ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (GBU) में आयोजित हो रहे 59वें अंतरराष्ट्रीय अनुप्रयुक्त एथोलॉजी सम्मेलन (ISAE-2026) के दूसरे दिन भी पशु व्यवहार, पशु कल्याण और वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। 10 से 14 अगस्त तक चल रहे इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न देशों के वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद, पशु चिकित्सक और पशु कल्याण विशेषज्ञ एक मंच पर अपने शोध, अनुभव और विचार साझा कर रहे हैं।
सम्मेलन का फोकस इस बात पर है कि पशु व्यवहार के वैज्ञानिक अध्ययन, आधुनिक तकनीक और शोध आधारित नीतियों के माध्यम से पशु कल्याण को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है और मनुष्य एवं पशुओं के बीच अधिक संतुलित तथा टिकाऊ सह-अस्तित्व कैसे विकसित किया जा सकता है।
पशु व्यवहार से लेकर AI तक कई विषयों पर चर्चा
सम्मेलन के दूसरे दिन पशु व्यवहार एवं कल्याण, कृषि एवं पशुपालन, प्रयोगशाला पशुओं का कल्याण, वन्यजीव प्रबंधन, साथी पशुओं की देखभाल, मानव-पशु संबंध और आधुनिक तकनीक के उपयोग जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे। विशेषज्ञों ने बताया कि पशु व्यवहार का अध्ययन अब केवल अकादमिक शोध तक सीमित नहीं रह गया है। आधुनिक तकनीक और Artificial Intelligence (AI) के इस्तेमाल से पशुओं के व्यवहार, स्वास्थ्य और कल्याण की निगरानी तथा विश्लेषण के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
कृषि एवं पशुपालन के क्षेत्र में पशुओं के व्यवहार को समझकर उनके लिए बेहतर आवास, पोषण, प्रबंधन और स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित की जा सकती है। वहीं वन्यजीवों के व्यवहार का वैज्ञानिक अध्ययन संरक्षण रणनीतियों और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में उपयोगी साबित हो सकता है।
मनुष्य और पशु दोनों के हितों में संतुलन जरूरी : प्रो. राणा प्रताप सिंह
GBU के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने कहा कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन विश्वविद्यालय के लिए केवल अकादमिक आयोजन नहीं हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर ज्ञान, अनुसंधान और मानवीय मूल्यों को जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि पशु कल्याण से जुड़े वैज्ञानिक अनुसंधान का उद्देश्य केवल नई जानकारी हासिल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसी व्यवस्थाओं का विकास करना होना चाहिए, जिनमें मनुष्य और पशु दोनों के हितों के बीच संतुलन कायम किया जा सके।
कुलपति ने कहा कि आधुनिक विज्ञान, तकनीक और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय से पशु कल्याण और मानव-पशु सह-अस्तित्व की दिशा में नई संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। ISAE-2026 विभिन्न देशों के वैज्ञानिकों के बीच संवाद, शोध सहयोग और नए विचारों के आदान-प्रदान के लिए महत्वपूर्ण मंच बन रहा है।
वैज्ञानिक आधार पर पशु कल्याण को मजबूत करना जरूरी : डॉ. विजय पाल सिंह
सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. विजय पाल सिंह ने कहा कि भारत में इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन अपने आप में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सम्मेलन की थीम ‘Shared Worlds’ भारत की उस सांस्कृतिक भावना से भी जुड़ती है, जिसमें समस्त जीव-जगत के साथ सह-अस्तित्व की भावना को महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि अनुप्रयुक्त एथोलॉजी का उद्देश्य केवल पशुओं के व्यवहार को समझना नहीं, बल्कि उस वैज्ञानिक समझ के आधार पर उनके लिए अधिक नैतिक, वैज्ञानिक और करुणामय व्यवस्थाएं विकसित करना है।
डॉ. सिंह के अनुसार कृषि, जैव-चिकित्सा अनुसंधान, वन्यजीव प्रबंधन और साथी पशुओं की देखभाल जैसे क्षेत्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पशु कल्याण को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।
कृषि और वन्यजीव संरक्षण में व्यवहार अध्ययन की अहम भूमिका
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने बताया कि पशुओं के व्यवहार को वैज्ञानिक रूप से समझने से उनके स्वास्थ्य और शारीरिक एवं मानसिक कल्याण को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। कृषि क्षेत्र में व्यवहार संबंधी अध्ययन के आधार पर पशुओं के लिए बेहतर प्रबंधन प्रणालियां तैयार की जा सकती हैं। इससे पशुओं की स्वास्थ्य स्थिति, उत्पादकता और जीवन गुणवत्ता में सुधार संभव है।
वहीं वन्यजीवों के मामले में उनके व्यवहार, आवास और मानव गतिविधियों के प्रति प्रतिक्रिया का अध्ययन संरक्षण योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है। मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को बेहतर बनाने के लिए भी वैज्ञानिक शोध को महत्वपूर्ण माना गया।
प्रयोगशाला अनुसंधान में पशु कल्याण पर जोर
सम्मेलन के दौरान प्रयोगशाला अनुसंधान में पशु कल्याण से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि जहां पशु प्रयोग वैज्ञानिक रूप से आवश्यक हों, वहां उन्हें जिम्मेदार, प्रभावी और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप किया जाना चाहिए। साथ ही अनावश्यक पशु प्रयोगों को कम करने के लिए वैकल्पिक शोध मॉडल और आधुनिक तकनीकों को विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। वैज्ञानिकों ने कहा कि भविष्य के शोध में ऐसी तकनीकों को बढ़ावा देना जरूरी है, जो बेहतर वैज्ञानिक परिणाम देने के साथ पशु कल्याण के मानकों को भी मजबूत करें।
वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग का मंच बना ISAE-2026
GBU में आयोजित ISAE-2026 अब पशु व्यवहार और पशु कल्याण के क्षेत्र में वैश्विक वैज्ञानिक संवाद के महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभर रहा है। सम्मेलन में चर्चा केवल वर्तमान शोध और उपलब्ध वैज्ञानिक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की शोध प्राथमिकताओं, AI एवं अन्य आधुनिक तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाओं पर भी केंद्रित है। आयोजकों का मानना है कि सम्मेलन से निकलने वाले वैज्ञानिक विचार और शोध सहयोग भविष्य में पशु कल्याण, वन्यजीव संरक्षण, टिकाऊ पशुपालन और मानव-पशु सह-अस्तित्व से जुड़ी नीतियों और व्यवस्थाओं को नई दिशा दे सकते हैं।

