ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (जीआईएमएस), ग्रेटर नोएडा में अस्पताल की गुणवत्ता, सुरक्षा और एनएबीएच मानकों के अनुरूप कार्यप्रणाली को और मजबूत करने के उद्देश्य से प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। संस्थान के निदेशक ब्रिगेडियर (डॉ.) राकेश कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन और डीन क्वालिटी डॉ. मनीषा सिंह के नेतृत्व में गुणवत्ता आश्वासन (क्यूए) विभाग द्वारा कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण सत्रों की श्रृंखला आयोजित की गई। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य अस्पताल में कार्यरत कर्मचारियों को नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (NABH) के मानकों, अस्पताल की निर्धारित नीतियों तथा सुरक्षित कार्यप्रणाली के प्रति जागरूक करना है। इसी क्रम में 25 अगस्त और 27 अगस्त 2026 को क्रमशः बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट और नीडल स्टिक इंजरी (NSI) प्रोटोकॉल पर विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए।
बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट पर हुआ विशेष प्रशिक्षण
क्यूए विभाग की ओर से 25 अगस्त 2026 को बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट (BMW) विषय पर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। स्वास्थ्य संस्थानों में जैव चिकित्सा अपशिष्ट का सही प्रबंधन मरीजों, अस्पताल कर्मचारियों, सफाई कर्मियों और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों को बायोमेडिकल वेस्ट के सुरक्षित एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रबंधन की जानकारी दी गई। सत्र में कर्मचारियों को अपशिष्ट के उत्पत्ति स्थल पर ही सही पृथक्करण (Segregation), संग्रह, हैंडलिंग, परिवहन, भंडारण और निस्तारण से संबंधित प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से जागरूक किया गया। प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि बायोमेडिकल वेस्ट को उसके स्रोत पर ही सही श्रेणी में अलग किया जाना चाहिए, ताकि आगे की प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार का संक्रमण या क्रॉस-कंटैमिनेशन न हो।
रंग-कोडित डिब्बों के सही इस्तेमाल पर जोर
प्रशिक्षण सत्र के दौरान रंग-कोडित डस्टबिन एवं कंटेनरों के सही उपयोग को भी प्रमुखता से समझाया गया। कर्मचारियों को बताया गया कि विभिन्न प्रकार के जैव चिकित्सा अपशिष्ट को निर्धारित श्रेणी और संबंधित कंटेनर में ही डाला जाना चाहिए। गलत तरीके से अपशिष्ट का पृथक्करण न केवल अस्पताल की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है, बल्कि इससे संक्रमण फैलने और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ने की आशंका भी रहती है। कर्मचारियों को सुरक्षित हैंडलिंग प्रथाओं, व्यक्तिगत सुरक्षा, अपशिष्ट से होने वाले संभावित जोखिमों तथा क्रॉस-कंटैमिनेशन की रोकथाम के उपायों के बारे में भी जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट केवल सफाई या हाउसकीपिंग विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि अस्पताल में काम करने वाले प्रत्येक संबंधित कर्मचारी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
दस्तावेजीकरण और रिपोर्टिंग भी महत्वपूर्ण
प्रशिक्षण में बायोमेडिकल वेस्ट से संबंधित दस्तावेजीकरण और रिपोर्टिंग प्रक्रिया के महत्व पर भी विशेष ध्यान दिया गया। कर्मचारियों को अस्पताल की निर्धारित नीतियों और प्रक्रियाओं का पालन करने तथा आवश्यक रिकॉर्ड को सही तरीके से बनाए रखने के लिए जागरूक किया गया। क्यूए विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अस्पताल के विभिन्न विभागों में बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट की प्रक्रिया एक समान, सुरक्षित और निर्धारित मानकों के अनुरूप हो। इससे अस्पताल में स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण बनाए रखने के साथ-साथ गुणवत्ता मानकों के अनुपालन को भी मजबूती मिलेगी।
नीडल स्टिक इंजरी प्रोटोकॉल पर भी प्रशिक्षण
