ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण के अनुकूल शहर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए फीडबैक फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट ने ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) के सहयोग से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management – SWM) नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए व्यापक जागरूकता एवं प्रशिक्षण अभियान शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य केवल कूड़े के निस्तारण तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों, औद्योगिक इकाइयों और आवासीय सोसाइटियों में कचरा प्रबंधन की वैज्ञानिक सोच विकसित करना भी है, ताकि ग्रेटर नोएडा आने वाले वर्षों में देश के सबसे स्वच्छ और टिकाऊ शहरों में अपनी पहचान बना सके।
औद्योगिक इकाइयों से लेकर हाईराइज सोसाइटियों तक चला जागरूकता अभियान
इस विशेष अभियान के तहत ग्रेटर नोएडा के विभिन्न बल्क वेस्ट जनरेटर्स (BWGs) को शामिल किया गया। जागरूकता एवं प्रशिक्षण सत्र श्री भारत इंटरनेशनल कंपनी (इकोटेक-12), स्टेलर जीवन सोसाइटी (सेक्टर-1) तथा 11th एवेन्यू सोसाइटी (सेक्टर-16C) में आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में उद्योगों के प्रतिनिधियों, आवासीय सोसाइटियों के निवासियों, प्रशासनिक अधिकारियों, प्रबंधन टीमों और हाउसकीपिंग स्टाफ ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को बताया कि यदि प्रत्येक संस्था और प्रत्येक परिवार अपने स्तर पर कचरे का सही तरीके से पृथक्करण और निस्तारण करे, तो शहर में प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

कचरे को बोझ नहीं, संसाधन समझने की दी सीख
प्रशिक्षण सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 केवल कानूनी प्रावधान नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। प्रतिभागियों को गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने, रिसाइक्लिंग, कम्पोस्टिंग, प्लास्टिक कचरे के सुरक्षित निस्तारण और ई-वेस्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि यदि कचरे का सही प्रबंधन किया जाए तो यही अपशिष्ट ऊर्जा, खाद और अन्य उपयोगी संसाधनों में बदला जा सकता है। इससे न केवल पर्यावरण सुरक्षित रहेगा बल्कि नगर निकायों पर कचरा प्रबंधन का आर्थिक बोझ भी कम होगा।
स्वच्छ शहर के लिए सबकी भागीदारी जरूरी
कार्यक्रम में यह संदेश विशेष रूप से दिया गया कि स्वच्छता केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें निवासी, उद्योग, सोसाइटी प्रबंधन, प्रशासन और हाउसकीपिंग स्टाफ सभी की बराबर भागीदारी आवश्यक है। यदि प्रत्येक नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझकर कचरा प्रबंधन के नियमों का पालन करे तो ग्रेटर नोएडा को स्वच्छ और टिकाऊ शहर बनाने का लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि कचरे का गलत निस्तारण जल, वायु और मिट्टी प्रदूषण का प्रमुख कारण बनता है। वहीं वैज्ञानिक तरीके से अपशिष्ट प्रबंधन अपनाने से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है।
पर्यावरण संरक्षण के साथ सतत विकास की ओर कदम
फीडबैक फाउंडेशन और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की यह संयुक्त पहल शहर में पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ सस्टेनेबल डेवलपमेंट की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अभियान के माध्यम से लोगों को यह समझाया गया कि स्वच्छता केवल अभियान नहीं बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बननी चाहिए। विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाले समय में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का दायरा और बढ़ाया जाएगा ताकि अधिक से अधिक औद्योगिक इकाइयों, संस्थानों और आवासीय सोसाइटियों को इससे जोड़ा जा सके।
स्वच्छ ग्रेटर नोएडा का सपना होगा साकार
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने संस्थानों और आवासीय परिसरों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का पालन करने तथा अन्य लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि इसी प्रकार जनभागीदारी बढ़ती रही तो ग्रेटर नोएडा स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नई मिसाल कायम करेगा।

