ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में किसानों की लंबित मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच बुधवार, 16 सितंबर 2026 को किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत यमुना प्राधिकरण पहुंचे। करीब दोपहर 2 बजे किसानों के जत्थे के साथ प्राधिकरण पहुंचे टिकैत ने सबसे पहले धरनास्थल पर मौजूद किसानों से बातचीत की और उनकी समस्याओं तथा मांगों की जानकारी ली।
राकेश टिकैत के पहुंचने के बाद आंदोलन को लेकर गतिविधियां तेज हुईं। किसानों के साथ बातचीत के बाद यमुना प्राधिकरण के CEO राकेश कुमार सिंह ने राकेश टिकैत और भाकियू के प्रमुख नेताओं को बोर्ड रूम में वार्ता के लिए आमंत्रित किया। इसके बाद किसानों की 15 सूत्रीय मांगों को लेकर अधिकारियों और किसान नेताओं के बीच लंबी बैठक शुरू हुई। उपलब्ध रिपोर्टों में भी 16 सितंबर को यमुना प्राधिकरण के बाहर किसानों के अनिश्चितकालीन धरने और राकेश टिकैत के नेतृत्व में आंदोलन जारी रहने की पुष्टि होती है।
CEO के साथ बोर्ड रूम में हुई मैराथन बैठक
बैठक में किसानों की जमीन, मुआवजा, आबादी, लीज-बैक और रोजगार सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। किसान नेताओं का कहना है कि कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं और पूर्व में हुई बैठकों में उन्हें समाधान का आश्वासन दिया जाता रहा है। भाकियू के राष्ट्रीय महामंत्री पवन खटाना ने किसानों का पक्ष रखते हुए कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। किसान नेताओं के मुताबिक, जब तक 15 सूत्रीय मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
किसानों की मांगों को लेकर पिछले दिनों भी पैदल मार्च और आंदोलन की तैयारियों की रिपोर्ट सामने आई थी। विभिन्न किसान संगठनों ने भूमि अधिग्रहण, विकसित भूखंड, मुआवजा और पुनर्वास से जुड़े मुद्दे उठाए हैं।
किसानों की प्रमुख मांगें
किसान नेताओं की ओर से उठाई जा रही प्रमुख मांगों में—
- भूमि अधिग्रहण के एवज में 10 प्रतिशत विकसित भूखंड दिया जाए।
- आबादी से जुड़े मामलों और लंबित लीज-बैक प्रकरणों का निस्तारण किया जाए।
- किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा बढ़ी हुई दर से दिया जाए।
- किसानों के बच्चों को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
- किसानों के अनुसार लंबे समय से लंबित सर्किल रेट में वृद्धि की जाए।
- मुआवजे का निर्धारण उचित बाजार दर को ध्यान में रखकर किया जाए।
- किसानों की ओर से 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून को लागू करने की मांग भी उठाई जा रही है। इन मांगों के अलावा किसान जमीन अधिग्रहण के बाद आबादी, पुनर्वास और रोजगार से जुड़े लंबित मामलों के समाधान की मांग कर रहे हैं। ऐसी ही मांगों में 10 प्रतिशत विकसित भूखंड, आबादी निस्तारण और लीज-बैक के मामलों का समाधान प्रमुख रूप से सामने आया है।
टिकैत बोले- मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा धरना
बैठक के बाद बाहर आए राकेश टिकैत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अब प्राधिकरण अधिकारियों के साथ बातचीत शुरू हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि किसान और अधिकारी बैठकर सभी 15 मांगों पर समाधान निकालेंगे।।टिकैत के मुताबिक, जब तक किसानों की सभी 15 मांगों का समाधान नहीं होता, तब तक धरना जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत की प्रक्रिया शुरू होना किसानों के लिए महत्वपूर्ण है और अब मांगों पर ठोस निर्णय की अपेक्षा है।
बड़ी संख्या में किसान और भाकियू पदाधिकारी मौजूद
धरने और वार्ता के दौरान भाकियू से जुड़े कई पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। इनमें मथुरा जिला अध्यक्ष मीरा सिंह, आशु शर्मा, आगरा मंडल अध्यक्ष युवा विपिन यादव, मटरू नागर, अजीत अधाना, बलजीत नागर, राजे प्रधान, रॉबिन नागर, भगत सिंह प्रधान, प्रकाश फौजी, राकेश खाजपुर, बेली भाटी, ललित चौहान, अमित डैढा, विकास भाटी, राकेश नंबरदार, जगत प्रधान, अमित जैलदार, अरविंद लोहिया, अजय भाटी, अविनाश तंवर, नरेंद्र कसाना, मोहित कसाना, रविंद्र नागर, प्रताप नागर, आनंद चौधरी, प्रवीण शर्मा, श्याम सिंह, प्रवीण चौधरी, विनोद राजपूत, अर्जुन सिंह, गोपाल शर्मा, महेश चंद शर्मा, राहुल भाटी, जितेंद्र बैरागी, गौरव बैरागी, जितें गुर्जर और सोनू कसाना समेत अन्य लोग शामिल रहे।
बैठक के नतीजे पर किसानों की नजर
यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में किसानों का आंदोलन फिलहाल जारी है। तीनों विकास प्राधिकरणों से जुड़ी किसानों की मांगों को लेकर 14 सितंबर से आंदोलनात्मक गतिविधियां तेज हुई हैं और 15-16 सितंबर को धरनों तथा वार्ताओं का सिलसिला जारी रहा।नअब किसानों की नजर CEO और अधिकारियों के साथ हुई बैठक में उठाए गए मुद्दों पर आगे होने वाली कार्रवाई पर है। किसानों की ओर से स्पष्ट किया गया है कि वे मांगों के ठोस समाधान की प्रतीक्षा करेंगे और समाधान होने तक धरना जारी रखेंगे।

