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Thursday, July 9, 2026
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    Noida: “पहली बारिश… और ‘स्मार्ट सिटी’ पानी-पानी! करोड़ों खर्च के बाद भी डूबा नोएडा, आखिर हर साल जलभराव का जिम्मेदार कौन? सड़कों पर उतरी NCF, अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की उठी बुलंद मांग”

    First rain... and 'Smart City' water-water! Noida submerged even after spending crores, after all who is responsible for waterlogging every year

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    नोएडा, द न्यूज क्लिक।
    बारिश की कुछ घंटों की फुहार और पूरा शहर मानो थम गया। कहीं सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, कहीं सर्विस रोड पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, तो कहीं लोग कमर तक पानी में उतरकर अपने घर और दफ्तर पहुंचने को मजबूर दिखे। करोड़ों रुपये खर्च कर खुद को ‘स्मार्ट सिटी’ कहने वाला नोएडा एक बार फिर मानसून की पहली बड़ी परीक्षा में फेल नजर आया। हर साल की तरह इस बार भी जलभराव ने नगर नियोजन, सीवरेज व्यवस्था और मानसून पूर्व तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है। इसी मुद्दे को लेकर नोएडा सिटीजन फोरम (NCF) ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई है।

    “स्मार्ट सिटी” की सड़कों पर दिखी बदहाल तस्वीर, लोग बोले— हर साल यही कहानी क्यों?

    लगातार हुई बारिश के बाद नोएडा के कई प्रमुख चौराहे, मुख्य सड़कें, सर्विस लेन, औद्योगिक क्षेत्र और आवासीय सेक्टर जलमग्न हो गए। कई जगहों पर पानी इतना भर गया कि कारें और दोपहिया वाहन बीच सड़क पर बंद हो गए। ई-रिक्शा चालक यात्रियों को उतारकर वाहन धक्का देते दिखाई दिए, जबकि स्कूली बच्चे, महिलाएं और नौकरीपेशा लोग पानी में पैदल चलने को मजबूर रहे।

    सबसे अधिक चिंता की बात यह रही कि कई स्थानों पर खुले नालों के पास बिजली के तार पड़े दिखाई दिए, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता था। औद्योगिक क्षेत्रों में कई फैक्ट्रियों और गोदामों में बारिश का पानी घुसने से लाखों रुपये के नुकसान की भी सूचना सामने आई।

    शहर की सड़कों पर उतरीं NCF की कार्यकारी अध्यक्षा शालिनी सिंह

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नोएडा सिटीजन फोरम (NCF) की कार्यकारी अध्यक्षा शालिनी सिंह स्वयं विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण करने पहुंचीं। उन्होंने कई स्थानों पर जलभराव, जाम, ओवरफ्लो होती नालियां और अधूरी सफाई व्यवस्था का जायजा लिया।

    निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जिन नालों की सफाई मानसून शुरू होने से पहले पूरी हो जानी चाहिए थी, उनकी सफाई बारिश के बीच भारी मशीनों से कराई जा रही थी। इस पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि समय पर नालों की सफाई कर दी जाती और जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रहती, तो शहरवासियों को इतनी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।

    “करोड़ों रुपये खर्च, लेकिन नतीजा हर साल शून्य”

    शालिनी सिंह ने कहा कि हर वर्ष नोएडा प्राधिकरण नालों की सफाई, सीवरेज नेटवर्क, जल निकासी और मानसून तैयारियों पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करता है। इसके बावजूद पहली ही तेज बारिश में पूरा शहर जलमग्न हो जाता है।उन्होंने सवाल उठाया कि यदि बजट खर्च हो चुका है तो फिर जलभराव क्यों होता है? यदि काम हुआ है तो उसका परिणाम जमीन पर क्यों नहीं दिखता? यदि काम नहीं हुआ तो जिम्मेदार कौन है?

    उनका कहना था कि यह केवल प्राकृतिक कारणों से उत्पन्न स्थिति नहीं है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, कमजोर निगरानी और कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती है।

    “सिर्फ ठेकेदार नहीं, अधिकारियों की भी तय हो जिम्मेदारी”

    NCF ने स्पष्ट कहा कि हर बार केवल ठेकेदारों पर जुर्माना लगाकर या नोटिस जारी कर देना पर्याप्त नहीं है। जिन अधिकारियों को इन कार्यों की निगरानी, गुणवत्ता जांच और समय पर कार्य पूर्ण कराने की जिम्मेदारी दी गई थी, उनकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।संगठन का कहना है कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक हर मानसून में यही हालात दोहराए जाते रहेंगे और जनता परेशान होती रहेगी।

    प्रदेश की ‘शो विंडो’ की छवि पर लग रहा दाग

    शालिनी सिंह ने कहा कि नोएडा को उत्तर प्रदेश की “शो विंडो” कहा जाता है। यहां देश-विदेश से निवेशक आते हैं और यह प्रदेश के सबसे आधुनिक शहरों में गिना जाता है। लेकिन हर मानसून में जलभराव की तस्वीरें पूरे प्रदेश की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने कहा कि जब निवेशकों, उद्योगों और आम नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं ही नहीं मिलेंगी तो स्मार्ट सिटी की अवधारणा पर भी सवाल उठेंगे।

    नोएडा विधायक से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

    नोएडा सिटीजन फोरम ने नोएडा के विधायक से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए पांच प्रमुख मांगें रखी हैं—मानसून पूर्व तैयारियों और जलभराव के कारणों पर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ से विस्तृत रिपोर्ट लेकर उसे सार्वजनिक किया जाए। नालों की सफाई और जल निकासी का कार्य करने वाली कंपनियों के नाम, भुगतान, कार्य विवरण और संबंधित अधिकारियों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। जलभराव रोकने में विफल कंपनियों को तत्काल ब्लैकलिस्ट किया जाए।

    लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय एवं प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। भविष्य में जलभराव रोकने के लिए समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह कार्ययोजना तैयार कर जनता के सामने रखी जाए।

    “एसी दफ्तरों से निकलकर सड़क पर उतरें अधिकारी”

    शालिनी सिंह ने कहा कि अब समय आ गया है कि अधिकारी केवल फाइलों और बैठकों तक सीमित न रहें, बल्कि स्वयं सड़कों पर उतरकर सीवरेज व्यवस्था और जल निकासी की वास्तविक स्थिति देखें।

    उन्होंने कहा कि जब थोड़ी सी बारिश में पूरा शहर ठहर जाए, उद्योगों को आर्थिक नुकसान हो, बच्चे स्कूल न पहुंच सकें और आम नागरिक जान जोखिम में डालकर पानी पार करने को मजबूर हों, तब इसे केवल प्राकृतिक आपदा नहीं कहा जा सकता। यह प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर विफलता है।

    उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब जनता को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जवाबदेही, पारदर्शिता और ठोस कार्रवाई चाहिए, ताकि हर वर्ष मानसून के साथ आने वाली यह समस्या हमेशा के लिए खत्म हो सके।

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