ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) में सोमवार को 59वें अंतरराष्ट्रीय अनुप्रयुक्त एथोलॉजी सम्मेलन (ISAE-2026) का भव्य शुभारंभ हुआ। 10 से 14 अगस्त तक जीबीयू के कन्वेंशन सेंटर में आयोजित हो रहे इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन पहली बार भारत में किया जा रहा है। सम्मेलन की थीम “साझा संसार: एथोलॉजी-आधारित पशु कल्याण और सह-अस्तित्व” रखी गई है। सम्मेलन में 40 देशों के 182 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इनमें वैज्ञानिक, पशु चिकित्सक, पशु कल्याण विशेषज्ञ, नीति-निर्माता, शिक्षक, विद्यार्थी और शोधकर्ता शामिल हैं। पांच दिवसीय सम्मेलन में विशेषज्ञ पशु व्यवहार के वैज्ञानिक अध्ययन, पशु कल्याण और मानव-पशु सह-अस्तित्व से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श करेंगे।
पशु व्यवहार से लेकर मानव-पशु सह-अस्तित्व तक होगी चर्चा
सम्मेलन का उद्देश्य यह समझना है कि पशु व्यवहार का वैज्ञानिक अध्ययन किस प्रकार पशुओं और मनुष्यों दोनों के लिए अधिक मानवीय, जिम्मेदार और टिकाऊ व्यवस्थाएं विकसित करने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञ घरों, खेतों, कार्यस्थलों, प्रयोगशालाओं और प्राकृतिक आवासों में मनुष्यों के साथ रहने वाले पशुओं के जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने के वैज्ञानिक तरीकों पर चर्चा करेंगे।
नौ पूर्ण व्याख्यान और 23 मौखिक सत्र
ISAE-2026 के दौरान नौ पूर्ण व्याख्यान, 23 मौखिक सत्र, 35 पोस्टर सत्र और चार कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इनमें पशु व्यवहार के आकलन और पशु कल्याण में सुधार के लिए डिजिटल तकनीकों के इस्तेमाल पर भी चर्चा होगी। गाय और भैंस के लिए टिकाऊ कल्याण व्यवस्थाओं के अलावा कुत्तों, घोड़ों, मुर्गियों, बकरियों, भेड़ों और अन्य पालतू पशुओं से जुड़े कल्याण विषय सम्मेलन का हिस्सा होंगे। प्रयोगशाला में उपयोग होने वाले पशुओं, मछलियों, कीटों, चिड़ियाघरों के पशुओं और वन्यजीवों के कल्याण पर भी विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे।
इसके साथ ही विभिन्न मानव संस्कृतियों और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप प्रमाण-आधारित पशु कल्याण पद्धतियों पर विचार किया जाएगा। मानव-वन्यजीव संघर्ष और सह-अस्तित्व की चुनौतियों पर भी अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ अपने शोध और अनुभव साझा करेंगे।
पूर्व-सम्मेलन कार्यक्रमों से हुई शुरुआत
सम्मेलन की गतिविधियों की शुरुआत 10 अगस्त को पूर्व-सम्मेलन कार्यक्रमों के साथ हुई। इनमें DCCAF कार्यशाला, World of Good Initiative Leadership Programme और ISAE Council Meeting शामिल रहे। आगामी दिनों में मुख्य एवं पूर्ण व्याख्यान, मौखिक प्रस्तुतियां, पोस्टर सत्र, कार्यशालाएं और वार्षिक आम सभा आयोजित की जाएगी। वैज्ञानिक कार्यक्रमों के साथ प्रतिभागियों को भारतीय संस्कृति से परिचित कराने के लिए भारतीय सांस्कृतिक संध्या, सामूहिक फोटोग्राफ, योग एवं ध्यान सत्र, रन/वॉक और स्वागत रात्रिभोज जैसे कार्यक्रम भी रखे गए हैं।
वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित पशु कल्याण को मिलेगा बढ़ावा : डॉ. विजय पाल सिंह
59वें ISAE सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. विजय पाल सिंह ने कहा कि सम्मेलन भारत में पशु कल्याण के वैज्ञानिक मानकों को स्थापित और मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि पशु कल्याण से जुड़ी कई चर्चाएं अभी अनुभवों और किस्सागोई पर आधारित हैं तथा उन्हें पर्याप्त व्यवस्थित वैज्ञानिक प्रमाणों का समर्थन नहीं मिलता। ऐसे में यह सम्मेलन विश्वभर के विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, पशु कल्याण पेशेवरों और नीति-निर्माताओं को एक मंच पर लाकर इस अंतर को पाटने का अवसर प्रदान करेगा।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य पशु व्यवहार, पशु कल्याण और मानव-पशु सह-अस्तित्व के लिए वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है।
पशु कल्याण विज्ञान, पर्यावरण और सतत विकास से जुड़ा विषय : प्रो. राणा प्रताप सिंह
