ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। तेजी से विकसित हो रहे स्टार्ट-अप इकोसिस्टम और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था के दौर में युवाओं को उद्यमिता की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से आईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज, ग्रेटर नोएडा के इंस्टीट्यूशन्स इनोवेशन काउंसिल (IIC) द्वारा “प्रारंभिक चरण के उद्यमियों के लिए एंजेल इन्वेस्टमेंट एवं वेंचर कैपिटल (VC) फंडिंग के अवसर” विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों और नवोदित उद्यमियों को स्टार्ट-अप के लिए निवेश जुटाने की प्रक्रिया, निवेशकों की अपेक्षाओं, बिजनेस मॉडल और उद्यमिता के व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराना था। कार्यशाला में बी.टेक., एमबीए और विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान स्टार्ट-अप संस्कृति, नवाचार और निवेश के बदलते स्वरूप पर विस्तृत चर्चा हुई, जिससे विद्यार्थियों को उद्योग जगत की वास्तविक आवश्यकताओं को समझने का अवसर मिला।
नवाचार और उद्यमिता समय की सबसे बड़ी आवश्यकता: डॉ. मयंक गर्ग
कार्यक्रम का शुभारंभ आईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक एवं इंस्टीट्यूशन्स इनोवेशन काउंसिल (IIC) के अध्यक्ष डॉ. मयंक गर्ग के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने मुख्य वक्ता, संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि आज का युग केवल नौकरी तलाशने का नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने का है। उन्होंने कहा कि देश में स्टार्ट-अप इंडिया, डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहल ने युवाओं के लिए असीम संभावनाओं के द्वार खोले हैं। ऐसे में शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों में नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता की सोच विकसित करें।
डॉ. गर्ग ने विद्यार्थियों से समाज की वास्तविक समस्याओं की पहचान कर उनके तकनीकी और व्यावहारिक समाधान विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इंस्टीट्यूशन्स इनोवेशन काउंसिल लगातार ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर रही है, जिससे विद्यार्थी अपने विचारों को सफल स्टार्ट-अप में बदल सकें।

मुख्य वक्ता डॉ. विशाल गांधी ने साझा किया निवेश का अनुभव
कार्यशाला के मुख्य वक्ता डॉ. विशाल गांधी रहे, जो BIORx Venture Advisors Pvt. Ltd. के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, Indian Healthcare Angels के मुख्य निवेश अधिकारी तथा VEOCAP Ventures के मैनेजिंग पार्टनर हैं। उन्होंने अपने वर्षों के अनुभव के आधार पर विद्यार्थियों को बताया कि किसी भी स्टार्ट-अप की सफलता केवल एक अच्छे आइडिया पर निर्भर नहीं करती, बल्कि मजबूत बिजनेस मॉडल, सही रणनीति, स्पष्ट लक्ष्य और प्रभावी टीमवर्क भी उतना ही आवश्यक होता है।
उन्होंने एंजेल इन्वेस्टमेंट, वेंचर कैपिटल फंडिंग, निवेशकों की कार्यप्रणाली, बिजनेस वैल्यूएशन, ड्यू डिलिजेंस, निवेश जुटाने की रणनीति और निवेशकों की अपेक्षाओं पर विस्तार से जानकारी दी।
कैसे मिलता है निवेश, क्या देखते हैं निवेशक
डॉ. गांधी ने कहा कि निवेशक केवल विचार में निवेश नहीं करते, बल्कि उस विचार को साकार करने वाली टीम, उसकी प्रतिबद्धता, बाजार की आवश्यकता और व्यवसाय की दीर्घकालिक संभावनाओं का भी गहन मूल्यांकन करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि निवेश प्राप्त करने से पहले स्टार्ट-अप को अपने उत्पाद या सेवा की उपयोगिता, ग्राहकों की आवश्यकता, प्रतिस्पर्धा और संभावित बाजार का स्पष्ट अध्ययन करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि एक प्रभावशाली इन्वेस्टर पिच (Investor Pitch) तैयार करना भी निवेश प्राप्त करने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम होता है। यदि संस्थापक अपनी सोच, रणनीति और भविष्य की योजना को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करता है, तो निवेशकों का विश्वास जीतना आसान हो जाता है।
वास्तविक उदाहरणों से समझाया स्टार्ट-अप का सफर
कार्यशाला के दौरान डॉ. गांधी ने कई सफल भारतीय और वैश्विक स्टार्ट-अप्स के उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि कैसे छोटे स्तर पर शुरू हुए नवाचार आज करोड़ों-अरबों रुपये के व्यवसाय में बदल चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि शुरुआती दौर में आने वाली चुनौतियों, वित्तीय प्रबंधन, टीम निर्माण, उत्पाद विकास और बाजार विस्तार जैसी समस्याओं का समाधान किस प्रकार किया जा सकता है।
उनकी व्यावहारिक प्रस्तुति और वास्तविक केस स्टडी ने विद्यार्थियों को उद्यमिता की जमीनी सच्चाइयों से परिचित कराया।
विद्यार्थियों ने पूछे कई महत्वपूर्ण प्रश्न
कार्यशाला का संवादात्मक सत्र विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। प्रतिभागियों ने स्टार्ट-अप फंडिंग, इनक्यूबेशन सेंटर, सरकारी योजनाओं, एंजेल नेटवर्क, वेंचर कैपिटल कंपनियों, निवेशकों तक पहुंच बनाने तथा बिजनेस मॉडल वैलिडेशन से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे। डॉ. गांधी ने सभी प्रश्नों के व्यावहारिक और विस्तृत उत्तर देते हुए विद्यार्थियों को भविष्य में सफल उद्यमी बनने के लिए आवश्यक सुझाव दिए।
नवाचार संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए निरंतर होंगे ऐसे आयोजन
कार्यक्रम के समापन पर इंस्टीट्यूशन्स इनोवेशन काउंसिल (IIC) के संयोजक डॉ. राजीव रंजन ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए मुख्य वक्ता डॉ. विशाल गांधी का बहुमूल्य मार्गदर्शन देने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने आईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज प्रबंधन, निदेशक डॉ. मयंक गर्ग, सभी संकाय सदस्यों, आयोजन समिति तथा प्रतिभागियों का भी सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि संस्थान भविष्य में भी विद्यार्थियों को उद्योग विशेषज्ञों, निवेशकों और स्टार्ट-अप जगत से जोड़ने के उद्देश्य से ऐसे उद्योगोन्मुखी कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा, ताकि युवा केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित न रहें, बल्कि सफल उद्यमी बनकर देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।
कार्यशाला प्रेरणादायक वातावरण में संपन्न हुई और इसने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि आईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज नवाचार, उद्यमिता और उद्योग-शिक्षा सहयोग को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। संस्थान का यह प्रयास विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर और नवाचारी भारत के निर्माण में सहभागी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

