कप में 121 रन की पारी खेलकर पूरा किया शतकों का शतक;
ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक । प्रतापगढ़ जिले के छोटे से गांव सिंघनी कंजास से क्रिकेट का सपना लेकर निकले प्रवीण प्रतापगढ़ ने अपने प्रदर्शन से क्रिकेट की दुनिया में खास पहचान बनाई है। लगातार शानदार बल्लेबाजी कर रहे प्रवीण ने अब अपने करियर में 100 शतक पूरे करने का दावा किया है। मानसून कप में हरे कृष्णा टू क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए मुकाबले में प्रवीण ने शानदार 121 रन की पारी खेलकर शतकों का शतक पूरा किया।
प्रवीण के मुताबिक, यह उपलब्धि उन्होंने महज 608 मैचों में हासिल की है। इसी के साथ उन्होंने उत्तर प्रदेश के खिलाड़ी आशुतोष द्विवेदी के 1300 मैचों में 100 शतक पूरे करने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने का दावा किया है। इस हिसाब से प्रवीण ने 100 शतक का आंकड़ा 692 मैच पहले हासिल किया।
100 शतक तक पहुंचने का सफर
क्रिकेट में किसी बल्लेबाज के लिए 100 शतक का आंकड़ा अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जाता है। प्रवीण की खासियत यह है कि उन्होंने इस मुकाम तक पहुंचने के साथ-साथ कई विस्फोटक पारियां भी खेली हैं। 121 रन की ताजा पारी के साथ उनके करियर में शतकों की संख्या 100 तक पहुंच गई। उनकी इस उपलब्धि की चर्चा अब प्रतापगढ़ से लेकर ग्रेटर नोएडा तक क्रिकेट प्रेमियों के बीच हो रही है। खासतौर पर स्थानीय स्तर पर लगातार क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ियों के लिए प्रवीण का सफर प्रेरणा का विषय बन रहा है।
293 रन की पारी भी रिकॉर्ड बुक में
प्रवीण प्रतापगढ़ के नाम केवल शतकों का आंकड़ा ही खास नहीं है। करीब डेढ़ वर्ष पहले नोएडा कप के एक टी-20 मुकाबले में उन्होंने 293 रनों की विस्फोटक पारी खेली थी। उनकी इस पारी की बदौलत टीम ने 484 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था।न293 रन की यह पारी प्रवीण की आक्रामक बल्लेबाजी का उदाहरण मानी जाती है। बड़ी पारियां खेलने के साथ-साथ तेज गति से रन बनाने की क्षमता उनकी बल्लेबाजी की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है।
9 गेंद में अर्धशतक और 20 गेंद में शतक का दावा
प्रवीण की बल्लेबाजी में पावर हिटिंग और आक्रामक अंदाज भी देखने को मिलता है। उनके नाम 9 गेंदों में अर्धशतक और 20 गेंदों में शतक पूरा करने का दावा भी किया जाता है। तेज शुरुआत से लेकर बड़ी पारियां खेलने तक, प्रवीण ने स्थानीय क्रिकेट में अपनी अलग बल्लेबाजी शैली विकसित की है। उनके खेल में तेजी और आक्रामकता का यह अंदाज उन्हें दूसरे खिलाड़ियों से अलग पहचान देता है।
गांव की गलियों से शुरू हुआ क्रिकेट का सफर
प्रवीण की क्रिकेट यात्रा किसी बड़े क्रिकेट अकादमी से नहीं, बल्कि उनके गांव सिंघनी कंजास से शुरू हुई। श्री कृष्ण प्रसाद मिश्रा के बेटे प्रवीण को बचपन से ही क्रिकेट में गहरी रुचि थी। उनके बड़े भाई विनय मिश्रा भी अपने समय में जिले के प्रमुख क्रिकेट खिलाड़ियों में शामिल रहे। विनय ने बचपन में प्रवीण की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें क्रिकेट की शुरुआती बारीकियां सिखाईं।
परिवार से मिले प्रोत्साहन और लगातार अभ्यास ने प्रवीण के क्रिकेट सफर को आगे बढ़ाया। गांव में शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे बड़े क्रिकेट मैदानों तक पहुंचता गया और अब रिकॉर्ड्स तक जा पहुंचा है।
ग्रेटर नोएडा में जारी है क्रिकेट की तैयारी
वर्तमान में प्रवीण प्रतापगढ़ ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-1 स्थित Ace Divino Society में रहते हैं। यहां रहते हुए वह लगातार क्रिकेट अभ्यास और प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहे हैं। 100वां शतक पूरा होने के बाद सोसाइटी के साथी खिलाड़ियों और क्रिकेट प्रेमियों में भी उत्साह है। स्थानीय स्तर पर प्रवीण की उपलब्धि को लेकर उन्हें बधाई देने का सिलसिला जारी है।
प्रतापगढ़ के गांव से ग्रेटर नोएडा तक का उनका सफर इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय स्तर पर लगातार मेहनत और प्रतियोगिताओं में सक्रिय भागीदारी के जरिए खिलाड़ी अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।
Southern Street Premier League में भी चयन
प्रवीण के लगातार प्रदर्शन का असर उनके क्रिकेट करियर के अगले पड़ाव पर भी दिखाई दे रहा है। हाल ही में उनका चयन Southern Street Premier League के लिए हुआ है। लीग का फाइनल राउंड चेन्नई में आयोजित किया गया था।
इस चयन को प्रवीण के क्रिकेट सफर में महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। स्थानीय क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के बाद अब उनका लक्ष्य बड़े मंचों पर अपनी बल्लेबाजी का प्रभाव छोड़ना है।
सिंघनी कंजास से 100 शतक तक का सफर
प्रवीण प्रतापगढ़ की कहानी सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है। यह उस खिलाड़ी के संघर्ष और जुनून की कहानी है, जिसने एक छोटे से गांव से क्रिकेट का सपना देखा और लगातार मैदान पर उतरकर अपनी पहचान बनाई।
उनके बताए रिकॉर्ड और उपलब्धियों में 608 मैचों में 100 शतक, 293 रन की व्यक्तिगत पारी, 484 रन का टीम स्कोर, 9 गेंदों में अर्धशतक और 20 गेंदों में शतक प्रमुख हैं।
100वां शतक पूरा करने के बाद प्रवीण प्रतापगढ़ की नजर अब अगले लक्ष्य पर है। प्रतापगढ़ के सिंघनी कंजास से शुरू हुआ उनका क्रिकेट सफर आज ग्रेटर नोएडा तक पहुंच चुका है और लगातार नए रिकॉर्ड बनाने की कोशिश जारी है।
गांव की गलियों से क्रिकेट के बड़े मैदान तक—प्रवीण प्रतापगढ़ ने 100 शतकों के साथ अपने सफर में एक और बड़ा अध्याय जोड़ दिया है।

