ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी बदलावों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से राम-ईश इंटरनेशनल स्कूल, ग्रेटर नोएडा में 29 अगस्त 2026 को जिला स्तरीय विचार-विमर्श एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में विद्यार्थियों के बीच कम्प्यूटेशनल थिंकिंग विकसित करने और उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित भविष्य के लिए तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया।
इस जिला स्तरीय आयोजन में ग्रेटर नोएडा के 16 प्रतिष्ठित विद्यालयों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान छह टीमों ने विभिन्न प्रोजेक्ट, गतिविधियों और डिजिटल टूल्स के माध्यम से यह प्रदर्शित किया कि कक्षा शिक्षण में कोडिंग, तार्किक चिंतन, समस्या समाधान और एल्गोरिदम आधारित सोच को किस प्रकार रोचक एवं गतिविधि आधारित तरीके से विकसित किया जा सकता है।
तकनीक आधारित शिक्षा समय की जरूरत
कार्यक्रम का शुभारंभ राम-ईश इंटरनेशनल स्कूल की प्रधानाचार्या शिखा सिंह के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में तकनीकी बदलावों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना विद्यार्थियों के लिए बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल तकनीकी उपकरणों का उपयोग करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में तार्किक सोच, समस्या समाधान और नई परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना भी जरूरी है।
उन्होंने कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और AI को शिक्षा से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों को भविष्य की शिक्षा और रोजगार की बदलती आवश्यकताओं के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
NEP 2020 के संदर्भ में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग पर चर्चा
कार्यशाला में शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के संदर्भ में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग के महत्व पर अपने विचार रखे। मुख्य वक्ताओं में नीरज अवस्थी, प्रधानाचार्य, मॉडल स्कूल, नोएडा; गार्गी घोष कंसबनिक, प्रधानाचार्या, एस.डी.आर.वी. कॉन्वेंट स्कूल तथा डॉ. विश्वदीप सिंह बघेला, प्रोफेसर, गलगोटिया विश्वविद्यालय शामिल रहे।
विशेषज्ञों ने बताया कि विद्यार्थियों में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग विकसित करने का अर्थ केवल उन्हें कोडिंग सिखाना नहीं है। इसके माध्यम से बच्चों में किसी समस्या को छोटे हिस्सों में बांटकर समझने, तार्किक तरीके से समाधान खोजने, पैटर्न पहचानने और क्रमबद्ध तरीके से कार्य करने की क्षमता विकसित की जा सकती है।
AI लैब और कोडिंग क्लब के अनुभव साझा किए
मेजबान विद्यालय की नेहा सेठ और नेहा तिवारी ने स्कूल स्तर पर AI लैब और कोडिंग क्लब शुरू करने से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को प्रोजेक्ट और गतिविधि आधारित शिक्षण से जोड़कर तकनीकी विषयों को अधिक सहज और रुचिकर बनाया जा सकता है। दोनों शिक्षिकाओं ने इस विषय पर ज्ञानवर्धक प्रस्तुति भी दी, जिसमें विद्यार्थियों को AI और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग से जोड़ने के विभिन्न तरीकों पर प्रकाश डाला गया।
प्रोजेक्ट और गतिविधियों से समझाया तकनीकी शिक्षण
कार्यशाला के दौरान छह टीमों ने अपने प्रोजेक्ट, गतिविधियां और टूल्स प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से यह दिखाया गया कि कक्षा में विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक तरीके से पढ़ाने के बजाय गेम, प्रोजेक्ट, कोडिंग और समस्या-समाधान आधारित गतिविधियों के माध्यम से भी तकनीकी एवं तार्किक कौशल विकसित किए जा सकते हैं। कार्यक्रम में शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच संवाद भी हुआ। प्रतिभागियों ने AI के बढ़ते प्रभाव, शिक्षा में इसके जिम्मेदार उपयोग और भविष्य की जरूरतों को लेकर अपने विचार साझा किए।
AI आधारित भविष्य के लिए तैयार करने पर बनी सहमति
कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति जताई कि शिक्षा में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग, कोडिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों को प्रभावी ढंग से शामिल करने के लिए इस तरह के संवाद और कार्यशालाएं नियमित रूप से आयोजित की जानी चाहिए। आयोजन का उद्देश्य केवल शिक्षकों को नई तकनीक से परिचित कराना नहीं, बल्कि शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों को AI-संचालित भविष्य के लिए तैयार करना रहा। कार्यशाला ने शिक्षा जगत में तकनीक, नवाचार और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

