ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। ग्रेटर नोएडा के गांवों और झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में रहने वाले हजारों जरूरतमंद लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को घर के करीब पहुंचाने की दिशा में एक बड़ी पहल की गई है। शारदा वेलफेयर फाउंडेशन ने होंडा इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से ‘प्रोजेक्ट स्वस्थ’ की शुरुआत की है। इस महत्वाकांक्षी सामाजिक अभियान का उद्देश्य उन लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना है, जो आर्थिक, सामाजिक या भौगोलिक कारणों से समय पर इलाज और स्वास्थ्य जांच नहीं करा पाते। इस अभियान में राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स), ग्रेटर नोएडा मेडिकल पार्टनर के रूप में विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।
स्वास्थ्य केवल उपचार का विषय नहीं, बल्कि एक स्वस्थ समाज की नींव है। इसी सोच के साथ शुरू किया गया यह अभियान केवल एक मेडिकल कैंप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नियमित स्वास्थ्य जांच, जागरूकता, उपचार और फॉलोअप के माध्यम से लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बीमारियों की समय रहते पहचान हो जाए तो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है। यही इस परियोजना का सबसे बड़ा उद्देश्य भी है।
113 लोगों की हुई निःशुल्क जांच, विशेषज्ञ डॉक्टरों ने दी स्वास्थ्य संबंधी सलाह
‘प्रोजेक्ट स्वस्थ’ के शुभारंभ अवसर पर एक निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया, जिसमें 113 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई। शिविर में आए लोगों का रक्तचाप, ब्लड शुगर, बॉडी मास इंडेक्स (BMI), ऑक्सीजन स्तर (SpO₂) सहित कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण किए गए। जिन मरीजों में गंभीर बीमारी की आशंका या विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता पाई गई, उन्हें आगे की जांच और इलाज के लिए संबंधित अस्पतालों में रेफर किया गया। शिविर के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मरीजों को उनके स्वास्थ्य संबंधी सवालों के जवाब दिए और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित किया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों, महिलाओं, बुजुर्गों और श्रमिक वर्ग ने इस सुविधा का लाभ उठाया।

गांवों और स्लम बस्तियों पर विशेष फोकस
ग्रेटर नोएडा में तेजी से शहरीकरण होने के बावजूद आज भी कई गांव और स्लम क्षेत्र ऐसे हैं, जहां नियमित स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सीमित है। आर्थिक तंगी, रोज़गार की व्यस्तता और अस्पतालों की दूरी के कारण लोग छोटी बीमारियों को भी नजरअंदाज कर देते हैं। यही छोटी समस्याएं बाद में गंभीर बीमारी का रूप ले लेती हैं।
‘प्रोजेक्ट स्वस्थ’ के तहत ऐसे क्षेत्रों की पहचान की गई है, जहां स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे अधिक आवश्यकता है। गांवों की आबादी, प्रवासी श्रमिकों की संख्या और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं का अध्ययन करने के बाद इन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है, ताकि जरूरतमंद लोगों तक सीधे स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकें।
केवल इलाज नहीं, स्वास्थ्य जागरूकता पर भी रहेगा जोर
इस परियोजना का उद्देश्य केवल मरीजों का इलाज करना नहीं है, बल्कि लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाना भी है। अभियान के दौरान नियमित स्वास्थ्य जांच के साथ-साथ संतुलित आहार, स्वच्छता, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को यह भी बताएंगे कि समय-समय पर जांच कराना क्यों जरूरी है और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना किस प्रकार गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है।
आयुष्मान भारत योजना से भी जोड़े जाएंगे पात्र लाभार्थी
‘प्रोजेक्ट स्वस्थ’ की एक विशेष पहल यह भी है कि पात्र लोगों को आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा जाएगा। जिन लोगों का आयुष्मान कार्ड नहीं बना है, उनकी केवाईसी प्रक्रिया पूरी कराने में भी मदद की जाएगी। जरूरत पड़ने पर मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाएगा और उनके उपचार की प्रगति पर भी नजर रखी जाएगी, ताकि इलाज बीच में न रुके। इस प्रकार यह अभियान केवल स्वास्थ्य जांच तक सीमित न रहकर मरीजों के संपूर्ण उपचार और स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा।

सामुदायिक भागीदारी से मजबूत होगी स्वास्थ्य व्यवस्था
कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और क्षेत्र के नागरिकों ने भी भाग लिया। वक्ताओं ने कहा कि जब सरकारी संस्थान, निजी संस्थाएं और सामाजिक संगठन मिलकर काम करते हैं, तभी समाज में वास्तविक परिवर्तन संभव होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल न केवल लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराएगी, बल्कि भविष्य में बीमारियों का बोझ भी कम करेगी। ‘प्रोजेक्ट स्वस्थ’ आने वाले समय में ग्रेटर नोएडा की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मॉडल साबित हो सकता है। स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की यह पहल निश्चित रूप से उन हजारों परिवारों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है, जो अब तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाओं से वंचित थे।

