नोएडा, द न्यूज क्लिक। नोएडा को स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित शहर बनाने के लिए एक ओर जहां नोएडा प्राधिकरण, पुलिस कमिश्नरेट और विभिन्न रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) लगातार प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों की लापरवाही और नियमों की अनदेखी शहर की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। सार्वजनिक पार्कों, सड़कों और रिहायशी क्षेत्रों में बिना सुरक्षा उपायों के खूंखार नस्ल के पालतू कुत्तों को घुमाना और उनके मल-मूत्र की सफाई न करना अब स्थानीय निवासियों के लिए बड़ी परेशानी बनता जा रहा है।
सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन से तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि कुछ पेट ओनर्स अपने पालतू कुत्तों को बिना मज़ल (मुँह पर सुरक्षा पट्टा) और कई बार बिना उचित नियंत्रण के सार्वजनिक स्थानों पर लेकर निकलते हैं, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और अन्य नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।
सार्वजनिक स्थानों पर फैल रही गंदगी से लोग परेशान
दिव्य कृष्णात्रेय ने कहा कि कई लोग अपने घरों को तो साफ रखते हैं, लेकिन अपने पालतू कुत्तों को दूसरों के घरों के बाहर, मुख्य गेट और सार्वजनिक रास्तों पर गंदगी करने देते हैं। इससे न केवल आसपास का वातावरण दूषित होता है, बल्कि संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ता है। उनका कहना है कि यह व्यवहार सामाजिक जिम्मेदारी और नागरिक शिष्टाचार के बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने कहा कि पार्कों और कॉलोनियों में सुबह-शाम टहलने वाले नागरिकों को अक्सर ऐसी गंदगी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है, जबकि बच्चों के खेलने वाले स्थान भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।
खूंखार नस्ल के कुत्तों से बढ़ रहा खतरा
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने कहा कि आए दिन देशभर से पिटबुल, जर्मन शेफर्ड और अन्य आक्रामक नस्लों के कुत्तों द्वारा लोगों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों पर हमले की घटनाएं सामने आती रहती हैं। इसके बावजूद कुछ लोग सुरक्षा नियमों की अनदेखी करते हुए ऐसे कुत्तों को बिना मज़ल और पर्याप्त नियंत्रण के सार्वजनिक पार्कों और सड़कों पर घुमाते हैं, जिससे कभी भी गंभीर हादसा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस समस्या पर सख्ती नहीं बरती गई तो भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
आवारा कुत्तों को खाना खिलाने के तरीके पर भी जताई चिंता
दिव्य कृष्णात्रेय ने कहा कि कुछ लोग सार्वजनिक सड़कों और गलियों में अनियोजित तरीके से खाद्य सामग्री डालते हैं, जिससे आवारा कुत्तों का जमावड़ा लग जाता है। इससे सड़कें गंदी होती हैं और राहगीरों, विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां सार्वजनिक व्यवस्था और स्वच्छता दोनों को प्रभावित करती हैं।
‘स्टेटस सिंबल’ नहीं, जिम्मेदारी निभाएं पेट ओनर्स
दिव्य कृष्णात्रेय ने कहा, “पालतू पशु रखना गलत नहीं है, लेकिन उनके साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाना भी उतना ही जरूरी है। अपनी ईगो और गंदगी को अपने घर तक सीमित रखें। सार्वजनिक सड़कें, पार्क और दूसरों के घरों के सामने का क्षेत्र आपकी निजी संपत्ति नहीं है। कानून और जनसुरक्षा से बढ़कर किसी का स्टेटस सिंबल नहीं हो सकता। प्रत्येक पेट ओनर का दायित्व है कि वह अपने पालतू पशु को नियंत्रित रखे, सुरक्षा नियमों का पालन करे और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता बनाए रखे।”
प्रशासन से रखीं ये प्रमुख मांगें
आरडब्ल्यूए सेक्टर-105 ने नोएडा पुलिस कमिश्नरेट और नोएडा प्राधिकरण से मांग की है कि सार्वजनिक सुरक्षा और स्वच्छता से खिलवाड़ करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। आरडब्ल्यूए ने मांग की है कि— सार्वजनिक स्थानों पर नियमों का उल्लंघन करने वाले पेट ओनर्स पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
- बिना मज़ल और बिना नियंत्रण के खतरनाक नस्ल के कुत्तों को घुमाने वालों पर जुर्माना लगाया जाए।
- सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ आर्थिक दंड और अन्य दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
- पार्कों और रिहायशी क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराया जाए।
- नागरिकों में जिम्मेदार पेट ओनरशिप को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाया जाए। आरडब्ल्यूए का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या आने वाले समय में और गंभीर रूप ले सकती है। नागरिकों की सुरक्षा, स्वच्छता और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रशासन, पेट ओनर्स और आम लोगों को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी।

