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Monday, June 1, 2026
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    Breaking News : “हरियाली पर बुलडोज़र या बिल्डर राज?” — डेल्टा-1 की ग्रीन बेल्ट बचाने सड़क से मंत्री दरबार तक पहुँचे लोग, RWA बोली- ‘पेड़ काटकर कब्जा, अब पूरी हरित पट्टी पर खतरा’, ग्रीन बेल्ट पर कथित कब्जे को लेकर भड़के सेक्टरवासी, मंत्री नंद गोपाल नंदी से लगाई गुहार

    ‘बचाइए हमारी सांसें, नहीं तो कंक्रीट में बदल जाएगी हरियाली’, “ग्रीन बेल्ट नहीं बची तो खत्म हो जाएगी सेक्टर की पहचान”

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    ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर डेल्टा-1 में ग्रीन बेल्ट को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसने सेक्टरवासियों की चिंता बढ़ा दी है। हरियाली और पर्यावरण संरक्षण की लड़ाई अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रही, बल्कि मामला सीधे उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री तक पहुंच गया है। सेक्टर डेल्टा-1 की आरडब्ल्यूए (रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन) ने उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल नंदी से मुलाकात कर कावेरी बिल्डर के खिलाफ गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि बिल्डर द्वारा नियमों को ताक पर रखकर सेक्टर की ग्रीन बेल्ट पर कब्जा किया जा रहा है और इस दौरान वर्षों पुराने पेड़ों को भी काट दिया गया।

    “ग्रीन बेल्ट नहीं बची तो खत्म हो जाएगी सेक्टर की पहचान”

    आरडब्ल्यूए सदस्यों ने मंत्री को दिए ज्ञापन में कहा कि सेक्टर डेल्टा-1 के गेट नंबर-04 के पास स्थित ग्रीन बेल्ट, जो वर्षों से सेक्टरवासियों के लिए हरियाली और स्वच्छ वातावरण का प्रमुख स्रोत रही है, अब बिल्डर के कब्जे की जद में है। आरोप लगाया गया कि कावेरी बिल्डर ने लगभग 80 मीटर लंबी ग्रीन बेल्ट पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है और कब्जे की कार्रवाई के दौरान कई पुराने पेड़ों को काट दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि सेक्टर के पर्यावरण, बच्चों के भविष्य और नागरिकों के स्वास्थ्य का मुद्दा है। सेक्टरवासियों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में पूरी ग्रीन बेल्ट कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो सकती है।

    “पहले पेड़ कटे, अब पूरी जमीन पर नजर” — RWA का आरोप

    आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों ने दावा किया कि बिल्डर की नजर केवल कब्जाई गई जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि वह आसपास की अन्य ग्रीन बेल्ट को भी अपने प्रोजेक्ट में शामिल करने की कोशिश कर रहा है। लोगों का आरोप है कि धीरे-धीरे हरित क्षेत्र को खत्म कर व्यावसायिक और निर्माण गतिविधियों के लिए जमीन तैयार की जा रही है।
    RWA का कहना है कि सेक्टर की ग्रीन बेल्ट केवल सौंदर्य का हिस्सा नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है। यहां सुबह-शाम टहलने वाले बुजुर्ग, खेलने वाले बच्चे और योग करने वाले नागरिक बड़ी संख्या में आते हैं। ऐसे में ग्रीन बेल्ट खत्म होने का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य और जीवनशैली पर पड़ेगा।

    प्राधिकरण पर भी उठे सवाल, “आश्वासन मिला लेकिन कार्रवाई नहीं”

    आरडब्ल्यूए सदस्यों ने मंत्री को बताया कि इस मुद्दे को लेकर वे पहले भी कई बार ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों से मिल चुके हैं। सेक्टरवासियों ने फेडरेशन के नेतृत्व में प्राधिकरण कार्यालय पर प्रदर्शन भी किया था।

    ज्ञापन में बताया गया कि इस संबंध में—विशेष कार्याधिकारी गिरीश झा, विधायक तेजपाल नागर, मुख्य कार्यपालक अधिकारी एनजी रवि कुमार, अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी वीएस लक्ष्मी से मुलाकात कर अवैध कब्जा हटाने और ग्रीन बेल्ट की सुरक्षा के लिए बाउंड्री वॉल बनवाने की मांग रखी गई थी। अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन भी दिया, लेकिन अब तक जमीन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे सेक्टरवासियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला और बड़ा आंदोलन बन सकता है।

    कैबिनेट मंत्री ने गंभीरता से सुनी शिकायत

    कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल नंदी से मुलाकात के दौरान आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों ने पूरे मामले की जानकारी विस्तार से दी। मंत्री ने सेक्टरवासियों की शिकायत को गंभीरता से सुनते हुए नियमों के अनुसार कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया।
    मंत्री से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में— फेडरेशन के पूर्व महासचिव दीपक कुमार भाटी
    सेक्टर डेल्टा-1 आरडब्ल्यूए अध्यक्ष प्रमोद भाटी, उपाध्यक्ष पंकज नागर, कोषाध्यक्ष ठाकुर विजय सिंह, वीरेश बैसला
    सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।

    हरियाली बचाने की लड़ाई अब जनआंदोलन बनने की ओर

    ग्रेटर नोएडा तेजी से विकसित हो रहा शहर है, लेकिन इसी विकास के बीच हरित क्षेत्रों के सिकुड़ने की चिंता भी बढ़ती जा रही है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि शहरों में ग्रीन बेल्ट केवल सजावट नहीं होती, बल्कि वह प्रदूषण नियंत्रण, तापमान संतुलन और बेहतर जीवन गुणवत्ता के लिए बेहद जरूरी होती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि बिल्डरों को खुलेआम ग्रीन बेल्ट पर कब्जा करने की छूट मिल गई, तो आने वाले समय में सेक्टरों की पहचान खत्म हो जाएगी। यही वजह है कि अब सेक्टरवासी इस मुद्दे को लेकर और अधिक मुखर होते नजर आ रहे हैं।

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