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने कहा कि जीबीयू में 59वें अंतरराष्ट्रीय अनुप्रयुक्त एथोलॉजी सम्मेलन की मेजबानी विश्वविद्यालय के लिए गौरव और ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि पहली बार भारत में आयोजित हो रहा यह सम्मेलन पशु व्यवहार, पशु कल्याण और मानव-पशु सह-अस्तित्व के क्षेत्र में वैश्विक विशेषज्ञता और भारतीय अकादमिक क्षमता को एक मंच पर ला रहा है।
कुलपति ने कहा कि पशु कल्याण केवल पशुओं की देखभाल तक सीमित विषय नहीं है। इसका सीधा संबंध विज्ञान, पर्यावरण, कृषि, मानव स्वास्थ्य और सतत विकास से है। अनुप्रयुक्त एथोलॉजी के माध्यम से पशुओं के व्यवहार को वैज्ञानिक रूप से समझकर उनके लिए बेहतर और संवेदनशील व्यवस्थाएं विकसित की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि जीबीयू उत्कृष्ट शिक्षा और शोध के साथ ऐसे अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंचों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां ज्ञान का आदान-प्रदान हो और वैश्विक स्तर पर उपयोगी समाधान विकसित किए जा सकें।
मानव कल्याण और पशु प्रबंधन में भी उपयोगी हैं शोध विधियां : प्रो. डोनाल्ड एम. ब्रूम
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा विभाग के एमेरिटस प्रोफेसर डोनाल्ड एम. ब्रूम ने कहा कि दिल्ली में आयोजित ISAE सम्मेलन पशु कल्याण के वैज्ञानिक अध्ययन से जुड़े दुनिया के महत्वपूर्ण सम्मेलनों में से एक है। उन्होंने कहा कि पशु कल्याण के अध्ययन में अपनाई जाने वाली वैज्ञानिक विधियां मानव कल्याण और पशु प्रबंधन के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती हैं।
वैश्विक वैज्ञानिक ज्ञान और भारतीय अकादमिक उत्कृष्टता का संगम : डॉ. एस. धनलक्ष्मी
जीबीयू के स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी की डीन डॉ. एस. धनलक्ष्मी ने कहा कि विश्वविद्यालय में ISAE के 59वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करना गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन विश्व के प्रमुख विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों को एक मंच पर ला रहा है। इससे वैश्विक वैज्ञानिक ज्ञान का भारतीय अकादमिक उत्कृष्टता और आतिथ्य के साथ संगम हो रहा है, जिससे भविष्य में नए शोध और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के रास्ते खुलेंगे।
पहली बार भारत में आयोजित हो रही ISAE कांग्रेस
ISAE की अध्यक्ष एवं ब्राजील की फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ सांता कैटरीना की प्रोफेसर मारिया जोसे होट्ज़ेल ने कहा कि संगठन की 59वीं अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस का भारत में पहली बार आयोजन होना महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय ISAE समुदाय के लिए भारत के वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों से मिलने तथा भारतीय संस्कृति को करीब से समझने का शानदार अवसर है। उन्होंने सम्मेलन के दौरान अनुप्रयुक्त पशु व्यवहार विज्ञान से जुड़े सार्थक विचार-विमर्श की उम्मीद जताई।
प्रतिभागी श्री जी गौशाला का करेंगे दौरा
सम्मेलन में शामिल अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के लिए शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की भी व्यवस्था की गई है। इसी क्रम में प्रतिभागियों के लिए श्री जी गौशाला की यात्रा प्रस्तावित है, जहां वे पशुपालन और पशु कल्याण से जुड़ी व्यवस्थाओं को प्रत्यक्ष रूप से देख सकेंगे।
पशु कल्याण के लिए नए शोध और सहयोग का मंच
ISAE-2026 विज्ञान, व्यावहारिक अनुभव, संस्कृति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को एक मंच पर लेकर आया है। सम्मेलन में होने वाली चर्चाओं से पशु व्यवहार और कल्याण के क्षेत्र में नए शोध, अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा नीतिगत पहलों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। जीबीयू में आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन न केवल भारत में एप्लाइड एथोलॉजी के क्षेत्र को वैश्विक मंच से जोड़ रहा है, बल्कि मनुष्यों और पशुओं के बीच अधिक संवेदनशील, संतुलित और टिकाऊ सह-अस्तित्व की दिशा में वैज्ञानिक संवाद को भी मजबूत कर रहा है।