इसके बाद 27 अगस्त 2026 को क्यूए विभाग द्वारा एनएसआई यानी नीडल स्टिक इंजरी (Needle Stick Injury) प्रोटोकॉल पर दूसरा महत्वपूर्ण प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी कर्मचारियों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सुई अथवा अन्य धारदार उपकरणों से होने वाली चोटें एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक जोखिम हो सकती हैं। प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों को नीडल स्टिक और अन्य शार्प इंजरी से जुड़े संभावित जोखिमों तथा ऐसी स्थिति में तुरंत और सही कार्रवाई करने के महत्व के बारे में बताया गया। कर्मचारियों को समझाया गया कि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में देरी किए बिना निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार कार्रवाई करना आवश्यक है।
शार्प उपकरणों के सुरक्षित इस्तेमाल पर जोर
एनएसआई प्रशिक्षण में शार्प उपकरणों की सुरक्षित हैंडलिंग और निस्तारण, चोट से बचाव के लिए अपनाई जाने वाली सावधानियों तथा कार्यस्थल पर जोखिम को कम करने के उपायों पर चर्चा की गई। कर्मचारियों को सुरक्षित कार्यप्रणाली अपनाने और इस्तेमाल किए गए शार्प उपकरणों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निस्तारित करने के लिए प्रेरित किया गया। सत्र में यह भी बताया गया कि नीडल स्टिक इंजरी होने की स्थिति में तत्काल प्राथमिक उपचार, घटना की त्वरित रिपोर्टिंग, जोखिम का आकलन और समय पर चिकित्सकीय मूल्यांकन बेहद महत्वपूर्ण है। किसी भी संभावित एक्सपोजर को नजरअंदाज करने के बजाय अस्पताल की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तत्काल कार्रवाई करने पर जोर दिया गया।
समय पर रिपोर्टिंग और फॉलोअप जरूरी
प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों को बताया गया कि नीडल स्टिक इंजरी की घटना को छिपाने या रिपोर्ट करने में देरी करने से जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए ऐसी प्रत्येक घटना की तत्काल रिपोर्टिंग, उचित दस्तावेजीकरण, जोखिम मूल्यांकन और आवश्यक मेडिकल फॉलोअप सुनिश्चित किया जाना चाहिए। कर्मचारियों को अस्पताल के निर्धारित एनएसआई प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, ताकि स्वास्थ्यकर्मियों की व्यावसायिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और संभावित संक्रमण के जोखिम को कम किया जा सके।
गुणवत्ता और सुरक्षा की संस्कृति को बढ़ावा देने की पहल
जीआईएमएस में आयोजित दोनों प्रशिक्षण सत्रों का व्यापक उद्देश्य केवल कर्मचारियों को जानकारी देना नहीं, बल्कि अस्पताल में गुणवत्ता, सुरक्षा, जवाबदेही और अनुपालन की संस्कृति को मजबूत करना है। प्रशिक्षण के माध्यम से कर्मचारियों को यह संदेश दिया गया कि मरीजों की सुरक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा भी अस्पताल की गुणवत्ता व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। क्यूए विभाग ने प्रशिक्षण के दौरान सुरक्षित कार्यप्रणाली, समय पर रिपोर्टिंग, उचित रिकॉर्ड एवं दस्तावेजीकरण तथा अस्पताल की नीतियों के अनुपालन को निरंतर गुणवत्ता सुधार का आधार बताया।
एनएबीएच मानकों के अनुरूप लगातार प्रशिक्षण
जीआईएमएस प्रशासन का प्रयास है कि अस्पताल के विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों को समय-समय पर ऐसे प्रशिक्षण दिए जाते रहें, जिससे वे एनएबीएच मानकों और संस्थान की निर्धारित प्रक्रियाओं से लगातार अपडेट रहें। नियमित प्रशिक्षण से कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के साथ अस्पताल की सेवाओं में गुणवत्ता और सुरक्षा को भी मजबूती मिलती है। क्यूए विभाग की ओर से कहा गया कि भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से कर्मचारियों को नई प्रक्रियाओं, सुरक्षा मानकों और गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं के प्रति जागरूक किया जाएगा।
इस पहल से जीआईएमएस में रोगी सुरक्षा, कर्मचारी सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण, सुरक्षित अपशिष्ट प्रबंधन और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में संस्थान के प्रयासों को मजबूती मिलेगी। साथ ही, एनएबीएच मानकों के अनुरूप अस्पताल की कार्यप्रणाली को निरंतर बेहतर बनाने में भी इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

