ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक।
औद्योगिक विकास किसी भी क्षेत्र की आर्थिक प्रगति की रीढ़ माना जाता है, लेकिन जब उद्योगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़े तो विकास की रफ्तार धीमी पड़ने लगती है। ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर औद्योगिक क्षेत्र में भी कुछ ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है। हालांकि अब उद्योग जगत को नई उम्मीद जगी है, क्योंकि उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) को नया नेतृत्व मिला है। इसी उम्मीद के साथ इंडस्ट्रियल एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन (IEA), सूरजपुर ने UPSIDA के नव नियुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी का स्वागत करते हुए उद्योगों से जुड़ी समस्याओं का विस्तृत ज्ञापन सौंपा और उनके त्वरित समाधान की मांग की।
IEA का कहना है कि सूरजपुर औद्योगिक क्षेत्र प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल है, जहां हजारों उद्योग संचालित हो रहे हैं और लाखों लोगों की आजीविका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इन उद्योगों पर निर्भर है। ऐसे में क्षेत्र की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत बनाना अत्यंत आवश्यक है।
नई जिम्मेदारी, नई उम्मीदें और उद्योगों की बड़ी अपेक्षाएं
IEA के पदाधिकारियों ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि नए मुख्य कार्यपालक अधिकारी के नेतृत्व में UPSIDA उद्योग हितैषी प्रशासन, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और पारदर्शी सेवाओं के माध्यम से औद्योगिक विकास को नई दिशा देगा। संगठन ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार निवेश को बढ़ावा देने और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई समस्याएं अब भी उद्योगों की राह में बाधा बनी हुई हैं।
तीन महीने से नहीं हुई सफाई, गंदगी और धूल से परेशान उद्योग
ज्ञापन में सबसे पहले सूरजपुर औद्योगिक क्षेत्र की सफाई व्यवस्था का मुद्दा उठाया गया। IEA ने बताया कि पिछले लगभग तीन महीनों से नालियों की नियमित सफाई नहीं हुई है। सड़कों के किनारे झाड़ू लगाने और कचरा हटाने का कार्य भी लगभग ठप पड़ा हुआ है।
इसके कारण कई स्थानों पर धूल, गंदगी और जल निकासी की समस्या बढ़ गई है। बरसात या हल्की वर्षा के दौरान नालियां चोक हो जाती हैं, जिससे उद्योगों और कर्मचारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। संगठन ने मांग की कि नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और इसके लिए एक स्थायी मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जाए।
अंधेरे में डूबे औद्योगिक मार्ग, खराब स्ट्रीट लाइट बनी चिंता
IEA ने क्षेत्र की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को भी गंभीर समस्या बताया। संगठन के अनुसार बड़ी संख्या में स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से खराब हैं या पर्याप्त रोशनी नहीं दे रही हैं। उद्योगपतियों का कहना है कि कई बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद समय पर मरम्मत नहीं हो रही। इससे रात के समय कर्मचारियों और वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है तथा सुरक्षा संबंधी जोखिम भी बढ़ जाता है। संगठन ने मांग की कि स्ट्रीट लाइटों की नियमित जांच और मरम्मत के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
खार लोहिया ड्रेन पर पुल निर्माण की मांग फिर हुई तेज
सूरजपुर के उद्योगपतियों ने एक बार फिर खार लोहिया ड्रेन पर पुल निर्माण की मांग को प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि साइट-B औद्योगिक क्षेत्र की बेहतर कनेक्टिविटी के लिए यह पुल बेहद जरूरी है।
यदि यह परियोजना पूरी हो जाती है तो न केवल यातायात सुगम होगा बल्कि उद्योगों की लॉजिस्टिक्स लागत भी कम होगी। इससे क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आएगी।
पार्कों की बदहाली से बिगड़ रही औद्योगिक क्षेत्र की छवि
ज्ञापन में कहा गया कि औद्योगिक क्षेत्र के अधिकांश पार्क उपेक्षा का शिकार हैं। हरियाली कम हो रही है और रखरखाव के अभाव में कई पार्कों की स्थिति खराब हो चुकी है। IEA ने पार्कों के सौंदर्यीकरण, नियमित रखरखाव और बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाने की मांग की है। संगठन का मानना है कि स्वच्छ और हरित वातावरण कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ-साथ निवेशकों पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है।
डस्टबिन की कमी से बढ़ रही गंदगी
औद्योगिक क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर पर्याप्त डस्टबिन नहीं होने की समस्या भी उठाई गई। संगठन ने कहा कि यदि प्रमुख स्थानों पर पर्याप्त संख्या में डस्टबिन लगाए जाएं तो स्वच्छता व्यवस्था को काफी बेहतर बनाया जा सकता है।
‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के लिए प्रक्रियाएं हों सरल
उद्योगपतियों ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि किराया अनुमति (Rent Permission) प्राप्त करने में काफी समय लग जाता है। यदि यह अधिकार क्षेत्रीय प्रबंधक (RM) कार्यालय स्तर पर दे दिया जाए तो उद्योगों को बड़ी राहत मिलेगी। इसके अलावा कंपनी के नाम या स्वामित्व परिवर्तन से जुड़े मामलों को भी क्षेत्रीय कार्यालय स्तर पर निपटाने की मांग की गई ताकि उद्यमियों को बार-बार मुख्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें।
Deemed Approval प्रणाली को प्रभावी बनाने की मांग
IEA ने कहा कि कई मामलों में उद्योगों को अलग-अलग स्तर पर बार-बार आपत्तियों का सामना करना पड़ता है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर विभाग कोई आपत्ति दर्ज नहीं करता तो आवेदन को स्वतः स्वीकृत माना जाना चाहिए।
मेंटेनेंस चार्ज जमा करने की प्रक्रिया भी हो आसान
उद्योगपतियों ने मेंटेनेंस चार्ज जमा करने की प्रक्रिया को भी जटिल बताया। उन्होंने कहा कि शुल्क जमा करने से पहले विभागीय सत्यापन की अनिवार्यता कई बार अनावश्यक देरी का कारण बनती है। इस प्रक्रिया को सरल बनाकर उद्योगों को सीधे भुगतान की सुविधा दी जानी चाहिए।
मुख्य कार्यपालक अधिकारी से सकारात्मक कार्रवाई की उम्मीद
IEA प्रतिनिधिमंडल ने विश्वास जताया कि नए मुख्य कार्यपालक अधिकारी उद्योगों की इन समस्याओं को गंभीरता से लेंगे और उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाएंगे। संगठन ने यह भी आश्वासन दिया कि औद्योगिक विकास और जनहित से जुड़े हर प्रयास में वह UPSIDA के साथ पूर्ण सहयोग करेगा। इस दौरान IEA की ओर से अध्यक्ष संजीव शर्मा, पी. एस. मुखर्जी, प्रमोद झा, हरबीर सिंह, महिपाल सिंह, अनूप सिंह, हरीश सिंह सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि यदि बुनियादी समस्याओं का समाधान हो जाए तो सूरजपुर औद्योगिक क्षेत्र प्रदेश के सबसे बेहतर औद्योगिक केंद्रों में अपनी पहचान और मजबूत कर सकता है।

