ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक । कैलाश इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंसेज, ग्रेटर नोएडा में 17 सितंबर 2026 को विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 2026 का आयोजन किया गया। इस वर्ष विश्व रोगी सुरक्षा दिवस की थीम “गैर-संचारी रोगों के लिए सुरक्षित देखभाल” तथा संदेश “जीवनभर सुरक्षित देखभाल” रखा गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और स्वास्थ्यकर्मियों को रोगी सुरक्षा के प्रति जागरूक करना तथा स्वास्थ्य सेवाओं में “शून्य हानि नर्सिंग” की संस्कृति को मजबूत करना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान की उप-प्रधानाचार्य के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि रोगी सुरक्षा गुणवत्तापूर्ण नर्सिंग देखभाल का अभिन्न हिस्सा है। स्वास्थ्यकर्मियों की सतर्कता, जिम्मेदारी और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन ऐसी कई घटनाओं को रोक सकता है, जिनसे मरीज को अनावश्यक नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। इसके बाद अतिथियों एवं विषय विशेषज्ञों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया। दीप प्रज्वलन को ज्ञान, विवेक, करुणा और सुरक्षित रोगी देखभाल के प्रति प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया।
सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं में संवाद और सतर्कता जरूरी
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में संस्थान की शैक्षणिक निदेशक डॉ. बिंदिया गोयल ने रोगी सुरक्षा और विश्व रोगी सुरक्षा दिवस के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने इस वर्ष की थीम की प्रासंगिकता बताते हुए कहा कि सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सतर्कता, प्रभावी संवाद, निर्धारित मानकों का पालन और रोगी-केंद्रित देखभाल बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को नैदानिक परिस्थितियों में छोटी से छोटी जानकारी को गंभीरता से लेने और निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए प्रेरित किया।
‘शून्य हानि नर्सिंग’ पर हुई चर्चा
द्वितीय सत्र में संस्थान की प्रधानाचार्या ने “शून्य हानि नर्सिंग” विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने सुरक्षित नर्सिंग प्रक्रियाओं, त्रुटियों की रोकथाम, नैदानिक उत्तरदायित्व, टीम भावना और गुणवत्ता मानकों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मरीज की सुरक्षा केवल किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरी स्वास्थ्य सेवा टीम की सामूहिक जिम्मेदारी है। नर्सिंग स्टाफ का मरीज के साथ निरंतर संपर्क होने के कारण उनकी भूमिका रोगी सुरक्षा में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है।
संक्रमण नियंत्रण और दवा सुरक्षा पर विशेषज्ञों ने साझा किया अनुभव
कार्यक्रम के तृतीय सत्र में यशोदा सुपर हॉस्पिटल एंड कैंसर इंस्टीट्यूट, गाजियाबाद की नर्सिंग अधीक्षक सुश्री रुपिंदर कौर ने अपने नैदानिक एवं प्रशासनिक अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किए। उन्होंने संक्रमण की रोकथाम, दवा सुरक्षा, प्रभावी नैदानिक संवाद, जोखिम की पहचान और सुरक्षित नर्सिंग प्रक्रियाओं से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर जानकारी दी। इसके अलावा संभावित रोगी हानि की रोकथाम पर भी विशेष चर्चा हुई। वक्ताओं ने दवा संबंधी त्रुटियों को रोकने, नैदानिक कार्यों में व्यक्तिगत उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने और मरीज की सुरक्षा को प्रत्येक स्तर पर प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई।
विशेषज्ञों को प्रमाण-पत्र देकर किया सम्मानित
इस अवसर पर संस्थान के प्रबंध निदेशक श्री संदीप गोयल ने सभी विषय विशेषज्ञों, आयोजकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों को शुभकामनाएं एवं धन्यवाद दिया। उन्होंने कार्यक्रम में सभी की सक्रिय भागीदारी और योगदान की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान विषय विशेषज्ञों को उनके बहुमूल्य योगदान, विशेषज्ञता तथा रोगी सुरक्षा एवं व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
समापन सत्र में उप-प्रधानाचार्य ने सभी अतिथियों, विषय विशेषज्ञों, आयोजकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि सुरक्षित रोगी देखभाल केवल प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिम्मेदार व्यवहार, सतर्क अभ्यास, प्रभावी संवाद और “किसी को हानि न पहुंचाने” की प्रतिबद्धता से शुरू होती है। विद्यार्थियों और प्रतिभागियों ने इन सिद्धांतों को कक्षा से लेकर नैदानिक अभ्यास तक अपनाने तथा “शून्य हानि” और “जीवनभर सुरक्षित देखभाल” की संस्कृति को मजबूत करने का संकल्प लिया।

