नोएडा, रफ़्तार टूडे। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) की नई नीतियों को लेकर अब नोएडा में उपभोक्ताओं का गुस्सा खुलकर सामने आने लगा है। बिजली कनेक्शन, बिल सुधार, मीटर बदलवाने और अन्य सेवाओं को लेकर लागू की गई नई व्यवस्थाओं ने आम जनता की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। नोएडा के सेक्टर-105 की आरडब्ल्यूए ने इन नीतियों को सीधे तौर पर “जनविरोधी” करार देते हुए इनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आरडब्ल्यूए सेक्टर-105 के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय (दीपक शर्मा) ने कहा कि UPPCL चेयरमैन और विभाग द्वारा लागू की गई नीतियां आम उपभोक्ताओं की सुविधा के बजाय उन्हें मानसिक, आर्थिक और प्रशासनिक रूप से प्रताड़ित करने वाली साबित हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली विभाग की नई व्यवस्था ने जनता और अधिकारियों के बीच की दूरी बढ़ा दी है, जिससे समस्याओं का समाधान पहले की तुलना में और अधिक कठिन हो गया है।
“हर घर बिजली” का दावा, लेकिन नए कनेक्शन पर भारी शुल्क का बोझ
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने सबसे बड़ा मुद्दा नए बिजली कनेक्शनों पर लगाए गए ‘सप्लाई अफोर्डिंग चार्ज’ को बताया। उनका कहना है कि सरकार एक तरफ “हर घर बिजली” और “सुलभ बिजली” का नारा देती है, वहीं दूसरी तरफ हजारों रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगाकर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बिजली कनेक्शन लेना मुश्किल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले जहां आम परिवार आसानी से नया बिजली कनेक्शन ले लेते थे, अब अतिरिक्त चार्ज के कारण लोगों को आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है। खासतौर पर छोटे मकान मालिक, किरायेदार और मध्यम वर्ग के लोग इस नीति से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
दिव्य कृष्णात्रेय ने कहा—
“नई नीति ने बिजली जैसी बुनियादी सुविधा को आम आदमी की पहुंच से दूर करने का काम किया है। यह सीधे तौर पर जनविरोधी फैसला है।”
स्थानीय बिजली घरों से खत्म हुई सुविधा, अब मुख्य कार्यालयों के चक्कर
उपभोक्ताओं की दूसरी सबसे बड़ी शिकायत विभाग की केंद्रीकृत व्यवस्था को लेकर सामने आई है। पहले बिल सुधार, मीटर खराब होने, नया मीटर लगाने या अन्य तकनीकी समस्याओं का समाधान स्थानीय उपखंड कार्यालयों (Sub-Division) में ही हो जाता था। लेकिन अब अधिकांश कार्य सेक्टर-16 और सेक्टर-18 स्थित मुख्य कार्यालयों में केंद्रित कर दिए गए हैं। इस बदलाव के कारण आम उपभोक्ताओं को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए भी कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है।
शिकायत निवारण तंत्र हुआ कमजोर, जनता और अधिकारियों के बीच बढ़ी दूरी
RWA का आरोप है कि नई नीति के बाद बिजली विभाग का शिकायत निवारण तंत्र लगभग ध्वस्त हो गया है। पहले उपभोक्ता सीधे जेई (JE) या एसडीओ (SDO) से मिलकर अपनी समस्याओं का समाधान करा लेते थे, लेकिन अब पूरी प्रक्रिया जटिल और केंद्रीकृत हो गई है। दिव्य कृष्णात्रेय ने कहा कि—
“नई व्यवस्था धरातल की सच्चाई से कोसों दूर है। स्मार्ट मीटर की समस्याओं से लोग पहले ही परेशान थे, अब जटिल प्रक्रियाओं और अतिरिक्त शुल्कों ने जनता की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।”
“स्मार्ट मीटर” के बाद अब नई नीतियों पर भी सवाल
नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर को लेकर पहले से ही कई शिकायतें सामने आती रही हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि स्मार्ट मीटर में बिल अधिक आने, रीडिंग में गड़बड़ी और तकनीकी समस्याओं के कारण लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। अब नई नीतियों ने जनता का असंतोष और बढ़ा दिया है। लोगों का कहना है कि बिजली विभाग उपभोक्ताओं की सुविधा बढ़ाने के बजाय प्रक्रियाओं को और कठिन बना रहा है।
आरडब्ल्यूए की प्रमुख मांगें
RWA सेक्टर-105 ने विभाग और सरकार के सामने कई अहम मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से—‘सप्लाई अफोर्डिंग चार्ज’ को तत्काल समाप्त किया जाए
बिल सुधार और मीटर संबंधी सेवाएं फिर से स्थानीय बिजली घरों में शुरू की जाएं
उपभोक्ताओं के लिए “डोर-स्टेप सर्विस” लागू की जाए
शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत बनाया जाए
आम जनता को लंबी लाइन और दूरस्थ कार्यालयों की परेशानी से राहत दी जाए
सरकार की छवि पर असर पड़ने की आशंका
RWA का कहना है कि यदि इन नीतियों में सुधार नहीं किया गया तो इसका सीधा असर सरकार की छवि पर पड़ेगा। जनता में बढ़ता असंतोष भविष्य में बड़े विरोध प्रदर्शन का रूप भी ले सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिजली जैसी आवश्यक सेवा में जटिलता बढ़ाने के बजाय प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।
नोएडा के उपभोक्ताओं को अब उम्मीद है कि सरकार और UPPCL प्रबंधन जनता की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द कोई राहत भरा फैसला करेगा।

