नोएडा, द न्यूज क्लिक। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने नोएडा के सेक्टर-105 में हालात बेहद गंभीर बना दिए हैं। क्षेत्र से गुजरने वाला मुख्य नाला क्षमता से अधिक भर जाने के कारण ओवरफ्लो हो गया है, जिससे गंदा पानी बैकफ्लो होकर सेक्टर की आंतरिक नालियों और सड़कों पर फैल गया है। इसके चलते पूरे इलाके में व्यापक जलभराव हो गया है और लोगों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। स्थिति उस समय और अधिक चिंताजनक हो गई, जब एटीएस हेमलेट से आने वाला वर्षा जल भी तेज़ी से सेक्टर-105 के नाले में पहुंचने लगा। अतिरिक्त जलभराव के कारण ग्रीन बेल्ट, आंतरिक सड़कें और नालियां पानी से लबालब हो गई हैं।

ट्रांसफार्मरों पर मंडरा रहा खतरा, करंट फैलने की आशंका
सेक्टर की ग्रीन बेल्ट में स्थापित मुख्य बिजली ट्रांसफार्मरों के आसपास भारी जलभराव हो गया है। ट्रांसफार्मरों से जुड़ी भूमिगत विद्युत केबलें पूरी तरह पानी में डूब चुकी हैं। ऐसे में केबलों के क्षतिग्रस्त होने और पानी में करंट उतरने का खतरा बढ़ गया है, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
पिछले साल 48 घंटे तक गुल रही थी बिजली
सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने बताया कि पिछले वर्ष भी इसी तरह के जलभराव के कारण अंडरग्राउंड केबलें क्षतिग्रस्त हो गई थीं, जिससे पूरे सेक्टर में लगभग 48 घंटे तक बिजली आपूर्ति ठप रही थी। इस बार भी हालात उसी दिशा में बढ़ते दिखाई दे रहे हैं, जिससे स्थानीय निवासियों में चिंता और आक्रोश दोनों बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो न केवल बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है, बल्कि जनहानि जैसी गंभीर घटना की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
प्राधिकरण और बिजली विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
आरडब्ल्यूए ने नोएडा प्राधिकरण और विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल युद्धस्तर पर कार्रवाई करने की मांग की है। मांग की गई है कि:
मुख्य नाले के बैकफ्लो को तुरंत रोका जाए।
ग्रीन बेल्ट और ट्रांसफार्मर क्षेत्र से पानी निकालने के लिए हाई-कैपेसिटी पंप लगाए जाएं।
बिजली के ट्रांसफार्मरों और भूमिगत केबलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी टीम तत्काल मौके पर भेजी जाए।
जलभराव वाले क्षेत्रों की लगातार निगरानी कर संभावित दुर्घटनाओं को रोका जाए।
आरडब्ल्यूए का कहना है कि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाने से सेक्टर को बड़ी दुर्घटना, लंबे बिजली संकट और जन-धन के नुकसान से बचाया जा सकता है।

