RWA का दावा—पुराने मकानों की काल्पनिक निर्माण लागत के आधार पर भेजे जा रहे लाखों रुपये के नोटिस
नोएडा, द न्यूज क्लिक। नोएडा के सेक्टर-105 में निवासियों को भेजे जा रहे निर्माण उपकर यानी लेबर सेस के नोटिसों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। भारी-भरकम नोटिसों को लेकर सेक्टर के निवासियों में असंतोष जताते हुए RWA ने मामले में जिलाधिकारी गौतम बुद्ध नगर मेधा रूपम से हस्तक्षेप की मांग की है। RWA सेक्टर-105 के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने जिलाधिकारी को पत्र सौंपकर नोटिसों की प्रक्रिया की समीक्षा कराने और निवासियों को राहत देने की मांग की है।
RWA अध्यक्ष का आरोप है कि कार्यालय उपकर निर्धारण अधिकारी एवं उप श्रमायुक्त, सेक्टर-3, नोएडा की ओर से वर्ष 2017-18 के कथित GIS सर्वे के आधार पर मकानों की निर्माण लागत निर्धारित की गई है। RWA का कहना है कि कई मामलों में बिना मौके पर भौतिक सत्यापन किए पुराने निर्मित मकानों के आधार पर उपकर की राशि निर्धारित कर नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
लाखों की निर्माण लागत के आधार पर हजारों रुपये के नोटिस
RWA की ओर से जिलाधिकारी को दिए गए पत्र में कुछ मामलों का उदाहरण भी दिया गया है। RWA के अनुसार, श्रीमती कमलेश गुप्ता, मकान संख्या B-235, को पत्रांक 12065/26 के तहत 94.50 लाख रुपये की निर्माण लागत के आधार पर 94,500.03 रुपये का नोटिस भेजा गया है।।इसी तरह RWA के मुताबिक श्री जमील अहमद, मकान संख्या B-270, को 86,351 रुपये और श्री जय चंद एस., मकान संख्या B-229, को 11,886 रुपये के नोटिस जारी किए गए हैं। RWA ने इन आकलनों की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए प्रत्येक मामले में वास्तविक निर्माण और देयता का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है।

ब्याज और पेनल्टी को लेकर भी RWA ने उठाए सवाल
RWA अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय का कहना है कि नोटिसों में बकाया राशि के साथ ब्याज और पेनल्टी का प्रावधान भी बताया जा रहा है। RWA के अनुसार, कुछ मामलों में 2 प्रतिशत प्रतिमाह ब्याज और 100 प्रतिशत तक पेनल्टी की चेतावनी से निवासियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ रहा है। RWA ने यह भी सवाल उठाया है कि जिन मकानों का निर्माण कई वर्ष पहले पूरा हो चुका है, उनसे अब इस तरह की देनदारी निर्धारित करने की प्रक्रिया का आधार क्या है। हालांकि, इन कानूनी दावों और नोटिसों की वैधता पर अंतिम स्थिति संबंधित विभाग के रिकॉर्ड और लागू कानूनों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
निर्माण के समय उपकर लेने की RWA की मांग
दिव्य कृष्णात्रेय ने कहा कि RWA का मानना है कि यदि किसी निर्माण पर उपकर देय था तो उसकी प्रक्रिया निर्माण के समय पूरी की जानी चाहिए थी। उन्होंने नोएडा प्राधिकरण के नियमों और संबंधित लीज डीड में इस तरह के उपकर के स्पष्ट उल्लेख को लेकर भी सवाल उठाए हैं। RWA का कहना है कि सेक्टर में ऐसे कई निवासी हैं जो वर्षों पहले अपने मकानों का निर्माण पूरा कर चुके हैं। ऐसे में अचानक पुराने निर्माणों के आधार पर आर्थिक देनदारी सामने आने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों और सेवानिवृत्त लोगों पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव को देखते हुए RWA ने प्रशासन से मामले की गंभीरता से जांच कराने का अनुरोध किया है।
जिलाधिकारी से नोटिसों की समीक्षा और भौतिक सत्यापन की मांग
RWA ने जिलाधिकारी मेधा रूपम से मांग की है कि सेक्टर-105 के निवासियों को जारी नोटिसों की प्रक्रिया की समीक्षा कराई जाए और जब तक वास्तविक देनदारी स्पष्ट न हो, तब तक वसूली की कार्रवाई पर रोक लगाने पर विचार किया जाए। इसके साथ ही प्रत्येक संपत्ति का भौतिक सत्यापन कर वास्तविक निर्माण स्थिति और लागू नियमों के आधार पर उपकर का निर्धारण कराने की मांग की गई है।।दिव्य कृष्णात्रेय ने कहा कि RWA सेक्टर के निवासियों के हितों और अधिकारों को लेकर संबंधित अधिकारियों के समक्ष मामला उठाती रहेगी। उनका कहना है कि RWA का उद्देश्य किसी विभागीय प्रक्रिया का विरोध करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि निवासियों पर लगाई गई देनदारी पारदर्शी प्रक्रिया, वास्तविक तथ्यों और लागू नियमों के आधार पर तय हो।
अब इस मामले में प्रशासन और श्रम विभाग की ओर से नोटिसों की प्रक्रिया, निर्माण लागत के आकलन और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर क्या स्थिति स्पष्ट की जाती है, इस पर सेक्टर के निवासियों की नजर रहेगी।

