ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। समसारा द वर्ल्ड एकेडमी में 15 सितंबर 2026 को भूटान से आए 40 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का शैक्षिक भ्रमण आयोजित किया गया। भ्रमण के दौरान भूटान के प्रतिनिधियों और विद्यालय के शिक्षकों के बीच शिक्षण-अधिगम की आधुनिक पद्धतियों, शैक्षणिक नेतृत्व तथा विद्यालयी अभ्यासों को लेकर व्यापक संवाद हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य दोनों देशों के शिक्षकों के बीच अनुभव और ज्ञान का आदान-प्रदान करते हुए अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक सहयोग को बढ़ावा देना रहा।
विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. शालिनी प्रसाद और अकादमिक समन्वयक सुश्री शिप्रा गर्ग के नेतृत्व में आयोजित शैक्षिक सत्रों में विद्यालयी शिक्षा के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई। इनमें अनुदेशात्मक नेतृत्व एवं विद्यालयी अभ्यास, शिक्षण-अधिगम एवं मूल्यांकन पद्धतियां, STEM शिक्षा तथा मेटाकॉग्निशन जैसे विषय प्रमुख रहे। प्रतिनिधियों ने विशेष रूप से यह समझने में रुचि दिखाई कि आधुनिक शैक्षणिक अवधारणाओं को कक्षा शिक्षण में किस प्रकार प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिनिधिमंडल को विद्यालय की विभिन्न प्रयोगशालाओं का भ्रमण भी कराया गया। प्रतिनिधियों ने STEM लैब, गणित लैब, कंप्यूटर लैब और सामाजिक विज्ञान लैब का अवलोकन किया। इस दौरान उन्हें विद्यार्थियों के सीखने की प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक, प्रयोगात्मक और अनुभव-आधारित बनाने के लिए अपनाए जा रहे विभिन्न तरीकों की जानकारी दी गई।
विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, प्रयोगशालाओं का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उन्हें गतिविधियों, प्रयोगों और वास्तविक जीवन से जुड़े अनुभवों के माध्यम से सीखने के अवसर उपलब्ध कराना है। प्रतिनिधिमंडल ने विद्यालय के इस नवाचारी एवं अनुभवात्मक शिक्षण दृष्टिकोण को करीब से समझा और विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों पर चर्चा की।

भूटान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व श्री नोरबू गेल्तशेन और सुश्री फुब डेम ने किया। दोनों प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों ने समसारा द वर्ल्ड एकेडमी की ओर से किए गए आत्मीय स्वागत और आतिथ्य की सराहना की। उन्होंने विद्यालय द्वारा शैक्षिक संवाद और अनुभव साझा करने के लिए उपलब्ध कराए गए अवसर को महत्वपूर्ण बताया।
भ्रमण का प्रमुख आकर्षण भूटान और समसारा के शिक्षकों के बीच शिक्षण पद्धतियों एवं शैक्षणिक अभ्यासों का प्रत्यक्ष आदान-प्रदान रहा। संवाद के दौरान शिक्षकों ने अपने-अपने विद्यालयों में अपनाई जा रही प्रक्रियाओं, कक्षा प्रबंधन, मूल्यांकन तथा विद्यार्थियों में आलोचनात्मक और रचनात्मक सोच विकसित करने के तरीकों को साझा किया।
विद्यालय की ओर से कहा गया कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक आदान-प्रदान कार्यक्रम शिक्षकों को अलग-अलग शिक्षा प्रणालियों को समझने और उनसे सीखने का अवसर देते हैं। इससे न केवल नए विचारों और शिक्षण पद्धतियों का परिचय होता है, बल्कि विद्यार्थियों की शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नए दृष्टिकोण विकसित करने में भी मदद मिलती है।
भूटान के प्रतिनिधिमंडल का यह भ्रमण ज्ञान के निरंतर आदान-प्रदान, आपसी सहयोग और शैक्षिक उत्कृष्टता की साझा दृष्टि के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम ने भारत और भूटान के शिक्षकों के बीच शैक्षणिक संवाद को आगे बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

