ग्रेटर नोएडा, द न्यूज क्लिक। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ग्रेटर नोएडा के चर्चित ग्रैंड वेनिस मॉल (ग्रैंड वेनेजिया) से जुड़े कारोबारी सतिंदर सिंह भसीन के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 389 अचल संपत्तियों को कुर्क (अस्थायी रूप से अटैच) कर दिया है। ईडी के अनुसार इन संपत्तियों की खरीद कीमत करीब 240.03 करोड़ रुपये है, जबकि वर्तमान बाजार मूल्य 700 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की गई है।
ईडी के मुताबिक यह मामला भसीन इन्फोटेक एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (BIIPL), ग्रैंड वेनेजिया कमर्शियल टावर्स प्राइवेट लिमिटेड (GVCTPL), सतिंदर सिंह भसीन और उनसे जुड़ी अन्य कंपनियों से संबंधित है। जांच एजेंसी का आरोप है कि निवेशकों से एकत्र की गई राशि का कथित रूप से दुरुपयोग कर विभिन्न स्थानों पर संपत्तियां खरीदी गईं और धन के वास्तविक स्रोत को छिपाने के लिए कई कंपनियों का इस्तेमाल किया गया।
ग्रैंड वेनेजिया मॉल की 384 दुकानें भी कुर्क
ईडी द्वारा कुर्क की गई संपत्तियों में ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर स्थित ग्रैंड वेनेजिया मॉल की 384 कमर्शियल यूनिट और दुकानें शामिल हैं। इनकी अनुमानित खरीद कीमत करीब 203 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके अलावा गोवा में स्थित पांच अचल संपत्तियां, जिनकी कीमत लगभग 37 करोड़ रुपये आंकी गई है, उन्हें भी अटैच किया गया है। जांच एजेंसी का कहना है कि इन संपत्तियों का संबंध कथित तौर पर उस धन से है, जो निवेशकों से परियोजना के नाम पर जुटाया गया था। ईडी का दावा है कि बाद में इसी धन का उपयोग अन्य राज्यों में संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया।
निवेशकों को कब्जा देने का कथित झूठा आश्वासन
ईडी ने अपनी जांच उत्तर प्रदेश और दिल्ली में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की। जांच में आरोप लगाया गया है कि ग्रैंड वेनेजिया कमर्शियल कॉम्प्लेक्स परियोजना में निवेशकों को समय पर कमर्शियल यूनिट का कब्जा देने और बेहतर रिटर्न का आश्वासन देकर करोड़ों रुपये का निवेश कराया गया। हालांकि, आरोप है कि निर्धारित समय पर न तो दुकानों का कब्जा दिया गया और न ही कई निवेशकों को उनका पैसा वापस मिला।

ईडी का कहना है कि परियोजना से जुटाई गई राशि को विभिन्न कंपनियों और खातों के माध्यम से स्थानांतरित किया गया तथा बाद में उससे अचल संपत्तियां खरीदी गईं। यही वजह है कि जांच एजेंसी ने इन संपत्तियों को मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी संपत्ति मानते हुए कुर्क किया है।
शेल कंपनियों के जरिए धन छिपाने का आरोप
जांच के दौरान ईडी को यह भी जानकारी मिली कि सतिंदर सिंह भसीन ने कई शेल कंपनियां बनाई थीं। आरोप है कि इन कंपनियों का उपयोग धन के वास्तविक स्रोत को छिपाने, निवेशकों से प्राप्त राशि को इधर-उधर स्थानांतरित करने और संपत्तियों की खरीद के लिए किया गया। ईडी के अनुसार गोवा में स्थित कुछ संपत्तियां भी इन्हीं संबंधित कंपनियों के नाम पर खरीदी गई थीं। एजेंसी अब इन कंपनियों के वित्तीय लेन-देन और अन्य संपत्तियों की भी जांच कर रही है।
पहले भी हो चुकी है छापेमारी
इस मामले में ईडी इससे पहले भी कार्रवाई कर चुकी है। अप्रैल 2025 में दिल्ली, नोएडा और अन्य स्थानों पर स्थित आवासीय एवं व्यावसायिक परिसरों पर छापेमारी की गई थी। उस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और लगभग 36 लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे। जांच एजेंसी ने इन दस्तावेजों के आधार पर आगे की वित्तीय जांच को आगे बढ़ाया। इसके बाद ईडी ने कई बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और संपत्ति संबंधी दस्तावेजों की जांच की, जिसके आधार पर अब 389 संपत्तियों को अटैच करने की कार्रवाई की गई है।
जांच जारी, आगे और कार्रवाई संभव
ईडी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और यदि जांच के दौरान अन्य संपत्तियों, कंपनियों या वित्तीय लेन-देन से जुड़े नए तथ्य सामने आते हैं तो कानून के अनुसार आगे भी कार्रवाई की जाएगी। एजेंसी निवेशकों के धन के प्रवाह, कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की विस्तार से जांच कर रही है।
इस कार्रवाई को ग्रेटर नोएडा के रियल एस्टेट क्षेत्र में हाल के वर्षों की सबसे बड़ी प्रवर्तन कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। निवेशकों को उम्मीद है कि जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से उनके हितों की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

