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Saturday, July 11, 2026
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    Breaking News : “10 करोड़ का हॉकी स्टेडियम या हजारों खिलाड़ियों का हक?” भूमि पूजन के दो दिन बाद ही उठी विरोध की लहर, सेक्टर-37 के मैदान को बचाने के लिए सड़क से सोशल मीडिया तक उतरे लोग, विधायक धीरेंद्र सिंह ने दो दिन पूर्व किया था भूमि पूजन

    सेना-पुलिस की तैयारी करने वाले युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक ने उठाई आवाज, कहा- ‘एक खेल के लिए पूरे शहर की खेल संस्कृति खत्म मत कीजिए

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    ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक।
    ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-37 स्थित बहुउद्देशीय खेल मैदान को हॉकी स्टेडियम में परिवर्तित करने की योजना अब विवादों के घेरे में आ गई है। लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित हॉकी स्टेडियम का भूमि पूजन दो दिन पहले ही क्षेत्रीय विधायक धीरेंद्र सिंह द्वारा किया गया था, लेकिन इसके बाद स्थानीय निवासियों, सेक्टरवासियों, गांव के लोगों और खेल प्रेमियों ने इस फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विरोध की आवाज अब मैदान से निकलकर सोशल मीडिया तक पहुंच गई है, जहां बड़ी संख्या में लोग इस परियोजना पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं।

    “एक मैदान, हजारों सपने… और अब उसी पर संकट”

    स्थानीय लोगों का कहना है कि सेक्टर-37 का यह मैदान केवल एक स्टेडियम नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के सपनों का केंद्र है। यह ग्रेटर नोएडा का ऐसा प्रमुख सार्वजनिक खेल परिसर है, जहां बिना किसी शुल्क के विभिन्न आयु वर्ग के लोग खेल गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं।
    सुबह के समय यहां बड़ी संख्या में बुजुर्ग और महिलाएं टहलने आती हैं, जबकि दिन और शाम के समय क्रिकेट, फुटबॉल, कबड्डी, वॉलीबॉल, एथलेटिक्स और अन्य खेलों का अभ्यास करने वाले खिलाड़ी मैदान का उपयोग करते हैं। सेना, पुलिस, अर्धसैनिक बल और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए भी यह मैदान एक महत्वपूर्ण अभ्यास स्थल माना जाता है।

    भूमि पूजन के दो दिन बाद शुरू हुआ विरोध

    स्थानीय लोगों के अनुसार, हॉकी स्टेडियम के निर्माण के लिए विधायक धीरेंद्र सिंह ने दो दिन पूर्व भूमि पूजन किया था। इसके बाद जब लोगों को इस परियोजना की विस्तृत जानकारी मिली तो क्षेत्र में असंतोष बढ़ने लगा। कई सामाजिक संगठनों, खिलाड़ियों और स्थानीय निवासियों ने इस फैसले के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

    लोगों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप करने की मांग की। उनका कहना है कि शहर में अन्य स्थानों पर पर्याप्त भूमि उपलब्ध है, इसलिए हॉकी स्टेडियम का निर्माण किसी दूसरी जगह किया जाना चाहिए।

    “एक खेल के लिए क्यों खत्म हो अन्य खेलों की सुविधाएं?”

    विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि हॉकी को बढ़ावा देना स्वागत योग्य कदम है, लेकिन इसके लिए एक ऐसे मैदान को समाप्त करना उचित नहीं होगा, जहां वर्षों से विभिन्न खेल गतिविधियां संचालित हो रही हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि—
    यहां रोजाना सैकड़ों युवा शारीरिक प्रशिक्षण लेते हैं।
    बच्चों के लिए यह खेल सीखने का प्रमुख स्थान है।
    बुजुर्गों और महिलाओं के लिए यह स्वास्थ्य गतिविधियों का केंद्र है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए यह मैदान बेहद महत्वपूर्ण है। लोगों का कहना है कि यदि यह पूरा परिसर हॉकी स्टेडियम में बदल जाता है तो हजारों लोगों की नियमित गतिविधियां प्रभावित होंगी।

    सोशल मीडिया पर भी तेज हुआ अभियान

    विरोध केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। कई वीडियो और पोस्ट के माध्यम से यह मांग उठाई जा रही है कि सेक्टर-37 के मौजूदा मैदान को बहुउद्देशीय स्वरूप में ही बनाए रखा जाए और हॉकी स्टेडियम के लिए अलग स्थान का चयन किया जाए। कई लोगों ने यह भी कहा कि शहर में खाली पड़ी अन्य जमीनों का उपयोग करके विश्वस्तरीय हॉकी स्टेडियम बनाया जा सकता है, जिससे हॉकी खिलाड़ियों को भी बेहतर सुविधा मिले और वर्तमान मैदान का उपयोग करने वाले हजारों लोगों की गतिविधियां भी प्रभावित न हों।

    मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

    विरोध कर रहे नागरिकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि इस परियोजना की समीक्षा कराई जाए। उनका कहना है कि खेलों को बढ़ावा देना आवश्यक है, लेकिन इसके लिए ऐसे फैसले नहीं होने चाहिए, जिनसे अन्य खिलाड़ियों और आम नागरिकों के हित प्रभावित हों।
    लोगों का सुझाव है कि ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध अन्य खाली भूखंडों पर आधुनिक हॉकी स्टेडियम बनाया जाए और सेक्टर-37 के मैदान को बहुउद्देशीय खेल परिसर के रूप में संरक्षित रखा जाए।

    खेल प्रेमियों के बीच छिड़ी बहस

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। एक वर्ग का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के हॉकी खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए आधुनिक स्टेडियम जरूरी हैं, वहीं दूसरा वर्ग मानता है कि सार्वजनिक और बहुउद्देशीय खेल मैदानों को समाप्त करना उचित नहीं है।
    अब निगाहें प्राधिकरण और शासन के अगले कदम पर टिकी हैं। देखना दिलचस्प होगा कि स्थानीय लोगों के विरोध और सोशल मीडिया पर उठ रही आवाजों के बीच हॉकी स्टेडियम की इस परियोजना पर क्या निर्णय लिया जाता है।

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